मुंबई: महाराष्ट्र में 5 दिसंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हैं, लेकिन महायुति ने अभी तक सीएम पद को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। कार्यवाहक मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने रविवार को कहा कि राज्य के नए मुख्यमंत्री के बारे में भारतीय जनता पार्टी फैसला करेगी, जिसे उनका पूरा समर्थन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार गठन को लेकर महायुति सहयोगियों के बीच कोई मतभेद नहीं है।
प्रेस कांफ्रेंस में शिंदे ने कहा कि सरकार गठन पर बातचीत चल रही है और सभी निर्णय महायुति के तीनों सहयोगियों शिवसेना, बीजेपी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) द्वारा आम सहमति से लिए जाएंगे। शिवसेना नेता शुक्रवार को अपने पैतृक गांव गए थे। ऐसी अटकलें थीं कि शिंदे नई सरकार के गठन से खुश नहीं हैं। शिंदे ने कहा कि वह नियमित रूप से अपने गांव आते हैं और उनके दौरे को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने पिछले हफ्ते ही मुख्यमंत्री पद पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया था।
आजाद मैदान में शपथ ग्रहण समारोह
बीजेपी, शिवसेना और अजित पवार की राकांपा के महायुति गठबंधन ने विधानसभा चुनावों में भारी जीत के साथ सत्ता बरकरार रखी, जिसके परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए गए। BJP की महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख चंद्रशेखर बावनकुले ने शनिवार को कहा कि नई महायुति सरकार का शपथ ग्रहण समारोह पांच दिसंबर की शाम दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में होगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसमें शामिल होंगे।
कल होगा सीएम का ऐलान?
अभी तक इस बात की घोषणा नहीं हुई है कि मुख्यमंत्री कौन होगा, लेकिन दो बार मुख्यमंत्री रह चुके देवेंद्र फडणवीस इस पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली निवर्तमान सरकार में फडणवीस उपमुख्यमंत्री थे। शिंदे ने पिछले हफ्ते कहा था कि शिवसेना महाराष्ट्र के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के फैसले का समर्थन करेगी। रविवार को उन्होंने कहा कि ‘कल विधानमंडल पक्ष की मीटिंग है, उसमें तय हो जाएगा। क्यों चिंता करते हो, चिंता मत करो।’
नहीं होगा नेता विपक्ष!
विपक्ष लगातार महायुति से सीएम पद के ऐलान को लेकर सवाल कर रहा है। महाराष्ट्र में सीएम पद का ऐलान जल्द ही होने वाला है, लेकिन इस बार विपक्ष को नेता विपक्ष के भी लाले पड़ गए हैं। विधायी नियमों के मुताबिक नेता विपक्ष के पद पर दावेदारी पेश करने के लिए विपक्षी दल के पास कुल सीटों की कम से कम 10 प्रतिशत होनी चाहिए। महाराष्ट्र विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं यानी कम से कम 29 विधायकों वाला कोई भी दल नेता विपक्ष के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकता है।
विपक्ष के साथ इस बार मजबूरी ये है कि महाराष्ट्र में किसी भी विपक्षी दल के पास 29 सीट नहीं हैं। विपक्ष में सबसे अधिक 20 सीटें उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) को मिली हैं। इसके अलावा कांग्रेस के पास 16 और शरद पवार की पार्टी के पास 10 सीटें हैं।
क्या खाली रहेगा नेता प्रतिपक्ष का पद?
नियमों के मुताबिक विपक्षी नेता का पद गठबंधन के आधार पर नहीं मिल सकता है। आजाद भारत में संसद या किसी भी विधानसभा में गठबंधन से नेता प्रतिपक्ष के पद का कोई उदहारण नहीं मिलता है। नेता प्रतिपक्ष का पद पाने के लिए गठबंधन से किसी ने दावा भी नहीं किया है। 2014 और 2019 में NDA की सरकार बनी तो लोकसभा में किसी भी पार्टी के पास नेता प्रतिपक्ष का पद पाने लायक सांसद नहीं थे, लिहाजा लोकसभा में 2014 से 2024 तक नेता प्रतिपक्ष का पद खाली रहा।
महाराष्ट्र से पहले गुजरात और मेघालय विधानसभा में भी ऐसा हुआ है। दोनों राज्यों में विपक्ष के नेता का पद खाली रहा है। इसीलिए इस बार महाराष्ट्र विधानसभा को विपक्ष का नेता नहीं मिल पाएगा। इसका मतलब ये हुआ कि विधानसभा में विपक्षी बेंचों की आगे की पंक्ति में डिप्टी स्पीकर के साथ वाली सीट खाली रहेगी।







