तेहरान: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ युद्ध छठे दिन भी जारी है। इस युद्ध के किसी भी तरह से कमजोर पड़ने के कोई संकेत नहीं हैं। अमेरिका ने हिंद महासागर में ईरान के एक युद्धपोत को डुबोकर इस युद्ध के दायरे को और ज्यादा बढ़ा दिया है। इस बीच ईरान ने कई दिनों से होर्मुज जडडमरूमध्य को बंद किया हुआ है।
इससे दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई रुक गई है। अमेरिका और इजरायल ने भले ही ईरान की टॉप लीडरशिप को खत्म कर दिया है, लेकिन उनके लड़ने के जज्बे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। ईरान आज भी उसी तेजी से मिसाइल औऱ ड्रोन से हमले कर रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि ईरान का मल्टीलेयर वार मशीन क्या है, जिससे अमेरिका और इजरायल को सबसे ज्यादा खतरा है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स
ईरान की ओर से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ युद्ध की कमान सेना के हाथों में न होकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के पास है। IRGC सीधे ईरान के मौलवी शासन तंत्र को रिपोर्ट करती है और इसे मिलिट्री से भी ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है। यह दुनिया के कई इलाकों में प्रॉक्सी मिलिशिया को भी चलाता है, जिसका निशाना ईरान के दुश्मन होते हैं। देश में IRGC का समर्थन बाजिस करते हैं, जो ईरान के सतर्क छात्र और सामाजिक दबाव समूह हैं, जो किसी भी स्थानीय विरोध को बढ़ने से पहले ही खत्म कर देते हैं। वर्तमान में इन्हें खुली छूट मिली हुई है। ऐसे में ईरान में इनका विरोध कर जिंदा बचा रहना लगभग नामुमकिन है।
कुद्स फोर्स
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का सबसे अहम हथियार इसकी कुद्स फोर्स रही है। यह एक ऑपरेशनल ब्रांच है, जिसने अपने समय में ईरान के सबसे बड़े दुश्मनों के खिलाफ गुप्त सैन्य अभियान चलाए हैं। कुद्स फोर्स ने ही लेबनान में हिजबुल्लाह को जन्म दिया और उसे एक मिलिशिया के रूप में पाला पोसा। लेकिन बड़ी बात यह है कि पिछले साल इजरायल ने हिजबुल्लाह को लगभग पूरी तरह से खत्म कर दिया है। इसके बचे-खुचे लड़ाके आज भी इजरायली हमले के डर से अंडरग्राउंड हैं। इसके अलावा कुद्स फोर्स ने इराक में, हशद अल-शाबी – पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज के जरिए ईरान के दबदबे को बरकरार रखने की कोशिश की है।
आर्टेश
आर्टेश को ईरान की कन्वेंशनल आर्मी भी कहा जाता है। यह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बराबर सैन्य अभियान चलाती है, हालांकि यह सरकार के प्रति ज्यादा जिम्मेदार है। इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद राजशाही के समय के इंपीरियल मिलिट्री के ढांचे पर बनाया गया है। इसमें पुराने राजशाही समर्थक जनरलों को हटाकर इस्लामी शासन के करीबियों को भरा गया। इसका स्ट्रक्चर IRGC से ज्यादा प्रोफेशनल माना जाता है, हालांकि यह भी अंत में मौलवी शासन के प्रति ही वफादार है। हालांकि, आर्टेश का काम होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के इलाकों में ऑपरेशन को अंजाम देना है, जबकि IRGC पश्चिम में फासर की खाड़ी में ज्यादा ऑपरेशन चलाती है।
ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें
ईरान के पास ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों का बड़ा जखीरा है। इनमें लड़ाकू ड्रोन की संख्या काफी ज्यादा है। माना जाता है कि ईरान के पास 1,00,000 से 1,50,000 शाहिद ड्रोन का जखीरा है, जो पहले ही कई युद्धों में अपनी ताकत का प्रदर्शन कर चुका है। ईरान के पास हजारों की संख्या में शार्ट रेंज और मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें भी हैं। हालांकि, अमेरिका और इजरायल ने इनमें से कई को नष्ट कर दिया है, लेकिन अब भी इनकी भारी तादाद मौजूद है, जिसे वह लगातार फायर कर रहा है। यही कारण है कि इजरायल और अमेरिका को अपने महंगे एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।







