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भारत की अग्नि-V : एक झटके में किराना हिल्स का खात्मा, अमेरिका के बंकर-बस्टर से भी घातक !

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 23, 2025
in राष्ट्रीय
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agni-v
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विशेष डेस्क/नई दिल्ली: भारत की नई अग्नि-V मिसाइल का पारंपरिक (नॉन-न्यूक्लियर) वैरिएंट इसे पाकिस्तान के किराना हिल्स जैसे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो कथित तौर पर परमाणु हथियारों का भंडारण स्थल है। यह मिसाइल अमेरिका के GBU-57 मासिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बंकर-बस्टर बम से भी अधिक शक्तिशाली मानी जा रही है। आइए इस मिसाइल और इसके सामरिक महत्व एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से विस्तार में समझते हैं।

अग्नि-V का नया वैरिएंट… विशेषताएं

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इस मिसाइल का 7.5 टन का वारहेड अमेरिका के GBU-57 (2.4 टन) से तीन गुना भारी है, जो इसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली पारंपरिक मिसाइलों में शुमार करता है। इसकी रेंज 2000-2500 किमी की रेंज के साथ यह मिसाइल पाकिस्तान और चीन के प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकती है।सटीकता 10 मीटर से कम CEP (सर्कुलर एरर प्रोबेबल) के साथ यह मिसाइल अत्यधिक सटीक है, जो छोटे और कठोर लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है।

एयरबर्स्ट वारहेड बड़े क्षेत्र में जमीनी ढांचों को नष्ट करने के लिए। बंकर-बस्टर वारहेड 80-100 मीटर गहरे भूमिगत ठिकानों, जैसे कमांड सेंटर, मिसाइल डिपो, या परमाणु भंडारण स्थलों को नष्ट करने के लिए। यह कठोर कंक्रीट और स्टील संरचनाओं को भेद सकता है।

अमेरिका का GBU-57 बंकर-बस्टर 60 मीटर तक कंक्रीट भेद सकता है, जबकि अग्नि-V का बंकर-बस्टर वारहेड इससे कहीं अधिक गहराई तक प्रभावी है। यह मिसाइल DRDO (डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन) द्वारा विकसित की जा रही है और भारत की नो-फर्स्ट-यूज नीति को मजबूत करती है, क्योंकि यह पारंपरिक (नॉन-न्यूक्लियर) हथियार है।

किराना हिल्स का महत्व

किराना हिल्स पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा जिले में स्थित है, जो मुशाफ एयरबेस से 8 किमी और खुशाब न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स से 75 किमी दूर है। यह 70 वर्ग किमी में फैला एक सुरक्षित सैन्य क्षेत्र है।किराना हिल्स को पाकिस्तान का सबक्रिटिकल न्यूक्लियर टेस्ट साइट माना जाता है, जहां 1983-1990 के बीच परीक्षण हुए। यहाँ 10 से अधिक भूमिगत सुरंगें हैं, जिनमें परमाणु हथियार, M-11 मिसाइलें (चीन से प्राप्त), और अन्य सैन्य उपकरण रखे जाने की आशंका है। सुरंगों की दीवारें 2.5-5 मीटर मोटी कंक्रीट और स्टील से बनी हैं, जो भूकंप और हमलों से सुरक्षित हैं। रॉक बोल्टिंग तकनीक और विस्फोट-रोधी दरवाजे इसे और मजबूत बनाते हैं।

किराना हिल्स को पाकिस्तान की सेकंड-स्ट्राइक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यह क्षेत्र सड़क, रेल, और हवाई मार्गों से जुड़ा है, जिससे यह सैन्य दृष्टिकोण से अहम है।

अग्नि-V का सामरिक महत्व

किराना हिल्स जैसे ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता भारत को पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेल नीति का जवाब देने में सक्षम बनाती है। यह मिसाइल परमाणु हथियारों के भंडारण, कमांड सेंटर, और मिसाइल डिपो को निशाना बना सकती है। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास चीन के भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता इसे क्षेत्रीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के पास DF-5, DF-31, और DF-41 जैसी मिसाइलें हैं, और अग्नि-V का यह वैरिएंट इनके जवाब में है।

इस मिसाइल के विकास से भारत की सैन्य ताकत बढ़ेगी, जिससे क्षेत्रीय हथियारों की दौड़ तेज हो सकती है। चीन इसे अपनी सुरक्षा के लिए चुनौती मान सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर और किराना हिल्स पर विवाद

ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) भारत ने पाकिस्तान के 11 सैन्य ठिकानों, जैसे नूर खान, मुशाफ, और रावलपिंडी पर हवाई हमले किए। सोशल मीडिया और कुछ विशेषज्ञों ने दावा किया कि किराना हिल्स पर भी हमला हुआ, जिससे रेडियोधर्मी रिसाव की आशंका जताई गई।

भारतीय वायुसेना के डायरेक्टर जनरल ऑफ एयर ऑपरेशंस एयर मार्शल एके भारती ने स्पष्ट किया कि किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया गया। उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता था कि वहां कोई परमाणु स्थल है।” अमेरिकी विदेश विभाग ने रेडियोधर्मी रिसाव की जांच के लिए कोई टीम भेजने से इनकार किया, लेकिन B350 AMS विमान की उपस्थिति ने अटकलों को हवा दी।

अग्नि-V बनाम अमेरिका का GBU-57 !

इसका वजन अग्नि-V का 7.5 टन वारहेड GBU-57 (2.4 टन) से कहीं भारी है। इसकी गहराई तक प्रभाव GBU-57 60 मीटर कंक्रीट भेद सकता है, जबकि अग्नि-V का बंकर-बस्टर 80-100 मीटर गहरे ठिकानों को नष्ट कर सकता है। रेंज GBU-57 एक बम है, जिसे B-2 स्टील्थ बॉम्बर से गिराया जाता है, जबकि अग्नि-V एक बैलिस्टिक मिसाइल है, जो 2500 किमी तक स्वतंत्र रूप से मार कर सकती है। अग्नि-V की 10 मीटर CEP इसे GBU-57 की तुलना में अधिक सटीक बनाती है। GBU-57 की तुलना में अग्नि-V का विकास स्वदेशी है, जिससे भारत की निर्भरता कम होती है।

क्या हैं चुनौतियां और जोखिम

अग्नि-V के इस वैरिएंट से पाकिस्तान और चीन के साथ हथियारों की दौड़ तेज हो सकती है। यदि किराना हिल्स जैसे ठिकानों पर हमला होता है, तो प्लूटोनियम-239 जैसे रेडियोधर्मी पदार्थों का रिसाव लाखों लोगों के लिए खतरा बन सकता है। एक माइक्रोग्राम प्लूटोनियम-239 फेफड़ों में जाने पर कैंसर का कारण बन सकता है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश इस मिसाइल को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा मान सकते हैं, जिससे भारत पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है।

भारत का अग्नि-V पारंपरिक वैरिएंट किराना हिल्स जैसे मजबूत भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता के साथ एक गेम-चेंजर है। यह मिसाइल अमेरिका के GBU-57 से अधिक शक्तिशाली और सटीक है, जिससे भारत की रक्षा रणनीति में नया आयाम जुड़ा है। यह पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेल और चीन की LAC पर गतिविधियों का जवाब देने में सक्षम है।

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