नई दिल्ली। भारत में ईरान का दूतावास पिछले कई दिनों से युद्ध राहत के लिए चंदा इकट्ठा कर रहा है। लेकिन अब इसमें एक पेंच फंसता नजर आ रहा है। दरअसल ईरानी दूतावास ने जो पैसा इकट्ठा किया है उसे वह सीधे ईरान ट्रांसफर नहीं कर सकता है। अब इस चंदे के पैसे का इस्तेमाल ईरान स्थानीय स्तर पर यानी भारत में ही दवाएं खरीदने के लिए करेगा। इसका मुख्य कारण यह है कि नियमित राजनयिक प्रक्रियाओं के माध्यम से इस पैसे को तेहरान ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।
चंदा इकट्ठा करने की प्रक्रिया में हुए बदलाव
शुरुआत में ईरानी दूतावास ने 14 मार्च को अपने मुख्य बैंक खाते के जरिए चंदा मांगा था। बाद में नियमों के अनुसार, इस उद्देश्य के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में एक अलग खाता खोला गया। विदेशी मिशनों को नकद या अनौपचारिक माध्यमों से चंदा लेने की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद, 15 मार्च को ईरानी दूतावास ने सीधे नकद योगदान का विकल्प भी दिया था, लेकिन बाद में प्रक्रिया को औपचारिक बना दिया गया। अंततः ईरान ने स्पष्ट किया कि सभी दान केवल निर्धारित बैंक खाते के माध्यम से ही भेजे जाने चाहिए।
दवाओं की खरीद और अमेरिकी हमले का प्रभाव
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इस पैसे का इस्तेमाल भारत में दवाएं खरीदने के लिए करने का इरादा जताया है, जिसके लिए उसे अनुमति भी मिल गई है। भारत अपनी तरफ से पहले ही ईरान को दवाओं की एक खेप भेज चुका है। इस बीच, इन दवाओं को ले जाने के लिए ईरान की महान एयर का एक विमान मशहद से नई दिल्ली आने वाला था। लेकिन, पिछले हफ्ते उड़ान भरने से पहले ही एक एयरबेस पर हुए अमेरिकी हवाई हमलों में यह विमान क्षतिग्रस्त हो गया। अब ईरान आने वाले दिनों में नई दिल्ली से खरीदी गई दवाओं को एयरलिफ्ट करने के लिए एक और उड़ान भेजने की योजना बना रहा है।
चंदे और आभूषणों को लेकर क्या हैं नियम?
द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि कश्मीर सहित भारत के विभिन्न हिस्सों से जो सोना और आभूषण चंदे के रूप में मिले हैं, उन्हें भी स्थानीय बैंकों में जमा करके नकदी में बदलना होगा। सोने और आभूषण जैसी वस्तुओं को ‘डिप्लोमैटिक पाउच’ जैसे राजनयिक माध्यमों का इस्तेमाल करके भी ईरान नहीं भेजा जा सकता है।
सहायता अभियान पर सोशल मीडिया विवाद
पिछले कुछ दिनों में भारत में अपने इस सहायता अभियान को लेकर ईरान को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है। ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किए थे जिन्हें अब हटा लिया गया है। इससे कश्मीर पर ईरान के रुख को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। दरअसल पाकिस्तान स्थित कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा विरोध किए जाने के बाद, ईरानी दूतावास ने अपने वे पोस्ट हटा लिए जिसमें उसने भारतीय कश्मीरियों को धन्यवाद दिया था और एक कश्मीरी महिला को दान में अपना सोना देते हुए दिखाया था।
राजनयिक और बैंकिंग प्रोटोकॉल
राजनयिक प्रोटोकॉल की रूपरेखा तय करने वाले ‘वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस’ में विदेशी मिशनों द्वारा धन जुटाने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन यह उन्हें बैंकिंग अधिकार प्रदान करता है। यह किसी भी देश के लिए एक अस्पष्ट क्षेत्र है। हालांकि, राजनयिक मिशनों को बैंकिंग अधिकार सख्त तौर पर केवल आधिकारिक कार्यों के लिए ही दिए जाते हैं।
नियमों के अनुसार, दूतावास अपने मुख्य/प्राथमिक बैंक खातों का इस्तेमाल चंदा प्राप्त करने सहित किसी अन्य गतिविधि के लिए नहीं कर सकते हैं। इसके लिए विदेश मंत्रालय (MEA) की अनुमति से एक अलग बैंक खाता खोला जाना चाहिए। जुटाए गए धन को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कड़ी जांच के बाद ही स्वदेश भेजा जा सकता है। कुछ मामलों में तो पैसा भारत में ही फंसा रह जाता है। उदाहरण के लिए, 2023 में सीरिया में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत में सीरियाई दूतावास को जो चंदा मिला था, वह अब भी स्थानीय बैंक खातों में ही जमा है।







