प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में टैरिफ वॉर (व्यापार युद्ध) के वैश्विक संदर्भ में स्वदेशी जीवनशैली को अपनाने का जोरदार आह्वान किया है। उन्होंने एक लोकप्रिय कहावत का सहारा लेते हुए कहा, “शिकंजी है तो कोका कोला क्यों?”, जो स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का प्रतीक है। यह बयान अमेरिका-चीन जैसे देशों के बीच चल रहे टैरिफ विवादों के बीच आया है, जहां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो रही हैं।
भागवत ने स्वदेशी को न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बताया, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मजबूती का आधार भी माना। यह बयान RSS की शताब्दी वर्ष (2025) की तैयारियों के दौरान आया, जब संगठन ‘पंच परिवर्तन’ (पांच बदलाव) पर जोर दे रहा है, जिसमें स्वदेशी जीवनशैली प्रमुख है।
RSS का स्वदेशी मंत्र और टैरिफ वॉर
2025 में अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ युद्ध चरम पर है, जहां अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर 60% तक टैरिफ लगाए हैं, जबकि चीन ने जवाबी कार्रवाई की है। इससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है, और भारत जैसे देशों को आयात पर निर्भरता कम करने की चुनौती मिली है। इसी बीच, भारत सरकार ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत कर रही है, जो RSS की स्वदेशी विचारधारा से मेल खाता है।
RSS की स्थापना (1925) से ही स्वदेशी आंदोलन (जैसे स्वदेशी साबित, खादी) इसका मूल सिद्धांत रहा है। मोहन भागवत ने कई अवसरों पर कहा है कि विदेशी उत्पादों की होड़ से भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था कमजोर होती है। 2021 के दशहरा उत्सव में उन्होंने ‘मन का ब्रेक-उत्तम ब्रेक’ सूत्र दिया था, जिसमें पारिवारिक संवाद के जरिए सांस्कृतिक प्रदूषण से बचने पर जोर दिया। लेकिन 2025 में, टैरिफ वॉर के बीच यह बयान अधिक प्रासंगिक हो गया।
RSS 2025 में अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। इस वर्ष संगठन ‘पंच परिवर्तन’ पर फोकस कर रहा है, जो स्वयंसेवकों को जीवन में अपनाने के लिए हैं। भागवत ने मथुरा की अखिल भारतीय कार्यकारी बैठक (अक्टूबर 2024) में इनकी घोषणा की, जो 2025 में और मजबूत हुई।
‘शिकंजी है तो कोका कोला क्यों’: मोहन भागवत
मोहन भागवत ने 26 अगस्त को नागपुर में RSS की एक आंतरिक बैठक के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “जब घर में शिकंजी (निम्बू पानी) उपलब्ध है, तो कोका कोला जैसी विदेशी चीजों की क्या जरूरत ? टैरिफ वॉर हमें सिखा रहा है कि विदेशी निर्भरता खतरे से खाली नहीं। स्वदेशी अपनाकर हम न केवल अर्थव्यवस्था मजबूत करेंगे, बल्कि अपनी संस्कृति को भी संरक्षित रखेंगे।”
यह बयान दशहरा रैली (अक्टूबर 2024) के बाद आया, जहां भागवत ने हिंदू एकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि वैश्विक संकटों (जैसे टैरिफ वॉर, पर्यावरण संकट) में स्वदेशी ही समाधान है। इस बयान ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी। कई लोगों ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ से जोड़ा, जबकि विपक्ष ने इसे ‘पुरानी स्वदेशी सोच’ बताया। RSS प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने स्पष्ट किया कि यह आर्थिक राष्ट्रवाद का हिस्सा है, न कि बहिष्कार का।
RSS का ‘पंच परिवर्तन’
भागवत ने स्वदेशी को ‘पंच परिवर्तन’ के चौथे स्तंभ के रूप में रखा है। यह पांच बदलाव RSS स्वयंसेवकों और समाज को अपनाने के लिए हैं:कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संवाद बढ़ाना, तकनीकी हमलों से बचाव।
सामाजिक समरसता: जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकता, जैसे योगी आदित्यनाथ के ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ बयान का समर्थन। जल-वायु संकट से निपटना। विदेशी उत्पादों के बजाय स्थानीय अपनाना, जैसे शिकंजी vs कोका कोला। राष्ट्रप्रेम और सद्भाव जगाना।
भागवत ने कहा, “ये परिवर्तन अपनाकर हम विश्व गुरु भारत का सपना साकार करेंगे। टैरिफ वॉर जैसे संकट हमें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दे रहे हैं।” 2024 में देशभर में 6,645 नई शाखाएं बढ़ीं, जो इन परिवर्तनों को फैलाने का माध्यम हैं।प्रतिक्रियाएं और विश्लेषणसरकार और BJP का समर्थन: पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ से जोड़ा। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “RSS की स्वदेशी सोच देश की दिशा निर्धारित करती है।”
विपक्ष की आलोचना
कांग्रेस ने इसे ‘पुरानी मानसिकता’ बताया, जबकि AAP ने कहा कि “यह ‘व्यावहारिक नहीं’। लेकिन एक्सपर्ट्स (जैसे राकेश सिन्हा) का मानना है कि “RSS की यह सोच जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों पर भी प्रभाव डालेगी, जहां संगठन ने सामाजिक समानता का समर्थन किया।
टैरिफ वॉर में भारत ने चीनी आयात पर पाबंदी बढ़ाई, जो RSS के मंत्र से मेल खाता है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, स्वदेशी से MSME सेक्टर मजबूत होगा। संगठन 80+ देशों में सक्रिय है, लेकिन भारत में 55,000+ शाखाएं हैं। शताब्दी वर्ष में बड़े कार्यक्रम होंगे।
RSS की 100 वर्षीय यात्रा का प्रतीक
मोहन भागवत का यह मंत्र टैरिफ वॉर के बीच भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान है। ‘शिकंजी है तो कोका कोला क्यों’ नारा केवल उत्पादों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवनशैली का प्रतिनिधित्व करता है। RSS का दावा है कि इससे हिंदू समाज मजबूत होगा और अखंड भारत का सपना साकार होगा। हालांकि, चुनौतियां बनी रहेंगी, जैसे वैश्वीकरण vs स्वदेशी का संतुलन। कुल मिलाकर, यह बयान RSS की 100 वर्षीय यात्रा का प्रतीक है, जो राष्ट्रवाद को नई ऊर्जा दे रहा है।