देहरादून। पौड़ी संसदीय सीट पर कांग्रेस ने वर्ष 2019 के चुनाव में बीसी खंडूड़ी के पुत्र मनीष खंडूड़ी को उतारा था, लेकिन वह तीरथ सिंह रावत से हार गए। अब वर्ष 2024 के चुनाव में कांग्रेस उनको उम्मीदवार बनाएगी या प्रत्याशी बदलते हुए नया चेहरा सामने लाएगी, इस पर संशय बरकरार है।पार्टी सूत्रों का कहना है कि मनीष खंडूड़ी के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल दूसरा चेहरा हो सकते हैं, जिस पर पार्टी आगामी चुनाव में दांव लगा सकती है।
गोदियाल की सक्रियता से इस बात के संकेत भी मिले हैं। विस चुनाव के ऐन बाद खराब नतीजों के चलते उन्हें अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। वह अपना खुद का चुनाव भी हार गए थे, लेकिन सहानुभूति का फैक्टर उनके साथ जुड़ा है। वहीं बदरीनाथ विधायक राजेंद्र भंडारी, पूर्व मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी और पूर्व विधायक मनोज रावत भी इस दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि पार्टी में टिकट वितरण की एक प्रक्रिया है, उसी के आधार पर प्रत्याशी का चयन किया जाता है। इसमें अभी समय है, इसलिए कुछ नहीं कहा जा सकता है।
37 वर्षों तक कांग्रेस के पास रही पौड़ी गढ़वाल लोस सीट
पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट 37 वर्ष तक कांग्रेस के पास रही तो 23 वर्ष भाजपा के पास। 1951 के पहले लोकसभा चुनाव में इस सीट का नाम गढ़वाल डिस्ट्रिक्ट (ईस्ट) कम मोरादाबाद डिस्ट्रिक्ट (नार्थ ईस्ट) था। वर्ष 1957 के चुनाव में इसे गढ़वाल लोकसभा सीट का नाम दिया गया। 1951 से 1977 तक इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा और 1971 तक लगातार चार बार कांग्रेस नेता भक्तदर्शन यहां से सांसद रहे। 1971 में कांग्रेस के प्रताप सिंह नेगी इस सीट से सांसद बने। 1977 में पहली बार यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकली और जनता पार्टी के जगन्नाथ शर्मा जीते। 1980 में जनता पार्टी-सेक्यूलर में हेमवती नंदन बहुगुणा ने जीत हासिल की। 1984 में कांग्रेस के चंद्रमोहन सिंह नेगी इस सीट से चुनाव जीते। 1989 में जनता दल से चंद्रमोहन सिंह फिर से जीते।
पांच चुनावों में बीसी खंडूड़ी का दबदबा
1991 में भाजपा ने यह सीट छीनी और उसके मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी विजयी रहे। इसके बाद 11वीं, 12वीं, 13वीं व 14वीं लोकसभा के चुनाव में यहां खंडूड़ी ने लगातार जीत दर्ज की। 2007 में हुए उपचुनाव में भी यह भाजपा की झोली में रही और उसके टिकट पर ले. जनरल टीपीएस रावत ने जीत दर्ज की। 2009 में कांग्रेस ने वापसी की और ौसतपाल महाराज ने जीत हासिल की। 2014 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस से फिसली और भुवन चंद्र खंडूड़ी ने जीत हासिल की। इसके बाद 2019 भाजपा के तीरथ सिंह रावत विजयी हुए।
14 विस सीटों में 13 पर भाजपा का कब्जा
पौड़ी लोकसभा सीट पर 14 विधानसभा सीटें आती हैं। वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में इन 14 में से 13 सीटें भाजपा के खाते में गई हैं, मात्र एक सीट (बदरीनाथ) पर कांग्रेस का कब्जा है। इस लोस क्षेत्र में दो प्रमुख धाम बदरीनाथ व केदारनाथ स्थित है। प्रसिद्ध हेमकुंड साहिब समेत कई प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल भी इस क्षेत्र में हैं। यह सीट सैनिक बहुल है और सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े परिवारों की तादाद काफी अधिक है। इस सीट के अंतर्गत करीब 86 प्रतिशत हिंदू, सात प्रतिशत मुस्लिम, चार प्रतिशत सिख और दो प्रतिशत ईसाई मतदाता हैं।






