दिल्ली डेस्क
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA LAD Fund) को 15 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये प्रति विधानसभा क्षेत्र प्रति वर्ष कर दिया है। यह फैसला 2 मई 2025 को कैबिनेट के निर्णय (संख्या 3187) के तहत लिया गया, जो वित्तीय वर्ष 2025-26 से लागू होगा। इस निधि का उपयोग विधायक अपने क्षेत्र में सड़क, पार्क, सीवर लाइन और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों के लिए करते हैं। यह फंड “अनटाइड” है, यानी इसे पूंजीगत कार्यों और रखरखाव दोनों के लिए बिना किसी सीमा के खर्च किया जा सकता है। आइए एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा के विशेष विश्लेषण में समझते हैं
पिछली AAP सरकार का फैसला
अक्टूबर 2024 में, आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले MLA LAD फंड को 10 करोड़ से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये किया था। AAP का दावा था कि यह राशि देश में सबसे अधिक है और इससे स्थानीय समस्याओं, जैसे बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों और सीवरों की मरम्मत को तेजी से हल करने में मदद मिलेगी।
BJP सरकार का कदम !
फरवरी 2025 में BJP ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP को हराकर सत्ता हासिल की। नई BJP सरकार, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता कर रही हैं, ने इस फंड को 15 करोड़ से घटाकर 5 करोड़ रुपये करने का निर्णय लिया। BJP का तर्क है कि यह राशि अभी भी कई राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, केरल और राजस्थान, जहां 5 करोड़ रुपये आवंटित हैं) के बराबर है।
AAP सरकार के समय वित्त, योजना और शहरी विकास विभागों ने फंड बढ़ाने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि दिल्ली की वित्तीय स्थिति कठिन थी और पहले के फंड का उपयोग भी कम था। उदाहरण के लिए, 2023-24 में प्रति विधानसभा क्षेत्र औसतन केवल 2.27 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। दिल्ली में 70 विधायकों के लिए कुल 350 करोड़ रुपये MLA LAD फंड के तहत आवंटित किए गए हैं, जो प्रत्येक विधायक को 5 करोड़ रुपये देता है।
विवाद और प्रतिक्रियाएं
AAP ने इस कटौती को दिल्ली की जनता के साथ “विश्वासघात” करार दिया है। AAP नेताओं, जैसे मटिया महल विधायक आले मोहम्मद इकबाल, का कहना है कि मुद्रास्फीति के दौर में 5 करोड़ रुपये बुनियादी मरम्मत के लिए भी अपर्याप्त हैं, जिससे सभी 70 निर्वाचन क्षेत्र प्रभावित होंगे। वहीं BJP विधायकों का दावा है कि AAP सरकार ने फंड का दुरुपयोग किया और वादा की गई राशि (40 करोड़ रुपये 5 साल में) का केवल 30 करोड़ रुपये ही दिया। BJP का कहना है कि उनकी सरकार 5 साल में इससे अधिक राशि देगी।
हालांकि गुजरात में 1.5 करोड़, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में 2 करोड़, और महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान में 5 करोड़ रुपये प्रति विधायक आवंटित हैं। दिल्ली का 15 करोड़ रुपये का फंड वाकई देश में सबसे अधिक था।
क्या रहा पिछला इतिहास?
2018 में AAP सरकार ने फंड को 4 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ किया था। 2020-21 में कोविड के कारण कोई फंड जारी नहीं हुआ। 2021-22 और 2022-23 में 4 करोड़, 2023-24 में 7 करोड़, और 2024-25 में 15 करोड़ रुपये आवंटित हुए।
BJP सरकार का यह फैसला वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन और पिछले फंड के कम उपयोग को ध्यान में रखकर लिया गया लगता है। हालांकि, AAP इसे राजनीतिक कदम मानती है, जो जनता के हितों को नुकसान पहुंचाएगा। यह कटौती दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय विकास कार्यों की गति को प्रभावित कर सकती है, खासकर जब मुद्रास्फीति के कारण लागत बढ़ रही है।







