नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 77 गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधित किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस मौके देश की अहम उपलब्धियों का जिक्र करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने नागरिकों से एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और आगे बढ़ने वाले भारत के लिए मिलकर काम करते हुए एकता, समावेशिता और मजबूती को बढ़ाने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने देश के विकास में महिला शक्ति के साथ ही प्रवासी भारतीयों के योगदान का जिक्र किया।
नारी शक्ति को किया याद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने भाषण में नारी शक्ति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारी महिलाएं लंबे समय से चली आ रही रूढ़ियों को तोड़ रही हैं और आत्मविश्वास से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने महिला क्रिकेट और शतरंज में भारत की जीत को बढ़ते दबदबे का प्रतीक बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं भारत के पूरे विकास में सक्रिय रूप से योगदान दे रही हैं, जिसमें 10 करोड़ से ज़्यादा महिलाएं सेल्फ-हेल्प ग्रुप से जुड़कर जमीनी स्तर पर विकास को नया रूप दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि खेती से लेकर अंतरिक्ष तक और एंटरप्रेन्योरशिप से लेकर सेना तक, महिलाएं हर सेक्टर में अपनी छाप छोड़ रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं का लगभग 46% प्रतिनिधित्व और नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला-नेतृत्व वाले विकास को और मज़बूत करेगा। इससे विकसित भारत के विजन में लैंगिक समानता केंद्र में होगी।
प्रवासी भारतीयों के योगदान की तारीफ
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रवासी भारतीयों के योगदान की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय डायस्पोरा अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए देश के वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में जैविक खेती, इनोवेशन और स्टार्टअप, और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को भारत के भविष्य के विकास के लिए ज़रूरी बताया। राष्ट्रपति ने आत्मनिर्भर और आगे बढ़ने वाले राष्ट्र के निर्माण में सामूहिक प्रयास के महत्व पर जोर दिया।
आदिवासी कल्याण, किसानों के सशक्तिकरण पर फोकस
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को आदिवासी कल्याण और किसानों के सशक्तिकरण पर सरकार के फोकस पर ज़ोर दिया, और बताया कि नेशनल सिकल सेल एनीमिया एलिमिनेशन मिशन के तहत छह करोड़ से ज़्यादा स्क्रीनिंग की गई हैं। लगभग 1.4 लाख छात्र एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों में पढ़ रहे हैं, जिनमें से कई प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और पीएम-जनमन योजना जैसी पहल आदिवासी और PVTG समुदायों को सशक्त बना रही हैं, जबकि किसान अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने हुए हैं, जो खाद्य सुरक्षा और निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं। समर्थन उपायों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि उचित कीमतों, किफायती क्रेडिट, बीमा, गुणवत्तापूर्ण इनपुट, आधुनिक और जैविक खेती को प्राथमिकता दी जा रही है, और पीएम किसान सम्मान निधि किसानों के योगदान का सम्मान और उन्हें मजबूत कर रही है।
वंदे मातरम का किया जिक्र
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संबोधन में देशभक्ति की एकजुट करने वाली शक्ति पर ज़ोर दिया। उन्होंने याद किया कि कैसे राष्ट्रवादी कवि सुब्रमण्य भारती ने अपनी तमिल रचना ‘वंदे मातरम येनबोम’ के जरिए वंदे मातरम को लोकप्रिय बनाया, जिसका बाद में कई भारतीय भाषाओं और श्री अरबिंदो ने अंग्रेजी में अनुवाद किया गया।
उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखे गए वंदे मातरम को भारत की संगीतमय राष्ट्रीय प्रार्थना बताया, और कहा कि देश ने हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी, जिसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया ताकि युवाओं को उनकी देशभक्ति और उनके नारे ‘जय हिंद’ की अटूट भावना से प्रेरित किया जा सके।






