नई दिल्ली: अमेरिका से तनाव के बीच भारत की रूस और चीन से दोस्ती मजबूत हो रही है और ब्रिक्स को रफ्तार देने पर काम किया जा रहा है. इस बीच सवाल उठता है कि QUAD का भविष्य क्या होगा, जिसमें अमेरिका भी शामिल है. इस संगठन में भारत, अमेरिका के अलावा जापान और ऑस्ट्रेलिया भी हैं. QUAD पर सवाल इस वजह भी उठ रहे हैं, क्योंकि पीएम मोदी जापान के दौरे पर जा रहे हैं और इस साल के आखिर में भारत में ही QUAD का आयोजन होना है.
क्वाड का गठन 2004 में हुआ था, लेकिन यह 2017 तक निष्क्रिय रहा. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में इसको पुनर्जीवित किया था. फिर इसे जो बाइडेन ने आगे बढ़ाया. बाइडेन के नेतृत्व में इस समूह को 2021 में नेताओं के स्तर तक उन्नत किया गया.
नई दिल्ली ने क्या कहा?
पीएम की जापान यात्रा से पहले नई दिल्ली ने कहा कि भारत और जापान क्वाड समूह के तहत महत्वपूर्ण खनिजों जैसे मुद्दों पर अपने सहयोग को आगे बढ़ाना चाहते हैं. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा, भारत क्वाड समूह को बहुत महत्व देता है, जिसे अमेरिका के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद इंडो-पैसिफिक में चीन के काउंटर के रूप में देखा जाता है.
मिस्री ने कहा कि भारत अभी भी टैरिफ को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है और क्वाड देशों के साथ अपने सहयोग का विस्तार जारी रखने के लिए उत्सुक है. क्वाड का एक लक्ष्य महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग है, जो भारत और जापान दोनों के लिए प्राथमिकता है.
जापान जा रहे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी 28 अगस्त की शाम को जापान की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं. वह जापान के प्रधानमंत्री महामहिम शिगेरु इशिबा के साथ 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 29 और 30 अगस्त को जापान में रहेंगे. यह कई कारणों से एक महत्वपूर्ण यात्रा है.
यह प्रधानमंत्री मोदी की प्रधानमंत्री इशिबा के साथ पहली वार्षिक शिखर बैठक है. यह लगभग 7 वर्षों में उनकी पहली एकल जापान यात्रा भी है. उन्होंने पिछली बार 2018 में वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान का दौरा किया था. तब से, उन्होंने जापान का दौरा किया है, लेकिन वह बहुपक्षीय बैठकों और अन्य औपचारिक कार्यक्रमों के लिए रहा है. यह एक ऐसी यात्रा होगी जो पूरी तरह से भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय एजेंडे को समर्पित होगी.
अमेरिका के लिए जरूरी है क्वाड
ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान उप सहायक और दक्षिण और मध्य एशिया के लिए वरिष्ठ निदेशक के रूप में कार्य करने वालीं लिसा कर्टिस ने कहा कि टैरिफ और व्यापार संतुलन पर अपने फोकस के कारण राष्ट्रपति बड़े जियो पॉलिटिकल पिक्चर और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौतियों की अनदेखी कर रहे हैं.
उन्होंने क्वाड को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी हितों का समर्थन करने वाली गतिविधियों और नीतियों को बढ़ावा देने के लिए एक प्रभावी तंत्र बताया. उन्होंने आगे कहा कि यदि अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता विफल हो जाती है तो यह चीन के लिए एक स्पष्ट जीत होगी.
तनाव तो है, लेकिन बातचीत भी है जारी
भारत और अमेरिका के बीच तनाव तो बना हुआ है, लेकिन बातचीत का दौर भी चल रहा है, जो बताता है कि दोनों देश संबंधों को पटरी पर लाना चाहते हैं. दोनों के बीच रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए 2+2 इंटरसेशनल डायलॉग का आयोजन किया गया. इस बैठक में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए और रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग को और गहराने पर सहमति जताई.
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के लिए भारत इंडो-पैसिफिक में एक अहम रणनीतिक साझेदार है, जबकि भारत के लिए अमेरिका उच्च तकनीक, निवेश और रक्षा सहयोग का बड़ा स्रोत है. यही वजह है कि मतभेदों के बावजूद दोनों देश अपने रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.