नई दिल्ली। भारतीय घरों में जब भी कोई चोट लगती है या कट लग जाता है, तो सबसे पहले हल्दी लगाने की सलाह दी जाती है. यह नुस्खा सालों से चला आ रहा है और लगभग हर घर में इस्तेमाल होता है. लेकिन क्या यह सोच सही है कि हल्दी हर तरह के जख्म के लिए फायदेमंद है? आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी की हल्दी वाकई जख्म भरने में कितनी मदद करती है और इसका इस्तेमाल कब और कैसे करना चाहिए.
हल्दी में ऐसा क्या है जो जख्म भरने में मदद करता है
हल्दी में मौजूद कर्क्यूमिन नाम का तत्व इसे खास बनाता है. कई वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि कर्क्यूमिन में सूजन कम करने वाले, बैक्टीरिया से लड़ने वाले और घाव भरने की प्रक्रिया को तेज करने वाले गुण होते हैं. जानवरों पर हुए शोध में देखा गया है कि हल्दी लगाने से घाव जल्दी भरता है और उसमें नए टिशू बनने की प्रक्रिया तेज होती है. वहीं इंसानों पर हुए कुछ छोटे अध्ययनों में भी हल्दी का इस्तेमाल करने पर घाव में सूजन, दर्द और बदबू कम होते देखी गई है. यही वजह है कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में हल्दी को सदियों से घाव भरने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.
लेकिन यह सोचना गलत है कि हल्दी हर तरह के जख्म के लिए काम करती है. छोटी खरोंच या हल्के कट के लिए हल्दी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन गहरे घाव, जलने के गंभीर जख्म या ऐसे घाव जिनमें बहुत खून बह रहा हो, उनके लिए सिर्फ हल्दी पर भरोसा करना ठीक नहीं है. ऐसे मामलों में सही सफाई और डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है. इसके अलावा, कच्ची हल्दी सीधे खुले घाव पर लगाने से कुछ लोगों को जलन, खुजली या एलर्जी जैसी दिक्कत भी हो सकती है, क्योंकि हल्दी पूरी तरह से स्टेराइल नहीं होती है.
हल्दी का सही इस्तेमाल कैसे करें
अगर आप हल्दी का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहले घाव को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि उसमें मिट्टी या गंदगी न रहे. इसके बाद हल्दी को सीधे कच्चे रूप में लगाने की बजाय, इसे किसी साफ और सुरक्षित तरीके से जैसे हल्दी वाले मरहम या शहद के साथ मिलाकर हल्के कट या खरोंच पर लगाएं. फिर साफ पट्टी से ढक दें, ताकि उसमें और गंदगी न जाए. वहीं अगर घाव गहरा है, बहुत दर्द हो रहा है, सूजन बढ़ रही है या कुछ दिनों में ठीक नहीं हो रहा, तो तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए.







