नई दिल्ली : भारतीय नौसेना एक बार फिर दुनिया को अपनी समुद्री ताकत और नेतृत्व क्षमता दिखाने के लिए तैयार है. 21 फरवरी को गोवा के नेवल वॉर कॉलेज में ‘गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव-2026’ (GMC) का आगाज होने जा रहा है. नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी इस भव्य आयोजन की मेजबानी करेंगे. यह कॉन्क्लेव ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर में समुद्री डकैती, तस्करी और डार्क शिपिंग जैसे खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं. भारत इस मंच के जरिए संदेश दे रहा है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए न केवल जिम्मेदार है, बल्कि सक्षम भी है.
क्या 14 देशों की एकजुटता बदलेगी समंदर की सूरत?
इस बार कॉन्क्लेव में हिंद महासागर क्षेत्र के 14 प्रमुख देशों के नौसेना प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे. इसमें बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, सिंगापुर, थाईलैंड, इंडोनेशिया और म्यांमार जैसे पड़ोसी देशों के साथ-साथ केन्या, तंजानिया, सेशेल्स, मेडागास्कर और कोमोरोस जैसे अफ्रीकी देश भी शामिल होंगे. इन देशों का एक साथ आना इस बात का सबूत है कि समुद्री खतरों से निपटने के लिए अब कोई भी देश अकेला काफी नहीं है. सम्मेलन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होकर भारत के रक्षा संकल्प को दुनिया के सामने रखेंगे.
समुद्र में ‘अवैध और बिना रिपोर्ट’ वाली मछली पकड़ना (IUU Fishing) एक गंभीर समस्या बन गई है, जिससे देशों की अर्थव्यवस्था और समुद्री संसाधनों को नुकसान पहुंच रहा है. इसके अलावा ‘डार्क शिपिंग’, जिसमें जहाज अपनी पहचान और लोकेशन छुपाकर संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देते हैं, नौसेना के लिए बड़ी चुनौती है. कॉन्क्लेव में समुद्री आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, अवैध प्रवासन और नए जमाने के साइबर खतरों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. इन मुद्दों पर देशों के बीच रियल-टाइम जानकारी साझा करने और आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.
क्या ‘आत्मनिर्भरता’ से मिलेगी समुद्र में सुरक्षा?
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने हाल ही में ‘वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान’ में बताया कि भारतीय नौसेना लगातार अपनी ताकत बढ़ा रही है. उन्होंने गर्व से साझा किया कि वर्तमान में 50 से अधिक युद्धपोत स्वदेशी तकनीक से देश में ही बनाए जा रहे हैं. नौसेना अब केवल जहाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम सिस्टम और एडवांस्ड समुद्री निगरानी तकनीकों में भारी निवेश कर रही है. भारत का लक्ष्य 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करना है, जिसमें सुरक्षित समुद्र एक अनिवार्य शर्त है.
क्यों अहम है ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और समुद्री सहयोग?
भारतीय नौसेना ने हाल के वर्षों में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और अन्य बहुराष्ट्रीय सहयोग अभियानों के जरिए अपनी धाक जमाई है. गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव का यह पांचवां संस्करण हिंद महासागर के देशों के बीच अटूट विश्वास पैदा करने का माध्यम बन चुका है. भारत इस कॉन्क्लेव के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हिंद महासागर का व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रहे और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप या आतंकी गतिविधि को समय रहते कुचला जा सके. यह सम्मेलन न केवल सुरक्षा, बल्कि देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग का नया द्वार भी खोलेगा.







