प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पुराने वाहनों पर सख्त नियम लागू किए हैं। 1 जुलाई से दिल्ली-एनसीआर में 10 साल से पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से पुरानी पेट्रोल व CNG गाड़ियों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं मिलेगा। यह नियम कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के निर्देशों के तहत लागू किया गया है और सुप्रीम कोर्ट (2018) व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT, 2014) के आदेशों पर आधारित है। इसका उद्देश्य दिल्ली की हवा को साफ करना और पुराने, प्रदूषणकारी वाहनों को सड़कों से हटाना है।
क्या है नियम का दायरा ?
डीजल वाहन 10 साल से पुराने। पेट्रोल और CNG वाहन 15 साल से पुराने। यह नियम दिल्ली में पंजीकृत और अन्य राज्यों से आने वाली सभी गाड़ियों पर लागू है। दिल्ली में करीब 62 लाख वाहन (41 लाख दोपहिया, 18 लाख चारपहिया) इस दायरे में आते हैं।
दिल्ली के 500+ पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं, जो VAHAN डेटाबेस से जुड़े हैं। ये कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट स्कैन कर उसकी उम्र और पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट की वैधता जांचते हैं। यदि गाड़ी ‘एंड-ऑफ-लाइफ’ (EoL) श्रेणी में आती है, तो पंप पर ऑडियो अलर्ट के साथ ईंधन देने से मना किया जाता है।
कितना है जुर्माना और कार्रवाई
नियम तोड़ने पर चारपहिया वाहनों के मालिकों को 10,000 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। गाड़ी को जब्त कर स्क्रैपिंग सेंटर भेजा जा सकता है। पेट्रोल पंपों पर नियम तोड़ने वाले डीलरों पर मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 192 के तहत कार्रवाई होगी।
गाड़ी को सरकारी स्क्रैपिंग सेंटर में दे सकते हैं। इसके बदले स्क्रैप वैल्यू और सर्टिफिकेट मिलेगा, जिससे नई गाड़ी खरीदते समय रजिस्ट्रेशन फीस में छूट (25% तक निजी वाहनों पर, 15% तक कमर्शियल वाहनों पर) और रोड टैक्स में राहत मिल सकती है। गाड़ी को दिल्ली-एनसीआर से बाहर (जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार) ट्रांसफर किया जा सकता है, जहां नियम कम सख्त हैं। इसके लिए दिल्ली परिवहन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना होगा।
इलेक्ट्रिक वाहन में अपग्रेड
सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है। 90% CNG बसों को दिसंबर 2025 तक इलेक्ट्रिक बसों से बदला जाएगा। दिल्ली पुलिस, ट्रैफिक विभाग, MCD और परिवहन विभाग की 200 टीमें पेट्रोल पंपों और सड़कों पर निगरानी करेंगी। 350 पेट्रोल पंपों पर विशेष निगरानी, जिसमें 100 सबसे व्यस्त पंपों पर पुलिस तैनात रहेगी। पेट्रोल पंपों पर साइनेज लगाने और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने के निर्देश हैं। लॉग बुक मेंटेन करनी होगी।
दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन (DPDA) ने नियम को अव्यावहारिक बताया है। उनका कहना है कि “पंप कर्मचारी प्रवर्तन अधिकारी नहीं हैं और गलती से ईंधन देने पर उन पर कार्रवाई अनुचित है। एसोसिएशन ने पुलिस सुरक्षा, स्पष्ट दिशा-निर्देश (SOP), और दंडात्मक प्रावधान हटाने की मांग की है।
चरणबद्ध लागूकरण !
दिल्ली में 1 जुलाई से। गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, सोनीपत 1 नवंबर 2025 से।
पूरे एनसीआर में 1 अप्रैल 2026 से। लागु होगा। दिल्ली में 55-62 लाख पुराने वाहन (66% दोपहिया, 54% चारपहिया) प्रदूषण का बड़ा कारण हैं। सरकार का दावा है कि “यह कदम हवा की गुणवत्ता सुधारेगा और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।”
ये रखें सावधानियां !
अपनी गाड़ी की उम्र और PUC सर्टिफिकेट की वैधता जांचें। स्क्रैपिंग, ट्रांसफर या इलेक्ट्रिक वाहन में अपग्रेड पर विचार करें। दिल्ली परिवहन विभाग की वेबसाइट पर जाकर NOC के लिए अप्लाई करें। नियमों का पालन करें, अन्यथा भारी जुर्माना और गाड़ी जब्ती का जोखिम है। यह नीति दिल्ली की हवा को साफ करने की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में तकनीकी और व्यावहारिक चुनौतियां बनी रह सकती हैं।







