नई दिल्ली। पेंशन को लेकर लंबे समय से उलझन में चल रहे लाखों कर्मचारियों के लिए झारखंड हाई कोर्ट ने राहत भरा फैसला लिया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी कर्मचारी ने ज्यादा पेंशन के लिए ऑप्शन (Higher Pension option) नहीं भी चुना था तब भी उसे ज्यादा फायदेमंद पेंशन योजना का लाभ दिया जा सकता है. यह फैसला खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए अहम है जो पहले CPF (Contributory Provident Fund) में थे और बाद में GPF(General Provident Fund) पेंशन योजना ज्यादा फायदेमंद साबित हुई.
बिना ऑप्शन के भी मिलेगा ज्यादा पेंशन का फायदा
झारखंड हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगर कोई कर्मचारी तय समय पर यह नहीं बताता कि वह कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड में बने रहना चाहता है तो उसे अपने आप ज्यादा फायदेमंद जनरल प्रोविडेंट फंड योजना में माना जाएगा. कोर्ट का मानना है कि पेंशन जैसी सुविधा कर्मचारियों के भले के लिए होती है और इसमें किसी तरह की सख्ती या भेदभाव नहीं होना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला केंद्रीय विद्यालय संगठन के एक रिटायर्ड शिक्षक से जुड़ा है. शिक्षक की नौकरी अप्रैल 1995 में पक्की हुई थी और वह मार्च 2019 में रिटायर हुए. उन्होंने पहले सीपीएफ चुना था लेकिन बाद में नियम बदलने के बाद भी उनसे दोबारा कोई ऑप्शन नहीं लिया गया. जब उन्होंने पेंशन स्कीम बदलने की मांग की तो उसे नजरअंदाज कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने आरटीआई लगाई और फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
सरकारी रिकॉर्ड में नहीं मिला कोई ऑप्शन फॉर्म
आरटीआई के जवाब में यह सामने आया कि कर्मचारी के रिकॉर्ड में ऐसा कोई फॉर्म नहीं है जिसमें उन्होंने सीपीएफ में बने रहने की इच्छा जताई हो. इसी आधार पर उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक, उन्हें जीपीएफ पेंशन योजना में शामिल माना जाना चाहिए था. हाई कोर्ट ने इस दलील को सही माना.







