प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली/उन्नाव : उन्नाव रेप केस एक बार फिर देश की राजनीति और न्याय व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को निलंबित करते हुए सशर्त राहत दिए जाने के बाद देशभर में विरोध, राजनीतिक बयानबाज़ी और नए खुलासों का दौर शुरू हो गया है। पीड़िता ने न्याय प्रक्रिया, सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
साल 2017 उन्नाव की एक नाबालिग लड़की ने तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर बलात्कार का आरोप लगाया। शिकायत के बाद पीड़िता और उसके परिवार को लगातार दबाव, धमकियों और प्रशासनिक उदासीनता का सामना करना पड़ा। 2019 विशेष अदालत ने सेंगर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। अन्य मामले पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत सहित कई अन्य मामलों में भी सेंगर दोषी ठहराया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला और विवाद
हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को अपील लंबित रहने तक सस्पेंड कर दिया और सशर्त राहत दी। हालांकि, अन्य मामलों में सज़ा के चलते वह फिलहाल जेल में ही है।
फैसले के बाद सवाल
इतनी गंभीर सज़ा में राहत क्यों ? क्या पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा पर्याप्त है ? क्या न्याय प्रक्रिया में संवेदनशीलता का अभाव दिखा ?
पीड़िता के गंभीर आरोप
पीड़िता का कहना है कि “फैसले के बाद परिवार की सुरक्षा खतरे में है। आरोप है कि सुरक्षा में कटौती की गई और डर का माहौल दोबारा बना है। पीड़िता के पति ने दावा किया कि रोज़गार छिन गया, जिससे आर्थिक संकट गहरा गया। पीड़िता ने कहा— “हमें आज भी न्याय के लिए लड़ना पड़ रहा है।”
सड़कों पर उतरा विरोध
दिल्ली सहित कई जगहों पर फैसले के खिलाफ प्रदर्शन हुए। प्रदर्शन के दौरान पीड़िता और समर्थकों के साथ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
राहुल गांधी से मुलाक़ात
इसी बीच पीड़िता ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मुलाक़ात की। मुलाक़ात में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई..सुरक्षा व्यवस्था। न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप के आरोप जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने पीड़िता को कानूनी और नैतिक समर्थन का भरोसा दिलाया और कहा कि न्याय के लिए आवाज़ उठाना ज़रूरी है।
उन्नाव रेप केस केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं
पीड़िता और CBI दोनों ही दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं। देश की निगाहें अब शीर्ष अदालत पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि राहत बरकरार रहेगी या नहीं।
उन्नाव रेप केस केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता, पीड़ितों की सुरक्षा, और सत्ता व कानून के रिश्ते पर बड़ा सवाल बन चुका है। यह मामला एक बार फिर पूछ रहा है— क्या पीड़ित को सच में समय पर न्याय मिल पा रहा है?







