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‘डिजिटल इंडिया’ से बदलता ‘भारत’…10 साल में भारत की ताकत, तकनीक से तरक्की !

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 1, 2025
in राष्ट्रीय
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digital india
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विशेष डेस्क/नई दिल्ली: डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसे 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया था। इस पहल का उद्देश्य भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना है। पिछले 10 वर्षों में डिजिटल इंडिया ने भारत के सामाजिक, आर्थिक और शासकीय ढांचे में अभूतपूर्व परिवर्तन लाए हैं। यहां डिजिटल इंडिया की प्रगति और इसके प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से समझते हैं जिसमें उपलब्धियाँ, बदलाव, चुनौतियाँ और भविष्य की संभावनाएं शामिल हैं।

डिजिटल इंडिया का उद्देश्य

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डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तीन मुख्य दृष्टिकोण हैं डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास प्रत्येक नागरिक के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे को एक कोर यूटिलिटी के रूप में उपलब्ध कराना। सरकारी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रदान करना, जिससे पारदर्शिता और दक्षता बढ़े। सभी नागरिकों को डिजिटल तकनीक का उपयोग करने में सक्षम बनाना।

इसके नौ प्रमुख स्तंभ हैं, जिनमें शामिल हैं: ब्रॉडबैंड हाईवे, मोबाइल कनेक्टिविटी तक सार्वभौम पहुँच, सार्वजनिक इंटरनेट पहुँच, ई-गवर्नेंस, ई-क्रांति, सभी के लिए सूचना, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, रोजगार के लिए आईटी और प्रारंभिक हार्वेस्ट कार्यक्रम।

10 वर्षों में ‘डिजिटल इंडिया’ की उपलब्धियां !

  • डिजिटल इंडिया ने भारत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने और डिजिटल विभाजन को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यहां कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ हैं इंटरनेट और कनेक्टिविटी में वृद्धिग्रामीण इंटरनेट पहुंच 2014 में केवल 44% ग्रामीण टेली-घनत्व था, जो 2025 तक बढ़कर 59.06% हो गया। 95% से अधिक गांवों को अब इंटरनेट कनेक्टिविटी प्राप्त है।
  • 2014 में भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 25 करोड़ थी, जो 2025 तक 97 करोड़ हो गई, जो 288% की वृद्धि को दर्शाता है। इंटरनेट प्रवेश दर 14% से बढ़कर 55% से अधिक हो गई।
  • 2022 में 5G नेटवर्क की शुरुआत के बाद, 2025 तक 4.81 लाख 5G बेस स्टेशन स्थापित किए गए, जिससे गल्वान, सियाचिन और लद्दाख जैसे सुदूर क्षेत्रों में भी हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध हुआ।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए भारतनेट परियोजना ने लाखों ग्राम पंचायतों को जोड़ा।

डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन यूपीआई 

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी। 2016 में शुरू हुआ UPI आज विश्व में सबसे अधिक उपयोग होने वाला रीयल-टाइम पेमेंट सिस्टम है, जो प्रति वर्ष 100 अरब से अधिक लेनदेन संभालता है। भारत अब वैश्विक डिजिटल भुगतान में अग्रणी है, जिसमें विश्व के लगभग आधे रीयल-टाइम लेनदेन भारत में होते हैं।

DBT के माध्यम से 44 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों तक हस्तांतरित की गई, जिससे 3.48 लाख करोड़ रुपये की राशि की लीकेज को रोका गया।

जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) इस त्रिमूर्ति ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया, जिससे लाखों लोगों को बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच मिली। 1.3 बिलियन से अधिक आधार कार्ड धारक हैं, जो सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाते हैं।

ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाएँ डिजिटल लॉकर !

