देहरादून : सहकारिता विभाग के तहत की गई सेब खरीद में करोड़ों रुपये का हेरफेर हुआ है। नौगांव सेब सहकारी समिति में आठ करोड़ रुपये के सेब का हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है। राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना से जारी इस पैसे का ब्योरा नहीं मिलने पर शासन ने मामले में जांच बैठा दी है। सेब उत्पादन से जुड़े किसानों और एप्पल फेडरेशन से जुड़ी समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए समितियों को सेब खरीदने को पैसा दिया गया था।
इससे किसानों को उनके घर के पास ही बाजार उपलब्ध होता। इस क्रम में नौगांव की सेब सहकारी समिति को चार करोड़ रुपये दिए गए। सेब खरीद के लिए समिति के साथ हुए एमओयू के तहत एक अन्य संस्था ने भी चार करोड़ रुपये दिए। इस आठ करोड़ रुपये से खरीदे गए सेबों की बिक्री से समिति को लगभग 20 करोड़ रुपये की आय होनी थी, पर आलम ये है कि खुद सरकार का ही पैसा फंस गया।
खरीदा गया सेब बाजार में बेचकर संस्था को पैसा लौटाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब इसकी शिकायत शासन तक पहुंची, तो सचिव सहकारिता के दबाव के बाद सरकार के चार करोड़ रुपये में से ढाई करोड़ रुपये वापस आ गए पर डेढ़ करोड़ रुपये फिर भी अटके रहे। साथ ही समिति ने कुल कितना सेब खरीदा, कितना बेचा, इसके हिसाब का भी मिलान नहीं हो रहा है।
संयुक्त निबंधक को सौंपी गई जांच
इस संबंध में सचिव सहकारिता बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने जांच संयुक्त निबंधक नीरज बेलवाल को सौंप दी है। सचिव ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। इस मामले में वित्तीय नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लाभ तो दूर मूल धन तक नहीं लौटा
नौगांव समिति को सेब की खरीद से लाभ होना था। आठ करोड़ का सेब कम से कम 20 करोड़ में बिकना था। ऐसे में समिति और सरकार को बड़ा मुनाफा होना था। लेकिन इस मामले में मुनाफा तो दूर समिति और सरकार का मूल पैसा तक वापस नहीं लौटा।
अफसरों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस मामले में प्रोजेक्ट से जुड़े सहकारिता के अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। मामले में सवाल उठ रहे हैं कि सेब की बिक्री का पैसा समिति के खाते से देहरादून क्यों मंगाया गया? देहरादून में खोले गए खाते में समिति के पदाधिकारियों को शामिल क्यों नहीं किया गया? सेब की बिक्री का पैसा नहीं लौटने पर समय रहते जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए और कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
समिति ने की एसआईटी जांच की मांग
नौगांव सेब सहकारी समिति के अध्यक्ष जगमोहन चंद ने कहा कि जब संस्था ने हिसाब नहीं दिया, तो शिकायत की। इस मामले में मूलधन भी नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी में सेब बेचने और किसानों से खरीद के जो बिल दिए गए, वो भी संदिग्ध हैं। मंडी की पर्चियां भी हाथ से बनी हुई थमा दी गई हैं। समिति ने इन्हें डुप्लीकेट बताया है। आरोप है कि बाजार में सेब खासा महंगा बेचा गया, लेकिन इसकी बिक्री कम कीमत में दिखाई गई।






