नई दिल्ली। ईरान युद्ध के दौरान अब चीन और अमेरिका भी समंदर में जहाजों के रोके जाने के मुद्दे को लेकर टकराव की स्थिति में आ गए हैं। चीन ने समंदर में पनामा के ध्वजों वाले जहाजों का रास्ता रोक कर उन्हें हिरासत में ले लिया है। इससे अमेरिका बौखला गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को इस घटना को लेकर चीन को खूब खरी-खोटी सुनाई और बीजिंग पर “धमकाने” का आरोप लगाया।
रूबियो ने चीन पर लगाया गंभीर आरोप
स्टेमफोर्ड एडवोकेट की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन द्वारा इन जहाजों को हिरासत में लिए जाने पर रूबियो ने कहा कि पनामा ने इस साल की शुरुआत में पनामा नहर के दो महत्वपूर्ण बंदरगाहों का नियंत्रण हांगकांग स्थित कंपनी की सहायक कंपनी से छीन लिया था, जिसके बाद चीन ने दर्जनों पनामा-ध्वज वाले जहाजों को हिरासत में लिया या उन्हें रोका। हालांकि, जहाजों को कुछ समय के लिए ही रोका गया। चीन ने इन आरोपों से इनकार किया है। पनामा अब अमेरिका और चीन के बीच चल रही बड़ी भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में फंस गया है। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग पर पनामा नहर को नियंत्रित करने का आरोप लगाया था।
अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है पनामा
ट्रंप प्रशासन पनामा नहर को वाणिज्यिक और सैन्य दोनों दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण मानता है। ट्रंप ने चुनाव अभियान के दौरान ही पनामा नहर को वापस लेने की बात कही थी। रुबियो ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कानूनी रूप से व्यापार कर रहे पनामा-ध्वज वाले जहाजों को चीन द्वारा रोके जाने या बाधित करने का फैसला आपूर्ति श्रृंखलाओं को अस्थिर करता है, लागत बढ़ाता है और वैश्विक व्यापार प्रणाली में विश्वास को कमजोर करता है।” उन्होंने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका पनामा के साथ खड़ा है और उसके संप्रभुता के खिलाफ किसी भी प्रतिशोधी कार्रवाई का विरोध करता है। हम हमेशा अपने साझेदारों का धमकाने के खिलाफ समर्थन करेंगे।”
मार्च में चीन ने 124 जहाजें रोकीं
टोक्यो एमओयू के सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार मार्च में चीन के बंदरगाहों में निरीक्षण के लिए 124 जहाजों को रोका गया, जिनमें से 92 (लगभग 75%) पनामा-ध्वज वाले थे। इन जहाजों को आमतौर पर कुछ दिनों यानी एक दिन से लेकर 10 दिनों तक रोका गया। उसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। यह संख्या पिछले दो महीनों की तुलना में बहुत ज्यादा है।
फरवरी में 45 जहाजों में से 19 (40% से ज्यादा) और जनवरी में 71 जहाजों में से 23 (30% से ज्यादा) पनामा-ध्वज वाले थे। चीन के वाशिंगटन स्थित दूतावास के प्रवक्ता लियू पेंगयू ने कहा, “अमेरिका के बार-बार लगाए जा रहे गलत आरोप केवल इस बात को उजागर करते हैं कि वह पनामा नहर पर नियंत्रण हासिल करना चाहता है।” उन्होंने चीन के बंदरगाहों में पनामा-ध्वज वाले जहाजों की संख्या में हुई वृद्धि पर कोई टिप्पणी नहीं की।
अमेरिका चाहता है पनामा पर नियंत्रण
यह घटना पनामा की सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के फैसले के बाद हुई है, जिसमें हांगकांग की सीके हचिसन होल्डिंग्स की सहायक कंपनी को बाल्बोआ और क्रिस्टोबल टर्मिनलों का कन्वेशन असंवैधानिक बताया गया था। अमेरिका पनामा और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों पर दबाव डाल रहा है कि वे पश्चिमी गोलार्ध में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकें। ट्रंप प्रशासन ने लैटिन अमेरिका के मामलों में दशकों में सबसे आक्रामक भूमिका निभाई है, जिसमें जनवरी में वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को सैन्य छापे में पकड़ना शामिल है। वाशिंगटन स्थित फेडरल मैरिटाइम कमीशन इन पनामा-ध्वज वाले जहाजों की निगरानी कर रहा है।
कमीशन की चेयर लॉरा डिबेला ने कहा, “रुबियो का बयान चीन सरकार की कार्रवाइयों के विघटनकारी प्रभाव को उजागर करता है।” उन्होंने कहा कि हाल के इतिहास में कोई भी देश जहाज सुरक्षा निरीक्षण और हिरासत को दंडात्मक तरीके से नहीं करता। पनामा सरकार ने कहा है कि डेनिश कंपनी ए.पी. मॉलर-मर्स्क की सहायक कंपनी APM टर्मिनल्स अस्थायी रूप से इन टर्मिनलों का प्रबंधन संभालेगी, जब तक नया अनुबंध नहीं दिया जाता।







