Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

हमारे राष्ट्र की बदलती तस्वीर, मंदिर से बढ़ेगा रोजगार!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 29, 2024
in राज्य, विशेष
A A
Shri Ram temple
16
SHARES
535
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रकाश मेहरा


अयोध्या। क्या हम अपनी आंखों के सामने एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण को आकार लेता हुआ देख रहे हैं? इस सवाल के जवाब के लिए मैं आपको दो लोगों से मिलवाना चाहूंगा।

इन्हें भी पढ़े

शरीर नीला, चोट के निशान! इन 5 सवालों में उलझी प्रतीक यादव की मौत की गुत्थी

May 13, 2026
सरकारी कर्मचारी

बिहार के लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, महंगाई भत्ते में हुआ 2% का इजाफा

May 13, 2026
Udhayanidhi Stalin

उदयनिधि स्टालिन का धर्म विरोधी बयान, कहा- सनातन ने लोगों को बांटा, उसे खत्म कर देना चाहिए

May 12, 2026
vijay thalapathy

TVK को झटका, CM विजय के विश्वास प्रस्ताव पर उनका एक MLA नहीं डाल पाएगा वोट

May 12, 2026
Load More

मंदिर निर्माण को लेकर मुस्लिम

पहले हैं, मेरे सहधर्मी अलमदार आब्दी। ये अयोध्या में बरसों से पत्रकारिता कर रहे हैं। मैंने उनसे सीधा प्रश्न किया कि मंदिर-निर्माण को लेकर आप और अयोध्या के मुस्लिम क्या सोचते हैं? उनका जवाब था कि जब तक विवाद चला, तब तक रह-रहकर संघर्ष होते रहे। इस दौरान अयोध्या में काम- काज बंद हो जाता था, लेकिन अब 1949 से शुरू हुआ यह मसला खत्म हो चुका है। अयोध्या नई राह पर चल पड़ी है और हम सब इसके राहगीर हैं। उन्होंने आगे जोड़ा- सन् 1992 में भय का माहौल था। । हमें भविष्य को लेकर डर बना रहता था। अब यह भरोसा है कि हमें कोई छेड़ेगा नहीं और हम मिल-जुलकर आज आगे बढ़ सकेंगे।’

बाद में शुजात-उद्-दौला और बहू बेगम के मकबरों में घूमते हुए आस-पास के लोगों से लगभग ऐसे ही विचार सुनने को मिले।

प्राण प्रतिष्ठा पर नेपाल के उद्योगपति

दूसरे शख्स हैं नेपाल के प्रमुख उद्योगपति और व्यवसायी उपेन्द्र महतो। वे रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मौजूद थे। उनका कहना है कि यह सिर्फ सनातन धर्म का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के संस्कृति के नए उत्थान का समय है। मैं नेपाल का नागरिक हूं, लेकिन उल्लसित हूं कि हमारे आपके आचार, विचार और व्यवहार समान हैं। इससे भारत और नेपाल के रिश्ते मजबूत होंगे और हमें भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मैं रामलला के मंदिर के निर्माण को सनातन धर्म के साथ संस्कृति का पुनर्जागरण मानता हूं।

गौर करें। अलमदार आब्दी भारतीय मुसलमान हैं और उपेन्द्र महतो नेपाली हिंदू। एक का धर्म, तो दूसरे की राष्ट्रीयता अलग है, पर वे समान भाव से सोच रहे हैं। जिन्होंने 1992 का जलजला देखा है, उनके लिए इस नए उपजते तत्व पर यकीन करना मुश्किल है। उन दिनों तमाम तथाकथित विचारकों ने घोषणा कर डाली थी, 6 दिसंबर को भारत की गंगा-जमुनी तहजीब के दर्दनाक खात्मे की शुरुआती तारीख माना जाएगा। वे गलत साबित हुए हैं।

पिछले एक महीने के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के तमाम मुस्लिम मित्रों से बात हुई। उनमें किसी ने भी मंदिर का विरोध नहीं किया। उन्हें लगता है कि कुछ विरोध सिर्फ विरोध के लिए किए जाते रहे हैं, जिसका साझा दुष्परिणाम सबको भुगतना पड़ता है। वे कहते हैं कि अयोध्या में मस्जिद बन जाने दीजिए, दस साल बाद यह जिला भाईचारे की एक अद्भुत मिसाल साबित होगा। नई दिल्ली की सुरा-सभाओं और ‘लुटियन्स’ की महफिलों में भी सुर बदल गए हैं। आभिजात्य वर्ग के ये लोग कुछ साल पहले तक इस मसले पर बोलना अपनी आन-बान- शान के खिलाफ समझते थे।

यह वैचारिक परिवर्तन हुआ कैसे?

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दस साल के कार्यकाल में उन तमाम अवधारणाओं को तोड़ने में सफलता हासिल की है, जो भयानक मुखौटों की तरह भारतीयों को डराने के काम आती थीं। उन्होंने दूसरा चुनाव जीतते ही ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे में ‘सबका विश्वास’ भी जोड़ा था। तब सवाल उठे थे कि वे सबका विश्वास कैसे जीतेंगे ? मोदी कभी सिर पर गोल टोपी नहीं लगाते और रोजा इफ्तार के आयोजन नहीं करते। वे इसे धार्मिक ‘तुष्टीकरण’ मानते हैं। इसके बावजूद यह भाव क्यों पनप रहा है? वजह साफ है। सरकार ने सुनिश्चित किया कि उसकी कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी भेद-भाव के हर उस शख्स तक पहुंचें, जिसे इनकी जरूरत है। अगर अनाज का निःशुल्क वितरण हो रहा है, तो सबको हो रहा है। सड़कें बन रही हैं, तो सबके लिए बन रही हैं। पाठशालाएं और अस्पताल किसी एक वर्ग विशेष की बपौती नहीं हैं। इन कल्याणकारी योजनाओं के साथ तीन तलाक के खात्मे ने मुस्लिम समाज की महिलाओं को नया संदेश देने में कामयाबी हासिल की और इस दौरान सांप्रदायिक दंगे भी काबू में रहे।

