नई दिल्ली: साल का पहला सूर्य ग्रहण समाप्त हो चुका है. अब 30 मार्च यानी कल से चैत्र नवरात्र भी प्रारंभ हो रहे हैं. इस साल चैत्र नवरात्र 30 मार्च से लेकर 6 अप्रैल तक रहने वाले हैं. चैत्र नवरात्र में पहले दिन घटस्थापना के साथ ही देवी की पूजा का संकल्प लिया जाता है. आइए जानते हैं कि चैत्र नवरात्र की घटस्थापना कैसे होगी.
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस साल चैत्र नवरात्र पर घटस्थापना या कलश स्थापना के दो शुभ मुहूर्त बन रहे हैं. पहला शुभ मुहूर्त 30 मार्च को सुबह 06.13 बजे से सुबह 10:22 बजे तक रहेगा. फिर दोपहर 12:01 बजे से दोपहर 12.50 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना कर सकेंगे.
चैत्र नवरात्र पर सूर्य ग्रहण का रहेगा असर?
ज्योतिषविदों की मानें तो 29 मार्च का सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं था. इसलिए यहां इसका कोई प्रभाव नहीं रहने वाला है. परिणामस्वरूप 30 मार्च की सुबह साधक बिना किसी चिंता के देवी की चौकी लगाकर तय मुहूर्त में घटस्थापना कर सकते हैं.
कलश स्थापना से पहले जरूर करें ये काम
29 मार्च को संध्याकाल में ग्रहण समाप्त होने के बाद 30 मार्च की सुबह जल्दी उठें. पूरे घर की साफ-सफाई करें. घर में गंगाजल का छिड़काव जरूर करें. स्नान के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहनें. तुलसी पर गंगाजल छिड़कें. फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार, गरीबों को खाने या इस्तेमाल की जाने वाली चीजें दान करें. जिस स्थान पर आप देवी की चौकी और कलश स्थापना करने वाले हैं, वहां साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़कें. इसके बाद शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करें.
कलश स्थापना की सामग्री
चैत्र नवरात्र पर घटस्थापना के लिए कुछ आवश्यक सामग्री चाहिए. इसमें चौड़े लकड़ी की चौकी, मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन, पवित्र स्थान की मिट्टी, 7 प्रकार के अनाज, कलश, गंगाजल, कलावा या मौली, सुपारी, आम या अशोक के पत्ते, अक्षत (साबुत चावल), जटा वाला नारियल, लाल कपड़ा, पुष्प और पुष्पमाला.
कलश स्थापना की विधि
घटस्थापना के लिए सबले पहले मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्तधान्य बोएं. फिर उसके ऊपर कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें. इसके बाद आम या अशोक के पल्लव को कलश के ऊपर रखें. अब नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पल्लव के बीच में रखें. इस नारियल में कलावा भी लपेटा होना चाहिए. घटस्थापना पूर्ण होने के बाद देवी का आह्वान करते हैं. आप चाहें तो अपनी इच्छानुसार और भी विधिवत पूजा कर सकते हैं.







