प्रकाश मेहरा
नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने भारत की एकता, सामाजिक समरसता, स्वदेशी, सांस्कृतिक पहचान और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने फ्रांस, बांग्लादेश, नेपाल और अल्बानिया के हालात का उल्लेख करते हुए कहा कि “केवल सत्ता परिवर्तन से किसी देश की समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता। साथ ही उन्होंने समाज में विभाजन बढ़ाने वाली प्रवृत्तियों से सतर्क रहने और कानून की मर्यादा में रहकर अपनी बात रखने पर जोर दिया।”
1. ‘रिजीम चेंज’ से नहीं बदलते हालात, भारत की एकता पर जोर
विजयादशमी उत्सव को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने फ्रांस सहित बांग्लादेश, नेपाल और अल्बानिया के घटनाक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार या सत्ता बदलने मात्र से समस्याएं समाप्त नहीं होतीं। उनके अनुसार, कुछ ताकतें भारत में भी सत्ता परिवर्तन के जरिए अपने समर्थकों को आगे लाने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कुछ नेताओं पर ऐसी कोशिशों को समर्थन देने का आरोप भी लगाया। ये आरोप उनके भाषण में व्यक्त किए गए विचार थे।
भागवत ने आंदोलनकारियों, शासन-प्रशासन और राजनीतिक नेताओं से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी पक्ष के आचरण से समाज में द्वेष, वैमनस्य या विभाजन की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भावनाएं कितनी भी तीव्र क्यों न हों, विरोध और असहमति कानून की मर्यादा तथा शालीन व्यवहार के दायरे में ही व्यक्त किए जाने चाहिए।
2. ‘जब-जब बंटे, तब-तब कमजोर हुए’ सामाजिक एकता का संदेश
संघ प्रमुख ने भारत की धार्मिक, भाषाई, जातीय और सांस्कृतिक विविधता को देश की पहचान बताते हुए कहा कि इस विविधता के बीच एकता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने अलग-अलग समुदायों की पहचान का सम्मान करते हुए सभी को राष्ट्रहित में साथ चलने का संदेश दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने बंगाल विभाजन और 1947 के देश विभाजन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज में अलगाव और आपसी दूरी बढ़ने से देश की एकजुटता कमजोर होती है। उनके मुताबिक, भारत की सांस्कृतिक जड़ों और पूर्वजों की साझी विरासत को समझना सामाजिक समरसता की दिशा में महत्वपूर्ण है।
3. आंदोलन समाधान का माध्यम बनें, नफरत का नहीं
मोहन भागवत ने आंदोलनों की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी सामाजिक समस्या का समाधान खोजने और समाज के प्रति संवेदनशीलता के उद्देश्य से किया गया आंदोलन सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। हालांकि, यदि आंदोलनों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति, समुदाय या विचारधारा के खिलाफ नफरत बढ़ाने के लिए किया जाता है, तो वे अपने मूल उद्देश्य से भटक सकते हैं।
उन्होंने कहा कि देश और समाज के विकास की जिम्मेदारी केवल राजनीतिक नेतृत्व की नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भी है। सामाजिक सद्भाव और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार से ही देश की एकता मजबूत हो सकती है।
4. स्वदेशी, सांस्कृतिक पहचान और संत रविदास के विचारों का उल्लेख
RSS प्रमुख ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा का जिक्र करते हुए भारतीय संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करने की बात कही। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने और देश की सांस्कृतिक विरासत को समझने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बंगाल के राज नारायण बसु के योगदान को भी याद किया। भागवत ने संत रविदास के विचारों का उल्लेख करते हुए सामाजिक समरसता, भक्ति और स्वधर्म के प्रति निष्ठा के संदेश को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संत रविदास के विचारों ने कठिन परिस्थितियों में लोगों का मनोबल बढ़ाने और समाज को जोड़ने में भूमिका निभाई।
5. नशे, OTT और AI के इस्तेमाल पर जताई चिंता
मोहन भागवत ने युवाओं में नशीले पदार्थों की लत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें और उन्हें सही दिशा देने में अपनी भूमिका निभाएं।
डिजिटल माध्यमों और OTT प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री का जिक्र करते हुए उन्होंने जिम्मेदार उपयोग और आवश्यक नियमों की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि डिजिटल सामग्री का प्रभाव व्यक्ति, परिवार और समाज पर पड़ सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर भी उन्होंने सावधानी बरतने का संदेश दिया। उनके अनुसार, नई तकनीकों का उपयोग समझदारी और जिम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए।
6. विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
अपने संबोधन में भागवत ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। नेपाल में बाढ़ की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विकास और तकनीक जरूरी हैं, लेकिन इनके कारण प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने विकास की योजनाओं में अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और नैतिकता—तीनों पहलुओं को महत्व देने की बात कही।
विजयादशमी उत्सव में कई प्रमुख हस्तियां शामिल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। इसी परंपरा के तहत संघ हर वर्ष विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। शताब्दी वर्ष के अवसर पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव और शस्त्र पूजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम से पहले मोहन भागवत ने स्मृति मंदिर में संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। विजयादशमी के अवसर पर संघ की ओर से देश के विभिन्न हिस्सों में पथ संचलन भी आयोजित किए जाते हैं। संगठन इन आयोजनों को अपनी परंपरा, अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखता है।
LIVE| RSS शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव |डॉ. Mohan Bhagwat Ji का उद्बोधन | Nagpur रेशिमबाग मैदान







