Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

चुनावी मौसम में नागरिकता कानून का महत्व

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 26, 2024
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
16
SHARES
527
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

कौशल किशोर


नई दिल्ली। नागरिकता कानून में संशोधन लागू करने पर अमरीका की प्रतिक्रिया का प्रतिकार करते हुए विदेश मंत्रालय विभाजन की पीड़ा नजरंदाज करने की बात का ध्यान दिलाती है। इसकी संवैधानिकता पर सवाल उठाने वाली 200 से ज्यादा केस की एक साथ सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने स्थगन आदेश देने से इंकार किया है। जनता द्वारा चुनी संसद ने 2019 में संशोधन किया और बीते 11 मार्च की अधिसूचना से इंतजार भी खत्म हो गया है। इससे 31 दिसंबर 2014 से पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थी शीघ्र नागरिकता पाने के अधिकारी होते हैं। पीड़ितों को राहत अवश्य मिलेगा। पर व्यर्थ विरोध प्रदर्शन करने वाले भी कम नहीं हैं। इसके साथ भारत घुसपैठियों व शरणार्थियों के मामले में अपनी नीति भी याद दिलाती है।

इन्हें भी पढ़े

HAL

HAL ने तैयार किया नया स्टील्थ क्रूज़ मिसाइल कॉन्सेप्ट, भारत की मारक क्षमता को मिलेगी और मजबूती

March 25, 2026
Railway

रेल टिकट रिफंड नियमों में बड़ा बदलाव, इस तारीख से होगा लागू

March 25, 2026
pm modi

लोकसभा में इन 4 चार बिल पर चर्चा करेगी मोदी सरकार!

March 24, 2026
gas cylinder

अब हर घर तक पहुंचेगा सिलेंडर, सरकारी कंपनियां बना रही हैं ये धांसू प्लान

March 24, 2026
Load More

पाकिस्तान में भी इसका असर दिख रहा है। इसके बाद खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 200 वर्ष पुराने मंदिर पर हमला किया गया। स्वाबी जिले के रज्जर तहसील के दगई गांव में स्थित मंदिर को स्थानीय लोगों ने मुश्किल से बचाया। वहां पर अब अल्पसंख्यकों की संपत्तियों की कीमत गिरने लगी और कम दाम पर बेचने के लिए विवश किया जाने लगा है। सरकार के प्रवक्ता इस कानून की आलोचना कर चुके हैं। पाकिस्तान की संसद में भी 16 दिसंबर 2019 को प्रस्ताव पारित इसे समानता के अंतर्राष्ट्रीय मानकों के विरुद्ध बताया गया था।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर की चिंता कितनी जायज है! विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमरीकी राजदूत एरिक गार्सेटी की बातचीत में भी उन्हीं की प्रतिक्रिया ध्वनित हो रही। इस कानून को लागू करने पर नजर रखने की धौंस दे रहे हैं या धार्मिक स्वतंत्रता का आदर करने जैसे लोकतांत्रिक सिद्धांत का उपदेश दे रहे। क्या यह स्पष्ट नहीं है? आशा करना चाहिए कि इस उदारता को अपना कर अमेरिका अपने देश में पहले नस्लभेद व रंगभेद का संकट दूर करेगा। ईसाइयत और इस्लाम के बूते खड़े राष्ट्र अपनी जमीन पर भेदभाव की समस्या दूर किए बिना भारत को शिक्षा देने के अधिकारी कैसे हो सकते हैं? पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा विभाजन की इस नीति की पहले से याद दिलाते रहे। सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई अप्रैल के दूसरे सप्ताह में तय हुई है। इसका मतलब हुआ लोक सभा चुनाव के इस मौसम में यह बहस का मुद्दा बना ही रहेगा।

