नई दिल्ली: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद एक हफ्ते का वक्त गुजर चुका है लेकिन अभी तक महायुति गठबंधन यह तय नहीं कर पाया है कि महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री कौन होगा। महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में महायुति को जबरदस्त जनादेश मिला है और अब सवाल यह पूछा जा रहा है कि इतने बड़े जनादेश के बाद भी आखिरकार मुख्यमंत्री का चयन करने में इतना वक्त क्यों लग रहा है।
मुख्यमंत्री के पद के लिए पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम की जोरदार चर्चाओं के बीच सोशल मीडिया पर यह भी कहा जा रहा है कि बीजेपी किसी दूसरे चेहरे को मुख्यमंत्री बन सकती है।
महायुति को मिली बड़ी जीत
महाराष्ट्र में विधानसभा की 288 सीटें हैं। महायुति गठबंधन को 230 सीटों पर जीत मिली है। बीजेपी ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए अकेले दम पर ही 132 सीटें जीत ली हैं जबकि उसके सहयोगी दलों – एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 57 और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने 41 सीटें जीतीं। जबकि महा विकास अघाड़ी (MVA) को भारी झटका लगा है। शिवसेना (यूबीटी) को 20, कांग्रेस को 16 और एनसीपी (शरद पवार गुट) को केवल 10 सीटें मिलीं।
जबरदस्त प्रदर्शन के बाद भाजपा ने मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा मजबूती से ठोका है लेकिन अब मुख्यमंत्री के लिए जिस नए नाम की चर्चा महाराष्ट्र की राजनीति में हो रही है, वह नाम मुरलीधर मोहोल का है। मुरलीधर मोहोल केंद्रीय नागरिक उड्डयन और सहकारिता राज्य मंत्री के पद पर हैं। हालांकि मुरलीधर ने इस तरह की तमाम अटकलों को निराधार और मनगढ़ंत बताया है।
मोहोल ने कहा- अटकलें पूरी तरह गलत
मोहोल ने कहा है कि भाजपा ने विधानसभा का चुनाव देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लड़ा था और महाराष्ट्र की जनता ने भी बीजेपी को एक ऐतिहासिक जनादेश दिया है। मुरलीधर ने उनके नाम को लेकर की जा रही तमाम चर्चाओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बीजेपी में निर्णय संसदीय बोर्ड द्वारा सर्वसम्मति से लिए जाते हैं ना कि सोशल मीडिया पर अटकलों के जरिए और एक बार संसदीय बोर्ड जो निर्णय ले लेता है, वह फैसला हमारे लिए सर्वोच्च होता है। इसलिए सोशल मीडिया पर उनके नाम को लेकर लगाई जा रही अटकलें पूरी तरह गलत हैं।
बताना होगा कि पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कह चुके हैं कि उन्हें भाजपा की ओर से तय किया गया नेता मुख्यमंत्री पद के लिए मंजूर होगा। लेकिन दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ हुई बैठक के बाद शिंदे सतारा स्थित अपने गांव चले गए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि शिंदे नाराज हैं और उन्हें मनाने की कोशिश चल रही है। एकनाथ शिंदे के कार्यकर्ता और समर्थक उन्हें ही मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं।