राम जन्मभूमि में आला अदालत

इस लेख की शुरुआत में दर्ज आब्दी साहब की अमन आकांक्षा से इन तथ्यों को जोड़ देखें, सब साफ हो जाएगा। आगरा के एम.के. खान तो उनसे भी दो कदम आगे बढ़कर कहते हैं कि जिस दिन राम जन्मभूमि मामले में आला अदालत का फैसला आया था, उस दिन मैंने अपने हिंदू दोस्तों के साथ मिठाई बांटी थी कि चलो, एक कड़वाहट का किस्सा तमाम हुआ। वे कहते हैं कि इस तरह के सभी धार्मिक विवादों का जल्द से जल्द निपटारा होना चाहिए, ताकि अमन और तरक्की की राह हमवार हो सके।

आप रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के समारोह में प्रधानमंत्री के भाषण को एक बार फिर ध्यान से पढ़ें या सुने। वे खान या आब्दी जैसे लोगों से ही रूबरू थे।

पीएम मोदी और आरएसएस का दृष्टिकोण

प्रधानमंत्री के भाषण में धार्मिकता थी, पर सांप्रदायिकता नहीं। सांस्कृतिक एकात्मकता थी, अलगाव नहीं। आने वाले खुशहाल भारत का सपना था और इसके लिए सबको साथ लेकर चलने की अभिलाषा भी। यह अनायास नहीं था कि उनसे ऐन पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने भी ‘जोश में होश’ कायम रखने की कामना के साथ कहा कि हमें अपने उल्लास में किसी दूसरे के मत और विश्वास को चोट पहुंचाने की कोई जरूरत नहीं है। जो लोग इस सारे आयोजन को सिर्फ चुनावी आडंबर मान रहे हैं, वे जो भी सोचें, पर अयोध्या में पिछले एक हफ्ते से उमड़ने वाली भीड़ और उसका व्यवहार साबित करता है कि हम खुले भाव से एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा न होता, तो जातिवाद अथवा सांप्रदायिक अलगाव के लिए बदनाम किए जाने वाले बंगाल और बिहार में 22 जनवरी को दीपावली नहीं मनाई जाती।

राम मंदिर पर सियासत

रही बात सियासत की, तो हमें भूलना नहीं चाहिए कि हर राजनीतिक दल राजनीति कर रहा है और राजनीति त्याग के लिए नहीं, सत्ता अर्जित करने के लिए की जाती है, लेकिन इस चर्चा को सांस्कृतिक परिवर्तन तक सीमित रखना बेहतर होगा।

जो भूल गए हैं, उन्हें मैं विनम्रतापूर्वक यूरोपीय पुनर्जागरण की याद दिलाना चाहूंगा। तेरहवीं-चौदहवीं शताब्दी से आरंभ होने वाले इस काल ने दुनिया को बदल दिया था। यह वह वक्त था, जब पूंजीवाद और समाजवाद एक साथ पनप रहे थे। इसी दौर में मैक्याविली और शेक्सपियर जन्मे, इसी काल-खंड में लियोनार्दो द विंची और डोनाटो ब्रैमांटे ने अपनी कला की अमर छाप छोड़ी। यूरोप तो अब ढलान पर है, लेकिन नेपाल के उपेन्द्र महतो इसे भारत के उभार का वक्त मानते हैं।

यहां एक और बात गौरतलब है। रोमन साम्राज्य के पतन के बाद यूरोप सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पतन के जिस दौर में चला गया था, उससे उबरने में छह-सात शताब्दियां लग गईं। हम 14 सौ साल की गुलामी के बाद सिर्फ 77 साल पहले आजाद हुए। इतने कम वक्त में सभ्यताएं करवट तक नहीं ले पातीं और हम पुनर्जागरण की प्रस्तावना रच रहे हैं। भरोसा रखिए, अब हमें अपने लिए नई और खुशनुमा गाथाएं रचने से कोई रोक नहीं सकता।


अयोध्या में पिछले एक हफ्ते से उमड़ने वाली भीड़ और उसका व्यवहार साबित करता है कि हम खुले भाव से एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा न होता, तो जातिवाद अथवा सांप्रदायिक अलगाव के लिए बदनाम किए जाने वाले बंगाल और बिहार में 22 जनवरी को दीपावली नहीं मनाई जाती : प्रकाश मेहरा

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
CBI headquarter

अब कोई परदादारी नहीं

May 2, 2023
CSIR-IHBT

सीएसआईआर-आईएचबीटी में शुरू हुआ ‘एक सप्ताह – एक प्रयोगशाला’ कार्यक्रम

February 20, 2023
circular economy

चक्रीय अर्थव्यवस्था की आवश्यकता क्यों?

July 9, 2024
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • ईंधन बचत के लिए पीएम मोदी का बड़ा कदम, काफिले में नजर आईं महज दो गाड़ियां
  • अक्षय कुमार ने जंगल में बिखेरा अपना स्वैग, अगली फिल्म का जबरदस्त लुक हुआ रिवील
  • नीट यूजी पेपर लीक का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, NTA को बदलने की मांग

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.