नई दिल्ली: भारत की जेलों में बंद और विदेश भाग चुके गैंगस्टर्स सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। दोनों ही ऑर्गेनाइज्ड तरीके से अपने-अपने क्राइम सिंडिकेट को चला रहे हैं। जेल में बंद गैंगस्टर फोन, मिलाई और कोर्ट में पेशी के दौरान अपने मैसेज अपने साथियों तक भेजते हैं, जो उसके कहने पर वारदात को अंजाम देते हैं। इसी तरह विदेश में बैठा गैंगस्टर भी अपने सिंडिकेट को यहां के मेंबर्स के जरिए एक्टिव रखता हैं।
पुलिस अफसरों ने बताया कि देश की सुरक्षा एजेंसियों के जरिए उन देशों से कुछ गैंगस्टर्स को डिपोर्ट कराने में सफलता मिली है, जिनसे भारत सरकार का तालमेल ठीक है। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और पुर्तगाल समेत कुछ देश ऐसे हैं, जहां से किसी गैंगस्टर या बदामाश को लाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। इसके बावजूद उसे भारत लाना आसान नहीं होता है।
आरोपी की गैरमौजूदगी में भी चलाया जाएगा मुकदमा
पुलिस अफसर कहते हैं कि विदेश से ऑपरेट करने वाले गैंगस्टर्स पर उनकी संलिप्तता वाले केसों में केस दर्ज हो रहे हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 356 के तहत अब आरोपी पर उसकी गैरमौजूदगी में भी मुकदमा चलाया जा सकता है। यानी अब कोई भी अपराधी सिर्फ फरार होने या पेश नहीं होने से कोर्ट की कार्यवाही से बच नहीं सकता है। इसलिए विदेश से गैंग ऑपरेट कर रहे बदमाशों के खिलाफ दर्ज हो रहे केसों में पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं, ताकि कोर्ट उन्हें सजा सुना सके।
विदेश में बैठे गैंगस्टर्स भी नहीं बचेंगें
पुलिस अफसर कहते हैं कि अदालत अगर विदेश में बैठे किसी गैंगस्टर को दोषी करार देता है और उसे सजा सुनाता है तो उसके आधार पर उसे किसी भी देश से डिपोर्ट कराना आसान हो जाएगा। यह प्रक्रिया लंबी जरूर है, लेकिन इसके सिवा कोई चारा भी नहीं है। इसलिए कोई गैंगस्टर अगर विदेश में बैठ कर यह सोच रहा है कि वह बच जाएगा तो यह उसकी भूल होगी।







