स्पेशल डेस्क/वृंदावन :वृंदावन में गोस्वामी समाज द्वारा सड़कों पर किए जा रहे प्रदर्शन और आंदोलन का मुख्य कारण बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर और मंदिर के प्रबंधन के लिए प्रस्तावित ट्रस्ट के गठन को लेकर है। यह विवाद हाल के दिनों में सुर्खियों में रहा है, क्योंकि गोस्वामी समाज और स्थानीय लोग कॉरिडोर परियोजना और प्रशासन के कुछ कदमों को अपनी परंपराओं, आजीविका और धार्मिक अधिकारों पर हमला मान रहे हैं। आइए इस मामले को विशेष विश्लेषण में एक्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से विस्तार में समझते हैं।
बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के आसपास कॉरिडोर बनाने की योजना शुरू की गई है। इसका उद्देश्य मंदिर में दर्शन व्यवस्था को सुगम बनाना, भीड़-भाड़ को कम करना और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाना बताया गया है। इस कॉरिडोर के लिए आसपास की गलियों, मकानों और दुकानों को हटाने की योजना है, जिससे स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की आजीविका पर असर पड़ रहा है।
गोस्वामी समाज की भूमिका
गोस्वामी समाज लंबे समय से बांके बिहारी मंदिर की सेवा और प्रबंधन से जुड़ा हुआ है। यह समाज मंदिर के पुजारी और सेवायत के रूप में अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों को निभाता रहा है। समाज का कहना है कि “कॉरिडोर निर्माण और ट्रस्ट गठन से उनकी पुश्तैनी सेवा पर खतरा मंडरा रहा है। वे इसे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत पर हमला मानते हैं।”
सरकार द्वारा मंदिर के प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का प्रस्ताव है, जिसे गोस्वामी समाज अपने नियंत्रण को कम करने की साजिश के रूप में देख रहा है। समाज का आरोप है कि प्रशासन उन्हें गुमराह कर रहा है और उनकी सहमति के बिना निर्णय लिए जा रहे हैं।
प्रदर्शन और संग्राम
हवन-यज्ञ और नारेबाजी 31 मई 2025 को गोस्वामी समाज ने कॉरिडोर के विरोध में हवन-यज्ञ का आयोजन किया और “जनप्रतिनिधियों की बुद्धि शुद्धि हो” जैसे नारे लगाए। 1 जून 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन चौथे दिन भी जारी रहे। समाज ने प्रशासन पर गलियों और संपत्तियों को तोड़ने का आरोप लगाया। 6 जून 2025 को टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर पर हुई बैठक में गोस्वामी समाज और व्यापारियों ने सरकार के प्रस्तावों पर असहमति जताई और विरोध किया।
सांसद हेमा मालिनी का बयान !
मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने इस विवाद पर चुप्पी तोड़ते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। महिलाओं ने मकानों और दुकानों के टूटने की आशंका पर भावुक होकर प्रदर्शन किया।
गोस्वामी समाज का कहना है कि “कॉरिडोर के नाम पर उनकी पुश्तैनी संपत्तियों और गलियों को नष्ट किया जा रहा है, जो उनकी आजीविका और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा हैं।”
प्रशासन का दावा है कि कॉरिडोर से मंदिर में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और व्यवस्था सुधरेगी। लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परियोजना उनकी सहमति के बिना और अपारदर्शी तरीके से लागू की जा रही है। कुछ संगठनों, जैसे ऑल इंडिया मुस्लिम जमात, ने भी इस तरह के निर्णयों को सामाजिक एकता के लिए हानिकारक बताया है, हालांकि उनका मुद्दा अलग संदर्भ में था।
सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन
7 जून 2025 को आंदोलन और तेज हो गया, जिसमें गोस्वामी समाज ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। समाज ने प्रशासन से स्पष्ट जवाब और उनकी मांगों पर विचार करने की मांग की है, जिसमें उनकी सेवा के अधिकारों को बनाए रखना और कॉरिडोर निर्माण में पारदर्शिता शामिल है। यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है, जिसमें स्थानीय लोग, व्यापारी और धार्मिक संगठन एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं।
प्रशासन और समाज के बीच संवाद
वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर और ट्रस्ट गठन को लेकर गोस्वामी समाज का आंदोलन उनकी धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक चिंताओं को दर्शाता है। समाज का मानना है कि यह परियोजना उनकी परंपराओं और आजीविका को नुकसान पहुंचाएगी, जबकि सरकार इसे विकास और सुविधा के लिए जरूरी बता रही है। इस टकराव ने स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है, और इसका समाधान प्रशासन और समाज के बीच संवाद पर निर्भर करता है।







