सतीश मुखिया/मथुरा : बलदेव के गांव जादोपुर स्थित तोमर निवास पर चल रही श्रीमद भागवत कथा में व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए भागवत वक्ता आचार्य दुर्गेश पाठक ने कहा कि आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा। हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति को आत्मिक बल मिलता है। व्यक्ति में धार्मिक आस्था जागृत होती है। दुर्गुणों की बजाय सद्गुणों के द्वार खुलते हैं। यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं।
श्रीमद् भागवत कथा का उद्देश्य ही परमात्मा के ज्ञान, आत्मा के ज्ञान और सृष्टि विधान के ज्ञान को स्पष्ट करना है। भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है। श्रीमद् भागवत से जीव में भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य के भाव उत्पन्न होते हैं। इसके श्रवण मात्र से व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं। विचारों में बदलाव होने पर व्यक्ति के आचरण में भी स्वयं बदलाव हो जाता है।उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से इंसान सही राह पर चलने लगता है। इससे भगवान के प्रति सच्चे प्रेम की भावना जाग्रत होती है। इस अवसर पर शिक्षाविद डॉ.जगदीश पाठक ने आचार्य दुर्गेश पाठक का सम्मान किया।
इस अवसर पर करतार सिंह, पूरन सिंह, मुकेश चन्द्र, सुरेश चन्द्र, मनोज तौमर, सुनील तौमर आदि उपस्थित रहे।







