नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि आज की बदलती वैश्विक परिस्थितियों में उभरती और मध्यम शक्तियों के बीच सहयोग के लिए एक बड़ा एजेंडा मौजूद है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश, सप्लाई चेन, स्वास्थ्य, प्रतिभा और कौशल की आवाजाही, कनेक्टिविटी, जलवायु कार्रवाई और रक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करने की जरूरत बताई।
जयशंकर ने रविवार को म्यूनिख में आयोजित Munich Leaders Meeting 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उभरती और मध्यम शक्तियों के बीच सहयोग का रोडमैप सामने रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया की वैश्विक व्यवस्था, उसका एजेंडा और शक्ति का संतुलन तेजी से बदल रहा है। ऐसे में इन देशों के लिए एक-दूसरे के साथ सहयोग बढ़ाने की पर्याप्त गुंजाइश है।
अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर सहयोग जरूरी
जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा ऐसा क्षेत्र है, जहां उभरती और मध्यम शक्तियां अपने संसाधनों को एक साथ ला सकती हैं। संघर्ष, तनाव और आपसी टकराव की स्थिति में ये देश एक-दूसरे की कूटनीतिक कोशिशों को समर्थन दे सकते हैं और मिलकर समाधान तलाशने की कोशिश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि केवल दुनिया की सबसे बड़ी शक्तियां ही वैश्विक मामलों में भूमिका निभाएं। अन्य देश भी अपने संसाधनों और कूटनीतिक क्षमता को एकजुट कर प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
भारत-EU वार्ता का दिया उदाहरण
विदेश मंत्री ने निवेश और व्यापार को भी सहयोग का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक संबंधों का उदाहरण देते हुए कहा कि करीब 25 वर्षों तक चली बातचीत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंची, क्योंकि दोनों पक्षों को यह महसूस हुआ कि बदलती दुनिया में आर्थिक जुड़ाव को और मजबूत करना जरूरी है।जयशंकर ने कहा कि आर्थिक संबंधों को गहरा करने के साथ व्यापार की बाधाओं को दूर करना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, बदलते वैश्विक माहौल में मध्यम और उभरती शक्तियों के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाएं काफी बढ़ी हैं।
टैलेंट और स्किल मोबिलिटी पर जोर
जयशंकर ने कहा कि आज दुनिया में मांग हमेशा उन जगहों पर नहीं होती, जहां बड़ी संख्या में युवा या कामकाजी आबादी मौजूद है। ऐसे में प्रतिभा और कौशल की आवाजाही इस असंतुलन को कम करने का एक प्रभावी तरीका हो सकती है।