डिजी लॉकर ने नागरिकों को अपने दस्तावेज़ों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और साझा करने की सुविधा दी। ई-नाम (eNAM) 2016 में शुरू हुआ यह प्लेटफॉर्म कृषि उपज बाजार समितियों को जोड़ता है, जिससे किसानों को अपनी उपज ऑनलाइन बेचने में मदद मिली।

स्वामित्व योजना 2.4 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड जारी किए गए और 6.47 लाख गांवों का डिजिटल मानचित्रण किया गया, जिससे ग्रामीण संपत्ति विवादों में कमी आई।

MyGov.in यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को सरकारी नीतियों में भागीदारी और फीडबैक देने का अवसर प्रदान करता है।

डिजिटल शिक्षा और साक्षरता दीक्षा (DIKSHA)

यह डिजिटल प्लेटफॉर्म शिक्षकों और छात्रों के लिए शैक्षिक सामग्री, वीडियो लेक्चर और क्विज़ प्रदान करता है। कोविड-19 लॉकडाउन के बाद इसकी लोकप्रियता में भारी वृद्धि हुई।

प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDSA) 14 से 60 वर्ष की आयु के ग्रामीण नागरिकों को डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसमें इंटरनेट, ईमेल और ऑनलाइन भुगतान का उपयोग सिखाया गया।

स्टार्टअप और अर्थव्यवस्था का विकास

भारत अब अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था है। 2025 की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल अर्थव्यवस्था भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 20% योगदान देगी और 2028 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है।

स्टार्टअप इंडिया पिछले 10 वर्षों में हजारों स्टार्टअप्स ने जन्म लिया, जिन्होंने फ्रीलांसिंग, डिजिटल मार्केटिंग, और ऐप डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए। 2024 तक भारतीय स्टार्टअप्स ने 30.4 बिलियन डॉलर का वित्त पोषण जुटाया। गेमिंग उद्योग भारतीय गेमिंग उद्योग 2023 में 3.1 बिलियन डॉलर का था और 2028 तक 7.5 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

नीतिगत और नियामक ढांचा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 यह कानून डेटा गोपनीयता और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में विश्वास को बढ़ावा देता है। डिजिटल इंडिया अधिनियम (DIA), 2023 यह पुराने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 को प्रतिस्थापित करने के लिए प्रस्तावित है, जो AI और ब्लॉकचेन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारी से अपनाने के लिए दिशानिर्देश प्रदान करता है।

भारत में हुए प्रमुख बदलाव !

डिजिटल इंडिया ने भारत के सामाजिक, आर्थिक और शासकीय परिदृश्य को निम्नलिखित तरीकों से बदला है डिजिटल इंडिया ने ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देकर डिजिटल विभाजन को कम किया। अब एक किसान मोबाइल से फसल का बाजार भाव देख सकता है, और एक ग्रामीण महिला घर से ऑनलाइन कारोबार चला सकती है।

नागरिक सशक्तिकरण डिजिटल सेवाओं जैसे डिजी लॉकर, ई-नाम, और UPI ने नागरिकों को सरकारी सेवाओं और वित्तीय लेनदेन तक त्वरित पहुंच प्रदान की। DBT और ई-गवर्नेंस ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाई और बिचौलियों को हटाया।

UPI और जन धन खातों ने छोटे व्यवसायों और व्यक्तियों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में शामिल किया। सड़क किनारे चाय वाले से लेकर मॉल तक, डिजिटल भुगतान अब आम है। डिजिटल इंडिया ने फ्रीलांसिंग, डिजिटल मार्केटिंग और ऐप डेवलपमेंट जैसे नए क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए।

भविष्य की क्या हैं संभावनाएँ ?

डिजिटल इंडिया का अगला दशक और भी परिवर्तनकारी होने की उम्मीद है। वैश्विक डिजिटल नेतृत्व भारत UPI और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। AI और ब्लॉकचेन डिजिटल इंडिया अधिनियम, 2023 के तहत उभरती प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारी से अपनाने की योजना है। 2028 तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। डिजिटल शिक्षा (दीक्षा) और टेलीमेडिसिन जैसे क्षेत्रों में और विस्तार होगा।

डिजिटल इंडिया से सशक्त और समावेशी राष्ट्र !

डिजिटल इंडिया ने पिछले 10 वर्षों में भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त और समावेशी राष्ट्र में बदल दिया है। इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में हुई प्रगति ने भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में तीसरे स्थान पर ला खड़ा किया है। यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बन चुका है, जिसने ग्रामीण और शहरी भारत को जोड़ा, पारदर्शिता बढ़ाई, और नागरिकों को सशक्त बनाया।

हालांकि, साइबर सुरक्षा, डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना होगा। डिजिटल इंडिया ने भारत को न केवल तकनीकी रूप से सशक्त बनाया है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की एक मिसाल भी कायम की है। अगला दशक भारत को वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की ओर ले जाएगा, जिससे यह आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत राष्ट्र बनेगा।

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