नई दिल्ली। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट यानी बड़ी रकम वाली FD पर ब्याज दर तय करने के नियमों में बदलाव करने जा रहा है. नए नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे. इसका मकसद है कि बड़ी FD पर बैंक कितना ब्याज दे रहे हैं, यह जानकारी और पारदर्शी हो, साथ ही बैंकों को अपनी जरूरत के हिसाब से थोड़ी छूट भी मिले.
बल्क डिपॉजिट आखिर होती क्या है?
अगर आप किसी बैंक में एक साथ ₹3 करोड़ या उससे ज्यादा की FD करवाते हैं, तो उसे बल्क डिपॉजिट कहा जाता है. ऐसी बड़ी डिपॉजिट पर बैंक आम तौर पर अलग ब्याज दर देते हैं, जो सामान्य FD से अलग हो सकती है.
बैंकों को अब रोज क्या करना होगा?
नए नियम के तहत बैंकों को हर कामकाजी दिन सुबह 10 बजे तक अपनी बल्क डिपॉजिट रेट सार्वजनिक करनी होगी. अगर किसी वजह से देरी हो जाए, तो बैंकों को 10 मिनट का अतिरिक्त समय यानी सुबह 10:10 बजे तक की छूट मिलेगी.
इतना ही नहीं, बैंकों को अपनी वेबसाइट पर जो रेट दिखाई गई है, ब्याज देते वक्त वही रेट फॉलो करनी होगी चाहे वह सामान्य डिपॉजिट हो या बल्क डिपॉजिट. इसका मतलब यह है कि अगर आप बड़ी FD करवाने की सोच रहे हैं, तो बैंक की वेबसाइट पर दी गई रेट अब भरोसेमंद और अहम जानकारी बन जाएगी.
क्या हर ब्रांच में एक जैसा रेट मिलेगा?
अभी तक ऐसा होता रहा है कि एक ही बैंक की अलग-अलग ब्रांच, एक जैसी बल्क डिपॉजिट पर अलग-अलग ब्याज दर दे देती थीं. नया नियम इस पर लगाम लगाता है.
अगर किसी एक दिन में समान रकम की बल्क डिपॉजिट अलग-अलग ब्रांच में जमा हो रही है, तो बैंक को सभी ब्रांच में एक जैसी ब्याज दर देनी होगी.
इससे ग्राहकों को यह डर नहीं रहेगा कि पास की ब्रांच में कम रेट मिल रही है और दूसरी ब्रांच में ज्यादा.
फिर बैंकों को छूट कहां मिलती है?
पूरी तरह एक जैसी रेट का नियम होने के बावजूद, बैंकों के पास एक शर्त पर अलग रेट देने की गुंजाइश बनी रहेगी. यह छूट लिक्विडिटी कवरेज रेशियो (LCR) फ्रेमवर्क से जुड़ी है.
आसान भाषा में समझें तो LCR यह अंदाजा लगाता है कि अगर बैंक में अचानक पैसों की तंगी आ जाए, तो अलग-अलग तरह की डिपॉजिट कितनी जल्दी निकल सकती हैं. इसी रिस्क के हिसाब से बैंक कुछ डिपॉजिट पर अलग ब्याज दर रख सकते हैं भले ही रकम एक जैसी क्यों न हो.
यही नियम NRI की रुपी डिपॉजिट पर भी लागू होगा. यानी अगर किसी NRI की बल्क रुपी डिपॉजिट का LCR के तहत अलग ट्रीटमेंट होता है, तो बैंक उस पर भी अलग ब्याज दर दे सकते हैं.
किन बैंकों पर लागू होगा यह नियम?
- कमर्शियल बैंक
- स्मॉल फाइनेंस बैंक
- रीजनल रूरल बैंक
- लोकल एरिया बैंक
- पेमेंट बैंक
- अर्बन कोऑपरेटिव बैंक







