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चांद के दक्षिणी ध्रुव पर कब्जे के लिए क्यों मची है जंग!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 24, 2023
in विशेष
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Mission
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वाशिंगटन: भारत का चंद्रयान-3 थोड़ी ही देर में चांद पर उतरने वाला है। इसे पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है, क्योंकि आज तक कोई भी देश चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग नहीं कर पाया है। अगर चंद्रयान-3 की लैंडिंग सफल रहती है तो इससे दुनिया को चांद के बारे में कई अज्ञात रहस्यों की जानकारी मिल सकती है। चांद के इस इलाके में बर्फ के रूप में पानी की खोज पहले ही की जा चुकी है। इसे चंद्रमा का सबसे मूल्यवान संसाधन बताया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल कई तरीकों से किया जा सकता है। इस बीच दुनियाभर के देश चांद के दक्षिणी ध्रुव पर अपने-अपने अंतरिक्ष यान भेजने में जुटे हुए हैं। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अमेरिका, रूस, भारत, इजरायल और जापान ने अभी तक अपने-अपने अंतरिक्ष यान भेजे हैं, लेकिन कोई सफल लैंड नहीं कर सका है।

चांद की मिट्टी में मिला है हाइड्रोजन

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1960 के दशक की शुरुआत में पहली अपोलो लैंडिंग से पहले वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया था कि चंद्रमा पर पानी मौजूद हो सकता है। 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरुआत में अपोलो क्रू से विश्लेषण के लिए लौटाए गए नमूने सूखे प्रतीत हुए। 2008 में ब्राउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नई तकनीक के साथ उन चांद से आए उन नमूनों का दोबारा निरीक्षण किया और ज्वालामुखीय कांच के छोटे मोतियों के अंदर हाइड्रोजन पाया।

चंद्रयान-1 ने चांद पर खोजा था पानी

2009 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के चंद्रयान-1 और नासा के एक उपकरण ने चंद्रमा की सतह पर पानी का पता लगाया। उसी वर्ष, नासा के एक दूसरे स्पेसक्राफ्ट ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सतह के नीचे बर्फ का पता लगाया। नासा के पहले के मिशन 1998 के लूनर प्रॉस्पेक्टर में इस बात के प्रमाण मिले थे कि पानी में बर्फ की सबसे अधिक सांद्रता दक्षिणी ध्रुव के छायादार गड्ढों में थी।

चांद के पानी को क्यों पाना चाहती है दुनिया

वैज्ञानिक प्राचीन जल से जमी बर्फ की जांच करना चाहते हैं, क्योंकि वे चांद के ज्वालामुखियों, धूमकेतुओं और क्षुद्रग्रहों से धरती पर पहुंची सामग्री और महासागरों की उत्पत्ति का खुलासा कर सकते हैं। अगर पानी की बर्फ पर्याप्त मात्रा में मौजूद है तो यह चंद्रमा की खोज के लिए पीने के पानी का एक स्रोत हो सकता है और उपकरणों को ठंडा रखने में मदद कर सकता है। इसे ईंधन के लिए हाइड्रोजन और सांस लेने के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन करने के लिए भी तोड़ा जा सकता है। इतना ही नहीं, चांद पर मौजूद इस बर्फ से मंगल ग्रह पर मानव अभियानों और चंद्रमा पर खनन वाले मिशनों में मदद मिल सकती है।

चांद पर खनन को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं

1967 की संयुक्त राष्ट्र बाह्य अंतरिक्ष संधि किसी भी देश को चंद्रमा पर स्वामित्व का दावा करने से रोकती है। लेकिन ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो वाणिज्यिक परिचालन को रोक देगा। चंद्रमा की खोज और उसके संसाधनों के उपयोग के लिए सिद्धांतों को तय करने के लिए अमेरिका ने आर्टेमिस समझौता तैयार किया था, जिसमें 27 देशों ने हस्ताक्षर किए हैं, हालांकि रूस और चीन इस समझौते से बाहर हैं।

चांद पर कब्जे को लेकर क्या बोला रूस

रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकोस्मोस के प्रमुख यूरी बोरिसोव ने कहा है कि चंद्रमा के संसाधनों का पता लगाने और उसे पाने के लिए दौड़ शुरू हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि चांद पर खोजबीन के लिए प्रतिबद्ध रहना रूस के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित में है। यह सिर्फ देश की प्रतिष्ठा और कुछ भू-राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के बारे में नहीं है। यह रक्षात्मक क्षमताओं को सुनिश्चित करने और तकनीकी संप्रभुता हासिल करने के बारे में है।

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