नई दिल्ली। मेक इन इंडिया के तहत बना आईएनएस अंजदीप 27 फरवरी 2026 को नौसेना में शामिल होगा. 80% स्वदेशी उपकरणों से लैस यह युद्धपोत उथले पानी में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने में माहिर है. वाटर-जेट प्रोपल्शन और अभय सोनार तकनीक इसे एक साइलेंट किलर बनाती है. करीब 780 करोड़ की लागत वाला यह स्वदेशी शिकारी हिंद महासागर में चीनी घुसपैठ को रोकने में गेम-चेंजर साबित होगा.
रणनीतिक महत्व और कमीशनिंग विवरण: भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी मारक क्षमता को धार देने के लिए 27 फरवरी 2026 को चेन्नई बंदरगाह पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा. इस दौरान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की उपस्थिति में ‘अंजदीप’ को औपचारिक रूप से बेड़े में शामिल किया जाएगा. यह युद्धपोत उथले पानी में दुश्मन की आहट पहचानने में माहिर है जो भारत की लंबी तटरेखा और विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा.
उन्नत वाटर-जेट प्रोपल्शन और पाव: आईएनएस अंजदीप की सबसे बड़ी ताकत इसका वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम है, जो इसे पारंपरिक जहाजों की तुलना में पानी के भीतर अत्यधिक फुर्ती प्रदान करता है. यह युद्धपोत लगभग 25 समुद्री मील (Knots) की अधिकतम गति प्राप्त कर सकता है. इसकी मशीनरी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह चलते समय बहुत कम शोर पैदा करता है, जिससे दुश्मन की पनडुब्बियां इसे आसानी से डिटेक्ट नहीं कर पाती हैं. यह विशेषता इसे एक ‘साइलेंट किलर’ के रूप में स्थापित करती है.
स्वदेशी सोनार और सेंसर तकनीक: नौसेना का यह नया प्रहरी अत्याधुनिक स्वदेशी सेंसरों से लैस है. इसमें डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार सिस्टम लगाया गया है. ये सेंसर गहरे और उथले दोनों तरह के पानी में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को सटीक रूप से ट्रैक करने की क्षमता रखते हैं. इसके अलावा, इसमें आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट भी शामिल है, जो इसे समुद्र में किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार रखते हैं.
घातक हथियार और मारक क्षमता: हमलावर क्षमता की बात करें तो अंजदीप पर RBU-6000 एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और स्वदेशी ट्रिपल ट्यूब लाइटवेट टॉरपीडो लॉन्चर तैनात हैं. ये हथियार पानी के नीचे किसी भी लक्ष्य को नेस्तनाबूद करने में सक्षम हैं. आत्मरक्षा और सतही हमलों के लिए इसमें 30mm की क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) और रिमोट कंट्रोल से चलने वाली 12.7mm की गन लगी हैं. साथ ही, यह युद्धपोत रणनीतिक क्षेत्रों में माइन्स बिछाने की क्षमता भी रखता है, जो रक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
आत्मनिर्भरता और निर्माण लागत: आईएनएस अंजदीप ‘मेक इन इंडिया’ की एक बड़ी सफलता है, जिसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. आठ जहाजों के इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 6,311 करोड़ रुपये है. कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स (GRSE) और एलएंडटी शिपयार्ड के सहयोग से बना यह जहाज किफायती होने के साथ-साथ विश्वस्तरीय तकनीक से लैस है. स्वदेशी निर्माण के कारण इसके रखरखाव और भविष्य के अपग्रेड्स में विदेशी निर्भरता पूरी तरह खत्म हो गई है.
चीन के Type 056A से कड़ी तुलना: चीन के Type 056A कोर्वेट की तुलना में आईएनएस अंजदीप का आकार छोटा (900 टन) है जो इसे तटीय इलाकों में अधिक घातक बनाता है. चीन का जहाज मल्टीपर्पस है लेकिन अंजदीप को विशेष रूप से सबमरीन हंटिंग के लिए कस्टमाइज किया गया है. इसका लो-एकुस्टिक सिग्नेचर और बेहतर टर्निंग रेडियस इसे चीनी जहाजों की तुलना में संकरे समुद्री क्षेत्रों और उथले पानी में रणनीतिक बढ़त दिलाता है, जिससे यह हिंद महासागर में चीन की घुसपैठ को रोकने में प्रभावी है.







