नई दिल्ली। मंडी और शिमला में लोकसभा चुनाव में किसका पलड़ा भारी है, इस प्रश्न पर ज्यादातर लोगों से यही सुनने को मिलेगा कि कांटे की टक्कर है। भाजपा शिमला सीट पर दोबारा जीतेगी तो इसमें सिरमौर जिला की बड़ी लीड की ज्यादा भूमिका होगी, क्योंकि यह भाजपा प्रत्याशी सांसद सुरेश कश्यप का गृह जिला है। एंटीइनकमबेंसी फैक्टर से कश्यप तभी उबर सकते हैं, अगर सिरमौर ने पूरा साथ दिया। इसी तरह मंडी के बारे में भी कहा जा रहा है कि यहां हार-जीत का फैसला इस सीट का सबसे बड़ा जिला मंडी ही लेगा। जयराम ठाकुर के गृह जिला मंडी से अगर जोरदार लीड नहीं ले पाए तो भाजपा उपचुनाव की तरह चूक सकती है। इसीलिए हमीरपुर और कांगड़ा से भी ज्यादा संवेदनशील भाजपा के लिए यही दोनों सीटें हैं।
दोनों ही सीटों पर 2019 के चुनावों की तरह अब मोदी मैजिक पर ही भरोसा है। जिन गढ़ों पर भाजपा विश्वास कर सकती है, उन्हीं को चुनाव से ठीक एक हफ्ते पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी के प्रभाव से मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है, जहां पर वोटों के धुव्रीकरण का भाजपा को एक विश्वास है। इसी कारण शुक्रवार को प्रदेश में प्रधानमंत्री से केवल दो रैलियां इन्हीं गढ़ों में करवाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को पहली जनसभा को नाहन के चौगान मैदान और दूसरी मंडी के पड्डल ग्राउंड में संबोधित करेंगे। नाहन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल का विधानसभा हलका है, जहां वह डेढ़ साल पहले अपना चुनाव हारे थे।
वह अपने हलके नाहन में भाजपा को लीड दिलाने के लिए ज्यादा पसीना बहा रहे हैं। सिरमौर के बाकी चार हलकों में हाटी मुद्दे पर भरोसा है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का गृह जिला मंडी विधानसभा चुनाव में भाजपा को दस में से नौ सीटें दे गया था। ऐसे में प्रदेश भाजपा के दोनों ही वरिष्ठ नेताओं ने केवल अपने-अपने क्षेत्रों में ही प्रधानमंत्री की रैलियां करवाने में विशेष दिलचस्पी ली है। दोनों मोदी को अपने क्षेत्रों में लाकर एक राजनीतिक संदेश तो देना ही चाह रहे है, वोटों का ध्रुवीकरण कर अपनी भी प्रतिष्ठा भी बचाना चाह रहे हैं।
हाटी फैक्टर से सिरमौर में राजपूतों के ध्रुवीकरण की रणनीति
सिरमौर जिला की सबसे बड़ी लड़ाई गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करवाने की रही है। पिछली जयराम सरकार साथ लगते उत्तराखंड के जौनसार बावर की तरह हाटी समुदाय के लोगों को जनजातीय दर्जा दिलाने के लिए संसद से कानून पारित करवाने में कामयाब हुई। भाजपा इस मुद्दे को पूरी तरह से भुनाना चाह रही है। बेशक अनुसूचित जाति, जनजातीय गुज्जर समुदाय के लोग और ओबीसी में आने वाले भाट-ब्राह्मण इससे संतोष जाहिर न कर रहे हों, मगर भाजपा सिरमौर जिला की सबसे बड़ी आबादी राजपूतों का ध्रुवीकरण करना चाह रही है।
जयराम के गृह जिला मंडी को और पक्का करने की तैयारी
मंडी जिला भाजपा का गढ़ बनने लगा था, जिसे कांग्रेस ने उपचुनाव में झटक लिया था। भाजपा यहां लगातार पिछले दो आम चुनाव जीती, उपचुनाव में हार का कारण उस वक्त कांग्रेस नेता वीरभद्र के देहांत से उपजी सहानुभूति लहर मानी गई। वहीं, विधानसभा चुनाव में भी इस जिला का अच्छा प्रदर्शन रहा। इससे जयराम ठाकुर अपनी इस बात को मनवाने में कामयाब हुए हैं कि चूक मंडी जिला या उनके गृह संसदीय क्षेत्र से नहीं हुई, बल्कि अन्य क्षेत्रों से हुई। जयराम ठाकुर की इस संसदीय सीट से प्रतिष्ठा जुड़ी है। उपचुनाव के बाद विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्हें इस सीट को किसी भी हाल में जीतना होगा। वरना उनसे यह लगातार तीसरी चूक होगी। प्रचार के अंतिम दौर में मोदी की लहर से ही वह चुनावी कश्ती पार करना रहे हैं। नए प्रयोग के तहत सिने तारिका कंगना रणौत यहां से भाजपा हाईकमान की ओर से तय प्रत्याशी हैं तो प्रधानमंत्री की जनसभा रखवाने का मजबूत आधार बन गया।







