प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वी.के. सक्सेना ने आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्व सरकार के दौरान संचालित ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) को आदेश दिए हैं। यह जानकारी 16 जुलाई को दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री आशीष सूद और एससी/एसटी कल्याण मंत्री रविंदर इंद्राज द्वारा एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। दिल्ली की वर्तमान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी इस मामले में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
जय भीम योजना क्या है ?
‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ 2018 में आप सरकार द्वारा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों को यूपीएससी, एसएससी, नीट, जेईई और क्लैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग प्रदान करना था। इस योजना के तहत दिल्ली सरकार निजी कोचिंग संस्थानों को फीस का भुगतान करती थी और कुछ मामलों में छात्रों को 2500 रुपये प्रति माह अतिरिक्त खर्च के लिए दिए जाते थे।
शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने क्या बताया ?
योजना का आधिकारिक बजट 15 करोड़ रुपये था, लेकिन 2020-21 और 2021-22 (कोविड काल) के दौरान 145 करोड़ रुपये से अधिक के बिल मंजूर किए गए। शिक्षा मंत्री आशीष सूद के अनुसार, 13,000 छात्रों के दावों में से केवल 3,000 छात्रों का रिकॉर्ड ही सत्यापित हुआ, जिससे 10,000 फर्जी छात्रों के नाम पर भुगतान का संदेह पैदा हुआ।
सूद ने दावा किया कि “अगर सभी 13,000 छात्रों को आईएएस कोचिंग (प्रति छात्र 1 लाख रुपये) दी गई होती, तब भी कुल खर्च 130 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए था। फिर भी 145 करोड़ रुपये का बिल कैसे तैयार हुआ, यह जांच का विषय है।
कोविड काल में दुरुपयोग
आरोप है कि कोविड-19 महामारी के दौरान, जब आर्थिक स्थिति तंग थी, इस योजना के नाम पर सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया गया। निजी कोचिंग संस्थानों को बिना पर्याप्त दस्तावेजों और सत्यापन के भारी-भरकम भुगतान किए गए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि “कई संस्थानों के 100% दावे फर्जी पाए गए, जिनमें बिना हस्ताक्षर के आवेदन और बिना दस्तावेजों के भुगतान शामिल हैं।
मंत्री आशीष सूद ने आरोप लगाया कि “आप नेताओं ने कोचिंग माफिया के साथ मिलकर कमीशन खोरी की और इस योजना को भ्रष्टाचार का जरिया बनाया।
आंबेडकर के नाम का दुरुपयोग
सूद और इंद्राज ने आप पर आरोप लगाया कि “उन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर के नाम का उपयोग कर दलित छात्रों के हक पर डाका डाला, जिससे उनकी आत्मा को भी ठेस पहुंची। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सिफारिश पर उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने एसीबी को इस मामले की गहन जांच के आदेश दिए।
जांच में फर्जी बिलों, छात्रों के रिकॉर्ड और कोचिंग संस्थानों को किए गए भुगतानों की जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि क्या आप सरकार के नेताओं ने निजी लाभ कमाया।
आम आदमी पार्टी का जवाब
आप ने इन आरोपों को प्रतिशोध की राजनीति करार दिया। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा आप की जनकल्याणकारी योजनाओं को बदनाम करने के लिए भ्रष्टाचार का बहाना बना रही है। आप का दावा है कि “भाजपा ने दिल्ली में शिक्षा, स्वास्थ्य, और बिजली जैसी योजनाओं को बंद करने की कोशिश की है, लेकिन भ्रष्टाचार का कोई आरोप अभी तक साबित नहीं हुआ।
आप ने यह भी कहा कि “दिल्ली के स्कूलों और मोहल्ला क्लीनिकों की हर चीज की जांच की जा सकती है, लेकिन भाजपा को पहले अपना काम शुरू करना चाहिए। यह जांच दिल्ली में सियासी तनाव को और बढ़ा सकती है, क्योंकि आप और भाजपा के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर टकराव चल रहा है। आप ने 2024 में इस योजना को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन अब यह जांच के दायरे में है।
क्या वास्तव में भ्रष्टाचार हुआ या प्रतिशोध !
‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ में कथित 145 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच अब एसीबी करेगी। यह मामला आप सरकार के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है, खासकर दिल्ली में विधानसभा चुनावों के संदर्भ में। जांच के परिणाम से यह साफ होगा कि क्या वास्तव में भ्रष्टाचार हुआ या यह राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।







