नई दिल्ली. हेल्थ इंश्योरेंस की पॉलिसी अगर लैप्स हो जाए, तो मुश्किल वक्त में बड़ा झटका लग सकता है. राहत की बात ये है कि इसे दोबारा चालू कराया जा सकता है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी. कई मामलों में आपको पुराने फायदे खोने पड़ सकते हैं या फिर वेटिंग पीरियड दोबारा शुरू हो सकता है. इतना ही नहीं मेडिकल टेस्ट और अतिरिक्त भुगतान भी करना पड़ सकता है. इसलिए पॉलिसी रिवाइव करना आसान जरूर है, लेकिन इसकी एक ‘कीमत’ जरूर चुकानी पड़ती है.
15 से 30 दिन का ‘ग्रेस पीरियड’ देती हैं कंपनियां
आखिरी मौका आमतौर पर प्रीमियम की तारीख निकलने के बाद कंपनियां 15 से 30 दिन का ‘ग्रेस पीरियड’ देती हैं. इस दौरान आप बिना किसी नुकसान के प्रीमियम भर सकते हैं. ध्यान रहे, इस अवधि में अगर कोई बीमारी होती है, तो कंपनी क्लेम देने से मना कर सकती है.
ग्रेस पीरियड को सिर्फ देरी सुधारने का मौका
मनीकंट्रोल से बात करते हुए बजाज जनरल इंश्योरेंस के एमडी तपन सिंघल ने कहा कि ग्रेस पीरियड को सिर्फ देरी सुधारने का मौका समझें, न कि पॉलिसी का विस्तार. समय पर रिन्यूअल ही आपकी जमा पूंजी और हेल्थ कवर को बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका है.
पॉलिसी दोबारा कैसे शुरू करें?
अगर ग्रेस पीरियड भी निकल गया है, तो तुरंत अपनी इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क करें. ज्यादातर कंपनियां 6 महीने तक पॉलिसी दोबारा शुरू करने का मौका देती हैं, लेकिन इसके लिए आपको बकाया प्रीमियम के साथ ब्याज भी देना पड़ सकता है.
हो सकते हैं ये नुकसान
पॉलिसी लैप्स होने पर उसे दोबारा चालू करना इतना आसान नहीं होता. एक्सपर्ट के अनुसार:
- पुराने फायदे खत्म: मुमकिन है कि सालों से पॉलिसी चलाने के कारण जो ‘नो क्लेम बोनस’ या वेटिंग पीरियड का फायदा आपको मिला था, वह खत्म हो जाए.
- नया मेडिकल टेस्ट: कंपनी आपसे दोबारा मेडिकल चेकअप या हेल्थ डिक्लेरेशन मांग सकती है.
- नया वेटिंग पीरियड: पुरानी बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड फिर से जीरो से शुरू हो सकता है.







