प्रकाश मेहरा
देहरादून ब्यूरो
चमोली : उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में 29 अगस्त को भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने भयंकर तबाही मचा दी है। यह घटना लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण हुई, जिससे नदियां उफान पर आ गईं, पुल बह गए, घर-दुकानें मलबे में दब गईं और कई लोग फंस गए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद इस पर दुख जताया और राहत-बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं।
बादल फटने की घटना
29 अगस्त (शुक्रवार) को सुबह से दोपहर तक। चमोली के देवाल ब्लॉक के मोपाटा क्षेत्र में बादल फटने की मुख्य घटना हुई, जबकि रुद्रप्रयाग के बसुकेदार क्षेत्र (बड़ेथ डुंगर तोक) में भी समान आपदा देखी गई। अचानक भारी वर्षा (कुछ जगहों पर 100 मिमी से अधिक) और भूस्खलन से मलबा पहाड़ियों से उतर आया। जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून पैटर्न को विशेषज्ञ इसका प्रमुख कारण बता रहे हैं।
चमोली जिला (देवाल, थराली, मोपाटा), रुद्रप्रयाग जिला (केदारघाटी, लवारा गांव, छेनागाड़, बसुकेदार), और आसपास के इलाके जैसे टिहरी गढ़वाल। अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों के संगम पर स्थिति सबसे गंभीर है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़, हरिद्वार और पौड़ी गढ़वाल में ऑरेंज/रेड अलर्ट जारी किया था। अगले 24-48 घंटों में भारी बारिश की चेतावनी बरकरार है।
चमोली जिले में बादल फटना
देवाल तहसील के मोपाटा क्षेत्र और थराली के पास। बादल फटने से पहाड़ी से मलबा और पानी तेजी से बहा आया। कई घर, दुकानें और सरकारी भवन मलबे में दब गए। थराली क्षेत्र में पानी घरों में घुस गया, जिससे स्थानीय लोग दहशत में हैं। 2 लोग लापता बताए जा रहे हैं। गौशालाओं में 15-20 मवेशी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका। सड़कें क्षतिग्रस्त, बद्रीनाथ हाईवे (श्रीनगर-रुद्रप्रयाग के बीच) अलकनंदा नदी में डूब गया, जिससे यातायात पूरी तरह अवरुद्ध।
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस टीमें मौके पर तैनात। हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट की तैयारी। जिलाधिकारी ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। स्कूल-आंगनबाड़ी केंद्र बंद।
केदारघाटी में पुल बहना और अन्य नुकसान
रुद्रप्रयाग जिले की केदारघाटी, विशेष रूप से लवारा गांव और तालजामन-बड़ेथ क्षेत्र। लवारा गांव में मोटरमार्ग पर बना पुल तेज बहाव में बह गया, जिससे छेनागाड़ क्षेत्र का संपर्क कट गया। बाजार में दुकानें, वाहन और घर मलबे में दबे। 4-6 घर पूरी तरह बह गए। बसुकेदार क्षेत्र में अतिवृष्टि से 4 घर क्षतिग्रस्त, लेकिन सभी निवासियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। 6 लोगों के लापता होने की खबर। मवेशी और खेत-खलिहान भी प्रभावित। खेत, सड़कें और आवासीय इलाके तबाह। छेनागाड़ बाजार में भारी तबाही।
रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस ने आवाजाही रोक दी। वैकल्पिक मार्गों से तीर्थयात्रियों को भेजा जा रहा है।
अलकनंदा नदी का खतरे के स्तर से ऊपर बहना
रुद्रप्रयाग शहर और अलकनंदा-मंदाकिनी नदियों का संगम स्थल। अलकनंदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान (लगभग 530 मीटर) को पार कर 534.80 मीटर तक पहुंच गया। यह 2013 की केदारनाथ आपदा जैसी स्थिति की याद दिला रहा है। मंदाकिनी नदी भी उफान पर, संगम क्षेत्र डूब गया। नदी का पानी आवासीय घरों और बाजारों तक पहुंच गया। टोडेश्वर टापू पूरी तरह जलमग्न। हनुमान मंदिर नदी में डूब गया, जिससे श्रद्धालुओं को दिक्कत।
कई घरों में बाढ़ का पानी घुसा, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति। सड़कें जलमग्न, यातायात ठप। भूस्खलन से अतिरिक्त खतरा। केंद्रीय जल आयोग ने लगातार निगरानी की। प्रभावित घर खाली कराए गए। कंट्रोल रूम से अपडेट जारी। हेलीकॉप्टर तैयार।
कुल नुकसान और हताहत मानवीय क्षति
2-6 लोग लापता (चमोली में 2, केदारघाटी में 6)। कोई पुष्ट मौत की खबर नहीं, लेकिन मलबे में फंसे परिवारों की तलाश जारी। दर्जनों घर-दुकानें क्षतिग्रस्त/बह गईं। 1-2 पुल बहे। सड़कें (बद्रीनाथ हाईवे सहित) अवरुद्ध। 15-20 मवेशी मरे। स्कूल बंद (चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ आदि)। केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई। बिजली-पानी आपूर्ति प्रभावित। अभी स्पष्ट नहीं, लेकिन स्थानीय मीडिया के अनुसार करोड़ों का नुकसान।
राहत और बचाव कार्य टीमें तैनात
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और स्थानीय पुलिस सक्रिय। 130+ लोगों को सुरक्षित निकाला गया (पिछली घटनाओं से सीखते हुए)। पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पर पोस्ट किया, “रुद्रप्रयाग के बसुकेदार और चमोली के देवाल में बादल फटने से परिवार फंस गए। राहत कार्य युद्ध स्तर पर। बाबा केदार से प्रार्थना।” उन्होंने आपदा सचिव और जिलाधिकारियों से संपर्क कर निर्देश दिए।
जनपद रुद्रप्रयाग के तहसील बसुकेदार क्षेत्र के अंतर्गत बड़ेथ डुंगर तोक और जनपद चमोली के देवाल क्षेत्र में बादल फटने के कारण मलबा आने से कुछ परिवारों के फंसे होने का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है। स्थानीय प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है, इस संबंध में निरंतर…
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) August 29, 2025
प्रधानमंत्री मोदी ने सीएम धामी से बात की। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में चर्चा की। उत्तराखंड आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन – 1070 या 0135-2710332। प्रभावित लोग संपर्क करें। प्रशासन ने नदी किनारे न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की।
भविष्य की चेतावनी और सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। अनियंत्रित निर्माण और जंगलों की कटाई खतरा बढ़ा रही है। अगले 2 दिनों में भारी बारिश जारी रह सकती है। प्रभावित जिलों में सतर्क रहें।नदी-नालों से दूर रहें, रेडियो/टीवी पर अपडेट सुनें, और आपदा किट तैयार रखें।