विकाश शुक्ला
सिंगरौली/शहडोल (मध्य प्रदेश)। राज्य की उच्च न्यायालय जबलपुर ने रेत खनन और परिवहन से जुड़े ई-ट्रांजिट पास (ETP) विवाद में दायर याचिका को खारिज कर दिया। विदित हो कि सीधी निवासी व्यवसायी मनीष सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सहकार ग्लोबल लिमिटेड के खिलाफ जांच कराने और उसके खनन अनुबंध निरस्त करने की मांग की थी। उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर रिट याचिका क्रमांक 35378/2025 (मनीष सिंह बनाम मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य) में 30 सितंबर 2026 को उच्च न्यायालय द्वारा फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह आदेश 30 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने पारित किया।
क्या है पूरा मामला ?
मामला शहडोल और सिंगरौली जिलों में रेत खनन, भंडारण और परिवहन के ठेकों से जुड़ा है। याचिकाकर्ता मनीष सिंह ने आरोप लगाया था, कि रेत परिवहन में इस्तेमाल होने वाले एक ट्रक (UP-63-BT-1655) के नाम पर 17 ई-ट्रांजिट पास जारी किए गए, जबकि उनके अनुसार वाहन खराब होने के कारण निर्धारित अवधि में चलने की स्थिति में नहीं था। याचिकाकर्ता ने इन पासों को लेकर जांच कराने और संबंधित कंपनी के खनन अनुबंध रद्द करने की मांग की थी।
कंपनी ने क्या पक्ष रखा ?
संबंधित कंपनी ने आरोपों से इनकार किया। कंपनी का कहना था, कि विवादित 17 पासों के संबंध में सरकार को रॉयल्टी का भुगतान किया जा चुका था। कंपनी ने यह भी बताया कि उसके अनुसार 15 जनवरी 2024 से 28 सितंबर 2025 के बीच कुल 2,93,797 ई-ट्रांजिट पास जारी किए गए थे, जिनमें से 17 विवादित थे।
हाईकोर्ट ने क्या कहा ?
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि दायर की गई याचिका से मुख्य रूप से याचिकाकर्ता और कंपनी के बीच ट्रकों के उपयोग तथा परिवहन से जुड़ा निजी विवाद प्रतीत होता है। न्यायालय के अनुसार, याचिकाकर्ता के पास संबंधित सरकारी अनुबंधों को रद्द कराने की मांग करने का आवश्यक कानूनी आधार नहीं था। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रधान रजिस्ट्रार (न्यायिक) की जांच रिपोर्ट में सही नहीं पाए गए। इसके बाद पहले दिए गए अंतरिम आदेश से संबंधित प्रतिकूल टिप्पणियां वापस ले ली गईं, और उस संबंध में कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
याचिका खारिज, 25 हजार रुपये जमा करने का आदेश
उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए 25 हजार रुपये की लागत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर में चार सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया। वहीं न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया, कि कंपनी ने खनन कानूनों या ठेके की शर्तों का उल्लंघन किया है, तो उसकी जाँच संबंधित सक्षम प्राधिकारी लागू कानूनों और ठेके की शर्तों के अनुसार कर सकता है।
[स्रोत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर ; रिट याचिका क्रमांक WP-35378-2025, आदेश दिनांक 30 सितंबर 2026।]







