नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है. पुतिन की तरफ से यूक्रेन के कई मुख्य शहरों पर लगातार हमले जारी हैं. अंतरराष्ट्रीय पटल युद्ध को लेकर कई चर्चाएं भी हुईं, लेकिन युद्धविराम पर सहमति ही नहीं बनी. अब पुतिन ने अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं. उन्होंने कहा, हम उस पड़ाव के बेहद ही करीब पहुंच गए हैं जहां से वापस आना अब संभव नहीं है. युद्ध को लेकर हम पश्चिमी राजनेताओं की साहसिकता भी देख रहे हैं.
पुतिन के इस बयान के कई मायने लगाए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि पुतिन ने ये कहकर, एक बार फिर से साफ कर दिया है कि वो युद्ध को रोकने के लिए किसी भी तरह से पीछे नहीं हटने वाले हैं. युद्धविराम पर निर्णय लेने के लिए समय अब निकल गया है. वहीं, दूसरी ओर अमेरिका भी रूस के प्रति अपने सख्त रुख दिखा रहा है. अमेरिका ने रूस के ऊपर कई तरह के प्रतिबंध बढ़ा दिए हैं.
बीते दिनों यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने, युद्धविराम को लेकर चीन पर बड़ा आरोप लगाया था. जेलेंस्की ने कहा कि चीन कीव में युद्ध विराम नहीं होने देना चाहता है. वो अन्य देशों पर दबाव भी बना रहा है कि शांति वार्ता में शामिल न हों. यूक्रेन ने ये भी आरोप लगाया कि चीन रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति के बाधक के तौर पर काम कर रहा है.
उधर रूस में, भारतीय नागरिकों के फंसे होने पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है. भारत सरकार ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में रूसी सेना द्वारा भर्ती किए गए दो भारतीय नागरिक मारे गए हैं. MEA ने इस मामले पर रूसी राजदूत के साथ, बातचीत की और दबाव भी डाला है. विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, “मास्को में हमारे दूतावास ने रक्षा मंत्रालय सहित रूसी अधिकारियों पर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द वापस लाने के लिए दबाव डाला है.
रूसी सेना में जबरदस्ती सेवा देने के लिए मजबूर किए जा रहे भारतीयों के लिए विदेश मंत्रालय ने कहा कि बातचीत लगातार जारी है. भारत ने रूस से ये भी मांग की है कि रूसी सेना द्वारा भारतीय नागरिकों की किसी भी आगे की भर्ती पर सत्यापित रोक लगाई जाए.







