नई दिल्ली: मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थरों की इमारत नहीं होते बल्कि लोगों की आस्था और पहचान का प्रतीक होते हैं. पूजा हिंदू धर्म का एक अहम हिस्सा है जिससे लोग भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं. लेकिन सोचिए अगर किसी देश में मंदिर बनाने पर पूरी तरह रोक हो और हिंदू रीति-रिवाज निभाना भी कानूनन अपराध माना जाए, तो वहां रह रहे लोगों के लिए यह कितना मुश्किल होगा? भारत के एक पड़ोसी देश में ऐसा ही सख्त नियम लागू है जहां न केवल हिंदू मंदिरों पर प्रतिबंध है बल्कि पूजा करना भी छिपकर करना पड़ता है वरना सजा का खतरा बना रहता है. यह पड़ोसी चीन-पाकिस्तान और बांग्लादेश नहीं है.
हिंदू मंदिरों पर पूरी तरह से पाबंदी…
असल में यह देश न तो पाकिस्तान है और न ही बांग्लादेश है जहां अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले की खबरें आती रहती हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि यह वही देश है जहां कभी हिंदू और बौद्ध साम्राज्य हुआ करते थे लेकिन आज वहां हिंदू मंदिरों पर पूरी तरह से पाबंदी है. यह देश और कोई नहीं बल्कि भारत का पड़ोसी मालदीव है.
मालदीव के संविधान के अनुसार वहां का हर नागरिक मुसलमान होना जरूरी है. यह देश जो दुनियाभर के पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है गैर-मुस्लिम धार्मिक गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध लगाता है. यहां हिंदू मंदिर नहीं बनाए जा सकते और किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पूजा या हिंदू त्योहार मनाने की अनुमति नहीं है.
करीब 5.5 लाख की आबादी वाले मालदीव में भारत और श्रीलंका से हजारों विदेशी कामगार रहते हैं. इसके बावजूद वहां के सख्त धार्मिक कानूनों के कारण हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करना बेहद मुश्किल हो जाता है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से पूजा करता है या अपने धर्म का प्रदर्शन करता है तो उसे जेल तक हो सकती है.
वहां धार्मिक स्वतंत्रता बिल्कुल अलग
भारत के दक्षिण में स्थित मालदीव कोच्चि केरल से महज 400-500 किलोमीटर दूर है. भौगोलिक रूप से भारत के नजदीक होने के बावजूद वहां धार्मिक स्वतंत्रता बिल्कुल अलग है. 2008 में मालदीव के संविधान में संशोधन कर इसे 100 प्रतिशत मुस्लिम राष्ट्र घोषित कर दिया गया था. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, सिर्फ मुसलमान ही मालदीव की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं और किसी भी गैर-इस्लामिक धार्मिक गतिविधि को सार्वजनिक रूप से करने पर प्रतिबंध है.







