श्रीनगर गढ़वाल: जब फसलों में कीटों का अत्यधिक प्रकोप बढ़ जाता है, तो किसान हद से अधिक कीटनाशकों का प्रयोग करने लगते हैं, जो न तो मिट्टी की उर्वरता के लिए सही होता है और न ही इंसान की सेहत के लिए. गौरतलब है कि कीटनाशक का इस्तेमाल हमेशा से ही नुकसानदायक साबित हुआ है. चाहे कीटनाशक की मात्रा कम ही क्यों ना इस्तेमाल की जाए. अब तो कई ऐसे देश हैं जिन्होंने कई प्रकार के कीटनाशकों के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है.
उन देशों द्वारा बैन किए कीटनाशकों का इस्तेमाल खाद्यान्न उगाने के लिए करने पर वो देश उपज लेने से इनकार कर देते हैं. ऐसे में, यदि आप उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के किसान हैं और ऑर्गेनिक तरीके से खेती करना चाहते हैं, तो बिना कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों के प्रकोप से छुटकारा पाना चाहते है, तो यह खबर आपके लिए है.
विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा ने एक विशेष लाइट ट्रैप यंत्र विकसित किया है, जिससे किसान कीटों से अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं. इस यंत्र की मदद से कीटों को पकड़ा जा सकता है, जिससे फसल पर उनके प्रकोप से बचाव होता है. संस्थान के कृषि यंत्र विशेषज्ञ वरुण सुप्रियाल ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में गिडार नामक कीट बड़ी समस्या है. यह कीट भूमि के अंदर रहकर फसलों की जड़ों को काटता है, जिससे फसल सूखकर नष्ट हो जाती है. इस समस्या से निपटने के लिए किसान रात्रि में इस लाइट ट्रैप यंत्र का उपयोग कर सकते हैं, जो कीटों को आकर्षित कर उन्हें नष्ट करता है.
कैसे करता है काम ?
वरुण सुप्रियाल बताते हैं कि किसान फसलों को कीटों से बचाने के लिए वीएल लाइट ट्रैप का उपयोग कर सकते हैं. यह एक प्रभावी तकनीक है, जो विशेष रूप से रात में काम करती है. ट्रैप में लगा बल्ब बैटरी या बिजली से संचालित होता है और अपनी रोशनी से कीटों को आकर्षित करता है. जब कीट इस रोशनी की ओर आते हैं, तो वे ट्रैप की विशेष बनावट से टकराते हैं और नीचे रखे पानी से भरे बॉक्स में गिर जाते हैं. इस प्रक्रिया से कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे फसलों को नुकसान नहीं पहुंचता.
मात्र 1400 रुपए है कीमत
वरुण सुप्रियाल बताते हैं कि यह तरीका किसानों को कीटनाशक के उपयोग को सीमित करता है, जिससे पर्यावरण और फसल दोनों सुरक्षित रहते हैं. वीएल लाइट ट्रैप का उपयोग करना आसान है और यह कीट नियंत्रण के लिए एक सस्ता और प्रभावी समाधान साबित हो सकता है.इस लाइट ट्रैप की कीमत 1400 रुपए है. अगर उत्तराखंड के किसान इस यंत्र को खरीदना चाहते हैं तो वे 18001802311 नंबर पर सम्पर्क कर खरीद सकते हैं.







