प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने यमुना नदी को प्रदूषण से मुक्त करने और इसकी पारिस्थितिकी को पुनर्जनन करने के लिए मिशन मोड में काम शुरू किया है। इस अभियान का एक प्रमुख हिस्सा है नदी में गिरने वाले 22 बड़े नालों का ड्रोन सर्वे, जो प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह कदम दिल्ली में यमुना की सफाई को लेकर अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास माना जा रहा है।
पूरा मामला क्या है ?
यमुना नदी, जो दिल्ली की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है, लंबे समय से प्रदूषण की चपेट में है। दिल्ली में इसका 22 किलोमीटर का हिस्सा (वजीराबाद से ओखला तक) नदी की कुल लंबाई का केवल 2% है, लेकिन यह 80% से अधिक प्रदूषण के लिए जिम्मेदार है। इस प्रदूषण का मुख्य कारण अनट्रीटेड सीवेज, औद्योगिक कचरा और नालों से निकलने वाला गंदा पानी है। दिल्ली सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए एक चार सूत्री रणनीति (four-pronged strategy) अपनाई है, जिसमें ड्रोन सर्वे एक महत्वपूर्ण कदम है।
22 बड़े नालों का ड्रोन सर्वे
दिल्ली में यमुना नदी में 22 बड़े और 360 छोटे नाले गिरते हैं, जो नदी के प्रदूषण का प्रमुख स्रोत हैं।नजफगढ़ और शाहदरा ड्रेन का ड्रोन सर्वे राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) द्वारा अगस्त 2025 तक पूरा किया जाएगा। बाकी 20 बड़े नालों का सर्वे दिल्ली जल बोर्ड (DJB) करेगा। ड्रोन सर्वे का उद्देश्य नालों में अनट्रीटेड सीवेज और औद्योगिक कचरे के डिस्चार्ज पॉइंट्स की सटीक मैपिंग करना है। यह सर्वे नालों में मिलने वाले उप-नालों की संख्या और स्थिति का भी सत्यापन करेगा। यमुना में प्रदूषण की निगरानी के लिए 67 स्पॉट्स चिन्हित किए गए हैं, जहां से पानी के सैंपल लेकर प्रदूषण स्तर की जांच की जाएगी। यह काम जुलाई 2025 तक पूरा होने की उम्मीद है।
क्या है चार सूत्री रणनीति ?
ट्रैश स्किमर्स, वीड हार्वेस्टर, और ड्रेजर मशीनों का उपयोग कर यमुना से ठोस कचरा और गाद हटाई जा रही है। नजफगढ़, शाहदरा, और अन्य प्रमुख नालों की सफाई शुरू हो चुकी है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) की निगरानी मौजूदा STPs की क्षमता और आउटपुट की रोजाना निगरानी की जा रही है। दिल्ली में 792 MGD सीवेज उत्पन्न होता है, जिसमें से केवल 565 MGD का ही उपचार हो पाता है।
नए STPs और डीसेंट्रलाइज्ड STPs का निर्माण 400 MGD अनट्रीटेड सीवेज को ट्रीट करने के लिए नए और डीसेंट्रलाइज्ड STPs बनाए जा रहे हैं।
1500 करोड़ का प्लान
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 25 मार्च 2025 को 1500 करोड़ रुपये के यमुना सफाई और सीवेज प्रबंधन प्लान की घोषणा की। इसमें 40 डीसेंट्रलाइज्ड STPs का निर्माण (500 करोड़ रुपये), नजफगढ़ ड्रेन के लिए 200 करोड़ रुपये, और ट्रैश स्किमर्स जैसी आधुनिक मशीनों के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है। केंद्र सरकार से 2000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता मांगी गई है ताकि दिल्ली का जल और सीवेज ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों तक लाया जा सके।
TERI का 10-सूत्री प्लान
द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) ने यमुना को तीन साल में पुनर्जनन करने के लिए 10-सूत्री योजना प्रस्तुत की है। इसमें 1994 के जल-बंटवारे समझौते की समीक्षा, नालों को टैप करना, माइक्रो STPs का उपयोग, और धोबी घाटों से सीधे डिस्चार्ज पर रोक जैसे कदम शामिल हैं। योजना में नदी में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह (environmental flow) सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
क्या है यमुना सफाई बोर्ड ?
दिल्ली सरकार जल्द ही एक समर्पित यमुना सफाई बोर्ड गठित करने की योजना बना रही है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह बोर्ड प्रदूषण नियंत्रण और सफाई कार्यों की निगरानी करेगा।
बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) यमुना का BOD स्तर 70 mg/L है, जबकि यह 3 mg/L से कम होना चाहिए। फीकल कॉलिफॉर्म नदी में फीकल कॉलिफॉर्म 84,00,000 MPN/100 ml है, जबकि यह 2,500 MPN/100 ml से कम होना चाहिए। नदी में फोम का निर्माण फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट्स (डिटर्जेंट से) के कारण होता है, जो दिल्ली, हरियाणा, और उत्तर प्रदेश के धोबी घाटों, डाइंग उद्योगों, और घरों से आता है। दिल्ली के 28 औद्योगिक समूहों में से केवल 17 ही कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स (CETPs) से जुड़े हैं, और इनकी क्षमता उपयोगिता केवल 32% है।
क्या है राजनीतिक भूमिका
BJP का चुनावी वादा यमुना की सफाई बीजेपी का प्रमुख चुनावी मुद्दा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान यमुना को प्रदूषण-मुक्त करने का वादा किया था।बीजेपी ने AAP सरकार पर यमुना सफाई में नाकामी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। AAP ने बदले में हरियाणा की बीजेपी सरकार पर नदी में “जहर” मिलाने का आरोप लगाया था।
NGT और सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2023 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई थी, लेकिन AAP सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद सफाई कार्य रुक गया था।
यमुना में ताजा पानी की कमी
दिल्ली में प्रतिदिन 792 Million Gallons per Day (MGD) सीवेज उत्पन्न होता है, जिसमें से 400 MGD अनट्रीटेड यमुना में जाता है। 1,799 अनधिकृत कॉलोनियों और 639 झुग्गी-झोपड़ी समूहों से अनट्रीटेड सीवेज नालों में जाता है। कई अनधिकृत उद्योगों का कचरा नालों में डाला जाता है, जिसे नियंत्रित करने के लिए सख्त निगरानी की जरूरत है। वजीराबाद बैराज से आगे यमुना में ताजा पानी की कमी है, जिसके कारण प्रदूषण का प्रभाव बढ़ जाता है।
क्या है आगे की राह !
दिल्ली सरकार का लक्ष्य 2027 तक यमुना को साफ करना है, जिसके लिए यमुना मास्टर प्लान तैयार किया गया है। यह प्लान गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट से प्रेरित है। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) यमुना के किनारों को पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।सरकार ने दिल्लीवासियों से यमुना को प्रदूषित न करने की अपील की है और सामुदायिक सफाई अभियान शुरू किए हैं।
दिल्ली सरकार का यमुना सफाई अभियान एक महत्वाकांक्षी और बहुआयामी प्रयास है, जिसमें ड्रोन सर्वे, नए STPs, और औद्योगिक कचरे पर निगरानी जैसे कदम शामिल हैं। 1500 करोड़ रुपये के प्लान और केंद्र के सहयोग से सरकार 2027 तक यमुना को साफ करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, अतीत में कई समय-सीमाएं (2023, 2025) चूकने और राजनीतिक विवादों के कारण इस अभियान की सफलता के लिए समन्वय और जन सहभागिता महत्वपूर्ण होगी।







