नई दिल्ली: दुनिया जितनी तेजी से बढ़ रही है, भारत उससे दो कदम आगे बढ़कर सोच रहा है. यह हम नहीं बल्कि आंकड़ें कह रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष में कमाल का काम किया है. जिसने मजबूत भविष्य की नींव रखी है. दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी फैसलों और अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की नीति ने अंतरिक्ष में ताकत बढ़ाने को नई गति दी है. इसी वजह से भारत जल्द ही एक अंतरिक्ष महाशक्ति बनने की राह पर है.
सरकार की नई नीतियों का असर
भारत के अंतरिक्ष उद्योग ने पिछले 5 सालों में शानदार तेजी दर्ज की है. भारतीय अंतरिक्ष संघ (ISpA) के महानिदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल ए.के. भट्ट ने इस तेजी के लिए सरकार की नीतियों को श्रेय दिया है. उनके मुताबिक, सरकार ने 2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी उद्योग के लिए खोल दिया. जो कि एक गेम-चेंजर साबित हुआ है.
साथ ही, अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की संख्या में भारी उछाल आया है. वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि इसी गति से चलते हुए, भारत 2033 तक 44 अरब डॉलर की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल कर लेगा.
कमाल का काम कर रही ISRO
भारत की यह तेजी और प्रगति सिर्फ वित्तीय आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ISRO की सफलताओं पर भी आधारित है. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में भी अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों की सराहना की थी. उन्होंने गगनयान, चंद्रयान और मंगलयान जैसे मिशनों का जिक्र किया.
वहीं, भारत 2035 तक अपना खुद का भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) बनाने की योजना पर काम कर रहा है. जो भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करेगा.
इनोवेशन को मिला बढ़ावा
नए सुधारों में अंतरिक्ष नीति और उदार एफडीआई नीति ने निजी कंपनियों को अंतरिक्ष के क्षेत्र में निवेश करने के लिए आकर्षित ही नहीं, बल्कि प्रेरित भी किया है. इतना ही नहीं, अग्निकुल कॉसमॉस जैसी भारतीय स्टार्टअप कंपनियों ने दुनिया का सबसे बड़ा 3डी-प्रिंटेड रॉकेट इंजन बनाकर अपने तकनीकी कौशल का लोहा मनवाया है.
वहीं, पिक्ससेल के नेतृत्व में एक संघ भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी वाणिज्यिक अर्थ ऑब्जर्वेशन उपग्रह नेटवर्क बना रहा है, जो देश को विदेशी डेटा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा.
ऐसे में, कोई दो राय नहीं है कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में रॉकेट की स्पीड से काम कर रहा है. जहां ISRO जैसी संस्था प्राइवेट कंपनियों के साथ मिलकर NASA जैसी स्पेस एजेंसी के बराबर खड़ी होगी. यही वजह है कि विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी प्रयासों से भारत जल्द ही एक अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में अपनी जगह बना लेगा







