अहमदाबाद : गुजरात के वडोदरा शहर (Gujarat’s Vadodara City) में व्यक्ति को एक निजी स्कूल में दो बच्चों का प्रवेश दिलाने के लिए खुद को पीएमओ अधिकारी बताने और फर्जी पहचान के साथ भारी रकम की ठगी करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार को मयंक तिवारी की गिरफ्तारी हुई है। इससे पहले किरण पटेल नाम के एक शख्स को जम्मू-कश्मीर के एक पांच सितारा होटल से गिरफ्तार किया गया था। किरण पटेल ने भी खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का एक वरिष्ठ अधिकारी बताया था। आतिथ्य सत्कार के अलावा किरण पटेल ने जम्मू-कश्मीर में अधिकारियों को गुमराह कर के सुरक्षा कवर का फायदा उठाया था।
किरण पटेल ने जम्मू-कश्मीर में खुद को पीएमओ का अधिकारी बता आतिथ्य सत्कार का भी आनंद लिया था। शहर के वाघोडिया पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि नई दिल्ली में पीएमओ में एक निदेशक (रणनीतिक सलाहकार) के रूप में अपनी पहचान बताने वाला मयंक तिवारी पहली बार प्रवेश सत्र के दौरान मार्च 2022 में स्कूल एवं उसके ट्रस्टी के संपर्क में आया था। तिवारी ने अपने ‘पारिवारिक मित्र’ के दो बेटों को स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए सिफारिश की। उसने खुद को भारतीय सेना के अधिकारी मिर्जा बेग के रूप में बताया और कहा कि उसको पुणे से वडोदरा ट्रांसफर किया गया है।
स्कूल के निदेशक ने तिवारी (Mayank Tiwari) को ट्रस्टी से मिलने के लिए कहा जो वडोदरा में एक निजी विश्वविद्यालय से भी जुड़े हैं। अधिकारी ने बताया कि ट्रस्टी पर दबाव डालने के लिए मयंक तिवारी ने उनसे कहा कि वह उनके स्कूल को शिक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में शामिल करा सकता है। उसको विभिन्न परियोजनाएं दिला सकता है। एफआईआर में कहा गया है कि चिकनी-चुपड़ी बात करने वाले ने ट्रस्टी एवं स्कूल के निदेशक को बड़ी रकम ठगने के इरादे से विश्वास में लिया और दोनों बच्चों का प्रवेश भी सुरक्षित कर लिया। उसने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में उल्लेखित किया था कि वह पीएमओ का अधिकारी है।
एफआईआर में कहा गया है कि चिकनी-चुपड़ी बात करने वाले ने ट्रस्टी एवं स्कूल निदेशक को बड़ी रकम ठगने के इरादे से विश्वास में लिया। उन्होंने विशेष मामले के रूप में दोनों बच्चों का प्रवेश भी सुरक्षित कर लिया। आखिरकार कुछ महीने बाद ट्रस्टी को तिवारी के पीएमओ अधिकारी होने के दावों और उनके द्वारा उल्लिखित शिक्षा अनुसंधान परियोजनाओं पर संदेह हुआ। इसके बाद उसने अपने आसपास के लोगों से इस बारे में अवगत कराया और तिवारी के बारे में गहन पूछताछ की। ट्रस्टी को पता चला कि तिवारी पीएमओ का अधिकारी नहीं है। उसने झूठी कहानी गढ़ कर उसे धोखा दिया है। इसके बाद ट्रस्टी ने पिछले महीने स्कूल को सतर्क किया।







