नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में कई दिनों की छुट्टी के बाद आज सुनवाई शुरू हुई है। पत्नी के यौन उत्पीड़न के मामले में सोमवार को जस्टिस बीवी नागरत्ना ने बेहद ही अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि घर में कभी भी पैसे उधार ना दें। बता दें कि एक पत्नी ने अपने पति के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत यौन उत्पीड़न की अर्जी दाखिल की थी। आज जब मामले में सुनवाई शुरू हुई तो महिला के वकील से जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कई सवाल पूछे।
इसके जवाब में वकील ने कहा कि महिला जिस कंपनी की इंप्लॉयी है, वहीं पर उसके पति इप्लॉयर हैं। वहीं, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि मामले में लीगल एडवाइस लें और मामला वापस हो गया।
अनुच्छेद 32 के तहत केस दर्ज
बता दें कि एक महिला ने अपने पति के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया। सोमवार को इस मामले की सुनवाई बीवी नागरत्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने शुरू की। महिला की तरफ से पेश हुई वकील ने बेंच को बताया कि जहां पर महिला नौकरी करती है, उसके पति वहीं पर इप्लॉयर है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने सवाल किया क्या पॉश कमेटी में आवेदन दिया था। इस पर वकील ने बताया कि हमने केस उठाया तो था, लेकिन इसे लोकल कमेटी में ट्रांसफर कर दिया गया है। वहां पर इसे मेट्रिमोनियल का मामला बताकर खारिज कर दिया गया।
घर में कभी पैसे उधार नहीं देने चाहिए- जस्टिस बीवी नागरत्ना
इस जवाब पर जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि आपको मामले को लेकर हाई कोर्ट का रूख करना चाहिए। इस पर भी वकील ने कहा कि पति और पत्नी अलग-अलग रहते हैं। लेकिन इसमें एक बात यह है कि वह एक साथ ही ऑफिस में काम करते हैं। वकील के इस जवाब पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कभी भी घर में पैसे उधार नहीं देने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हम अनुच्छेद 32 के तहत मामले की सुनवाई नहीं कर सकते हैं। आप इस मामले में आगे के लिए कानूनी सलाह ले लीजिए। इसके बाद में केस वापस हो गया।







