Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

बिहार का शराब काण्ड

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
December 27, 2022
in राज्य, विशेष
A A
शराब दुकान
8
SHARES
262
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

अजय दीक्षित


बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुशासन के प्रतीक हो सकते हैं, लेकिन हमने कभी नहीं माना। वह अलग-अलग गठबंधनों के साथ बीते 17 साल से ज्यादा समय से बिहार के मुख्यमंत्री हैं, लेकिन वह आज भी देश के सबसे गरीब, पिछड़े, आपराधिक राज्यों में एक है। अभी छपरा में जहरीली शराब पीने से जो 50 मौतें हो चुकी हैं और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है, हम उसे नरसंहार मानते हैं, क्योंकि सुनियोजित तरीके से नकली शराब बेची जा रही है। इतने परिवार अनाथ हो गए या परिवारों के चिराग बुझ गए, लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा-शराब पियोगे तो मरोगे। कितनी संवेदनहीन, अमर्यादित, असंसदीय, अशोभनीय शब्दावली है यह बयान और नरसंहार पर विधानसभा में खूब हंगामा हुआ, तो मुख्यमंत्री भी आंखें घूर घूर कर कहते रहे अरे, क्या हुआ? अरे, तुम सब बर्बाद हो जाओगे। नीतीश कुमार का ऐसा अपशब्दीय और रौद्र रूप हमने कभी संसद में नहीं देखा। वह केंद्रीय कैबिनेट में भी रहे हैं। उनकी छवि शांत और संयमी राजनेता की रही है। हादसे और दुर्घटनाएं तो सार्वजनिक जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन राजनीतिक जीवन के उत्तरायण में ऐसी शब्दावली और ऐसा गुस्साए यह नीतीश कुमार कोई और हैं। बिहार में शराबबंदी 2016 से लागू है। लाखों ने यह कानून तोड़ा भी है, लिहाजा वे जेल की सलाखों के पीछे हैं। बिहार की अदालतों में जमानत के मामलों के ढेर लगे हैं। शराबबंदी के इन छह सालों में 1000 से अधिक लोग जहरीली शराब पीकर मर चुके हैं। यह कोई सामान्य आंकड़ा नहीं है। वे गरीब, पिछड़े, दलित आदिवासी रहे हैं, जो

इन्हें भी पढ़े

BJP

UP बीजेपी में बड़े बदलाव की तैयारी, शीर्ष स्तर पर 50% फेरबदल

May 29, 2026
ट्रंप भैंसा

बांग्लादेश का ‘ट्रंप भैंसा’ बना ग्लोबल सेंसेशन, 700 किलो के भैंसे को मिली VIP सुरक्षा

May 29, 2026
meta

Meta का बड़ा फैसला: अब Instagram, Facebook और WhatsApp इस्तेमाल करने के लिए देने पड़ेंगे पैसे!

May 29, 2026
Siddaramaiah DK Shivakumar

कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व की लड़ाई, क्या सिद्धारमैया की बराबरी कर पाएंगे डीके शिवकुमार?

May 28, 2026
Load More

जो महंगी, अंग्रेजी शराब का खर्च वहन नहीं कर सकते। शराबबंदी को एक चुनावी मुद्दे के तौर पर घोषित और लागू किया गया था, जिससे खुश होकर एक निश्चित महिला वोट बैंक नीतीश के पक्ष में स्थापित हो गया था। कमोबेश वह आज भी मौजूद होगा। शराबबंदी के बावजूद बिहार में नकली शराब, थैलियों में भर कर घर-घर पहुंचाने की व्यवस्था भी है। वर्दीधारी थानेदार और पुलिसियों के कथित संरक्षण में जहरीली शराब की भट्टियां चल रही हैं। क्या मुख्यमंत्री को जानकारी नहीं है ? जहर बेचने वालों को दंडित करने और उनके अड्डों को बन्द कराने का दायित्व किसका है ? जाहिर है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सुशासन का है, लेकिन मौतें लगातार हो रही हैं और नीतीश के पार्टी प्रवक्ता टीवी चैनलों पर बयान दे रहे हैं कि गैर-कानूनी काम करने के लिए सरकार मुआवजा नहीं देगी। इन सबके ऊपर मुख्यमंत्री को जहरीली संवेदनहीन टिप्पणी चुभती है-पियोगे, तो मरोगे। बिहार में शराबबंदी बिल्कुल नाकाम है या प्रशासन किसी और की छाया तले चल रहा है, लेकिन नीतीश की प्रतिष्ठा का सवाल है। यह उनकी कुंठा भी हो सकती है, क्योंकि वह शराबबंदी को सफल तरीके से लागू करने में अक्षम रहे हैं। शराबबंदी से 3000 करोड़ रुपए सालाना के राजस्व का नुकसान बिहार के खजाने को हो रहा है। इस पूरे अंतराल में, देश का सबसे गरीब और पिछड़ा राज्य करीब 30,000 करोड़ रुपए की चपत झेल चुका है। बेशक शराब पीना एक आदत है, व्यसन भी है। ऐसे व्यसन कुछ और भी हैं, लेकिन वे समाज में जारी हैं और जन-जागरण के प्रयास भी किए जाते रहे हैं। राज्य सरकारों के आबकारी विभाग खुलेआम शराब के लाइसेंस नीलाम करते हैं और शराब खुले बाजार, बार, होटलों आदि में उपलब्ध है। शराब राज्य सरकारों के राजस्व का सबसे अहम स्रोत है, लिहाजा इसे जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमति नहीं बन पा रही है।

मान्यता प्राप्त और अधिकृत शराब पीने की त्रासदियां नगण्य हैं। शराबबंदी गुजरात, नागालैंड, लक्षद्वीप, मिजोरम आदि कुछ और राज्यों में भी है। हरियाणा में तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल ने शराबबंदी लागू की थी। चूंकि वह नाकाम रही, नतीजतन उसे वापस लेना पड़ा। जहरीली शराब से अधिक खतरनाक वह शब्दावली है, जो बिहार के मुख्यमंत्री ने बोली है और वह माफी मांगने को तैयार नहीं हैं। यह मुद्दा संसद में भी उछला। इस पर अब भाजपा आक्रामक है और मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देने की लगातार मांग कर रही है। इस नरसंहार से सबसे ज्यादा महिलाएं प्रभावित हुई हैं। क्या वे नीतीश को समर्थन पर पुर्नविचार करेंगी ?

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
pm modi

नेहरू की नीति अपनाकर मोदी सरकार ने किया भारत को मालामाल!

June 23, 2023
Vips WCL gets 'Best Enterprise Award'

विप्स डब्लूसीएल को मिला ‘सर्वोत्कृष्ट उद्यम अवार्ड’

February 18, 2024
Amit Shah

दिल्ली : गृह मंत्री अमित शाह 1 मई को बोडोफा उपेंद्र नाथ ब्रह्मा मूर्ति का करेंगें अनावरण

April 30, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • हार्दिक पंड्या क्यों किया MI टीम छोड़ने का फैसला, जानिए
  • ये हैं LIC की 5 सबसे बेहतरीन पॉलिसी, 45 रुपए से बना सकते हैं 25 लाख का फंड
  • NEET पेपर लीक कैसे हुआ इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.