अरकान क्षेत्र के रोहिंग्या मुसलमानो को पनाह देने के बदले मुस्लिम देश वैमनस्य की खेती करने में लगे हैं। उपदेश की यह नीति इस्लाम के पैरोकारों की पोल खोल देती है। असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में घुसपैठियों की समस्या से मुक्ति की मांग उठती रही है। बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थी स्वाभाविक रूप से भारत में पनाह पाने वाले होते हैं। आज इस वजह से अरविन्द केजरीवाल जैसे नेता इनकी संख्या कई गुणा बढ़ा बता रहे हैं। अपने ही लोगों को भ्रमित करने का यह एक उदाहरण है। 31 दिसम्बर 2014 से पहले पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए जिन लोगों को इस संशोधन का लाभ मिलेगा उनकी कुल संख्या 31,313 है। इस पर गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में 25,447 हिंदू, 5,807 सिख, 55 ईसाई, 2 बौद्ध और 2 पारसी के शामिल होने की बात कही गई है। इसके बात भी अभिनव चंद्रचूड़ जैसे विद्वान अधिवक्ता यहूदियों के नाम पर सवाल उठाते हैं। भारतीय लोकतंत्र के उदारता की व्याख्या हो रही है। भाजपा शरणार्थी और घुसपैठियों के मामले में अपने घोषणा पत्र में वर्णित विरोधाभास को न सिर्फ साफ करती है, बल्कि दोनों वादों को निभाने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है।

भारत विभाजन की विभीषिका से अनभिज्ञ लोग इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के वाजिब अधिकारी भी नहीं हैं। यायाति के पूर्वज को मिले अभिशाप की तरह आजादी के साथ आर्यावर्त को विभाजन का अभिशाप भी मिला था। औपनिवेशिक मानसिकता की तरह ही इसके निशान भी दूर नहीं हुए हैं। इसकी निशानियां दूर करने का भी भाजपा के घोषणा पत्र में वादा किया गया था। अयोध्या में मंदिर निर्माण की तरह पार्टी उपमहाद्वीप में विभाजन के पीड़ितों को राहत देने की घोषणा पूरी करती है। इसी तरह एक दिन नारी शक्ति वंदन कानून भी परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा।

लोक सभा में 9 दिसम्बर 2019 को गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नागरिकता कानून में इस संशोधन का विधेयक पेश किया गया। उन्होंने कहा था कि पिछली सरकार ने भी 13,000 हिंदुओं और सिखों को नागरिकता दी थी। परंतु मोदी सरकार हिंदू और सिखों सहित छह प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता का अधिकार दे रही है। दो घंटे की बहस के बाद अन्नाद्रमुक, जनता दल (यू), अकाली दल और बीजू जनता दल के सदस्यों समेत 293 सांसदों ने पक्ष में और 82 सांसदों ने विपक्ष में मतदान किया। अगले दिन राज्य सभा में बीजू जनता दल, तेलगु देसम पार्टी व वाईएसआर कांग्रेस सदस्यों समेत 125 सांसदों ने पक्ष में और 99 सांसदों ने विपक्ष में मतदान किया।

अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश भी अखण्ड भारत का हिस्सा था। इस्लाम के नाम पर अलग होने से विभाजन की विभीषिका भी देखने को मिली। क्या किसी एक दिवस में इसे समेटा जा सकता है? यह दो करोड़ लोगों के विस्थापन और 20 लाख लोगों के अकाल मृत्यु का कारण साबित हुआ। दिल्ली में सड़ती लाशों के संकट पर गांधी जी को अनशन करन करना पड़ा था। इस तुगलकी फरमान से जिन पर बीती उन पर आज भी निशानियां मिलती है। महर्षि दयानंद आर्यावर्त में स्वदेशी राज का सपना देखते रहे और सावरकर अखण्ड भारत का सपना लिए विदा हो गए। इस काम से केन्द्र सरकार उनके सपनों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करती दिखती है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
पलायन

बढ़ रहा है पलायन!

March 21, 2023
राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा

राहुल ने शुरू की नई परंपरा

December 31, 2022
india-us trade deal

अमेरिका ने भारत पर टैरिफ़ घटाकर 18 फ़ीसदी किया, ट्रंप के दावों से गहराए संदेह, क्या भारत इतना कर पाएगा ?

February 3, 2026
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • मीन राशि में शनि-मंगल-बुध की युति, त्रिग्रही योग करेगा इन राशियों पर खुशियों की बौछार
  • मिनटों में खाना पचाता है पान का शरबत, जानें कैसे बनाएं?
  • क्रिमिनल जस्टिस’ को फेल करती है 8 एपिसोड वाली सीरीज, अब आ रहा नया सीजन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.