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Home राष्ट्रीय

सरकार क्यों ले आई पहली एंटी टेरर पॉलिसी ‘प्रहार’? समझिए भारत का गेमप्लान

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 23, 2026
in राष्ट्रीय
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anti-terror policy 'Prahaar'
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नई दिल्ली। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी जंग को अब एक नया नाम और नई धार दे दी है. गृह मंत्रालय ने देश की पहली एंटी-टेरर पॉलिसी जारी की है, जिसे PRAHAAR (प्रहार) नाम दिया गया है. यह उन अदृश्य खतरों के खिलाफ भारत का अभेद्य किला है, जिसमें अब युद्ध के मैदान केवल सरहदें नहीं, बल्कि आपके मोबाइल स्क्रीन और इंटरनेट का डार्क वेब भी है.

सबसे पहली बात यह पाल‍िसी साफ कहती है क‍ि आतंकवाद का न तो कोई धर्म होता है, न कोई जात‍ि होती है और न कोई राष्‍ट्रीयता. लेकिन खतरे अब बदल गए हैं, इसल‍िए साइबर अटैक और हैकरों को टेरर के अंतर्गत लाया गया है. आखिर इस पॉलिसी की जरूरत क्यों पड़ी और इसमें आतंकवाद के किन नए चेहरों पर प्रहार करने की तैयारी है.

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अब तक आतंकवाद का मतलब था हाथ में बंदूक लिए घुसपैठिया. लेकिन ‘प्रहार’ पॉलिसी बताती है कि अब दुश्मन का चेहरा बदल चुका है. अब खतरा पानी, जमीन और हवा तीनों ओर से है. सीमा पार से अब केवल आतंकी नहीं आ रहे, बल्कि ड्रोन के जरिए ड्रग्स, हथियार और विस्फोटक भेजे जा रहे हैं.

‘प्रहार’ में साफ कहा गया है कि नॉन-स्टेट एक्टर्स यानी आतंकी और कुछ स्टेट एक्टर्स यानी दुश्मन देश ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करके भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं. आज का आतंकी एके-47 से ज्यादा खतरनाक तरीके से क्रिप्टो वॉलेट और एन्क्रिप्शन टूल का इस्तेमाल कर रहा है. पहचान छिपाने वाली तकनीकें एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं. ऐसे में इन पर नए तरीके से अटैक करने की योजना है.

‘प्रहार’ पॉलिसी में डार्क वेब पर भी फोकस होगा. आतंकी अब फंड जुटाने के लिए बैंकों का नहीं, बल्कि क्रिप्टो वॉलेट का सहारा ले रहे हैं. भर्ती और ट्रेनिंग गाइडेंस के लिए इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल हो रहा है. इंटरनेट की दुनिया में अपनी पहचान छिपाकर आतंकी हमले की साजिश रचना अब आसान हो गया है. ‘प्रहार’ इसी डिजिटल अंधेरे में छिपे शिकारियों को बेनकाब करने की रणनीति है.

CBRNED यानी वो खतरा जो रूह कंपा दे

इस पॉलिसी में CBRNED शब्‍द का ज‍िक्र है, यानी केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लियर, एक्सप्लोसिव और डिजिटल. गृह मंत्रालय का मानना है कि आतंकी अब ऐसे खतरनाक मैटीरियल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जिससे बड़े पैमाने पर तबाही मचाई जा सके. चाहे वह जहरीली गैस का हमला हो या डिजिटल वायरस के जरिए पूरे देश का पावर ग्रिड ठप करना, भारत अब इन ‘कल्पना से परे’ खतरों के लिए भी तैयार हो रहा है.

रेडिकलाइजेशन पर ‘सोशल’ स्ट्राइक

पॉलिसी का एक अहम हिस्सा रेडिकलाइजेशन है. आतंकी संगठन भारतीय युवाओं को गुमराह कर अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं. ‘प्रहार’ में इसे निपटने के लिए केवल बंदूक नहीं, बल्कि दिमाग के इस्तेमाल की बात कही गई है. जो युवा भटक गए हैं, उन पर पुलिस चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई करती है. सरकार ने माना है कि कट्टरपंथ के जहर को काटने के लिए उदारवादी प्रचारकों और एनजीओ की मदद लेना जरूरी है. यह पॉलिसी समाज के साथ मिलकर आतंकवाद की जड़ें काटने पर जोर देती है.

ग्लोबल टेरर और स्लीपर सेल का जाल

भारत ने इस पॉलिसी में अल-कायदा और ISIS जैसे ग्लोबल आतंकी समूहों का नाम लेकर दुनिया को आगाह किया है. जैसे भारत के अंदर छिपे हुए स्लीपर सेल के जरिए हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. विदेश में बैठे आका अब स्थानीय अपराधियों का इस्तेमाल लॉजिस्टिक्स और इलाके की रेकी के लिए कर रहे हैं. यानी अब आतंकी और अपराधी मिलकर एक बड़ा नेटवर्क बना चुके हैं.

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