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Home राष्ट्रीय

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी): शहरी भारत में बदलता जीवन

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
May 31, 2022
in राष्ट्रीय
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डॉ. सेजल पटेल

प्रत्येक पात्र लाभार्थी को एक पक्का घर उपलब्ध कराने के माननीय प्रधान मंत्री के विजन  को पूरा करने के उद्देश्य से , प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) (पीएमएवाई-यू) वर्ष 2015 में शुरू की गई थी । पिछले सात वर्षों में, पीएमएवाई-यू में लगभग  8.31 लाख करोड़ रुपये के निवेश, जिसमें से  2.03 लाख करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता है, के साथ लगभग 1.23 करोड़ घरों को स्वीकृति  दी गई है । मई 2022 तक, 1 करोड़ से अधिक घरों का निर्माण शुरू हो चुका है और वे निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं; जिसमें से 60 लाख से अधिक मकान बनकर तैयार हो चुके हैं और लाभार्थियों को सौंप दिए गए हैं ।

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पीएमएवाई-यू निसंदेह दुनिया में सबसे महत्वाकांक्षी और सबसे बड़ा आवास कार्यक्रम है । यह अत्यधिक प्रासंगिक है और सबके लिए आवास प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय विकास की प्राथमिकताओं और वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप है । कार्यकाल सुरक्षा की आवश्यकता को मानते हुए, मिशन ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, निम्न आय वर्ग और मध्यम आय वर्ग सहित सभी आय वर्गों में आवास की मांग को स्वीकार किया, और इसका उद्देश्य पानी के कनेक्शन, रसोई और शौचालय की सुविधा के साथ सभी मौसमों के अनुकूल, शालीन आवासीय इकाइयां प्रदान करके पर्याप्त भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है । आवास में लेंगिक समावेश में तेजी लाते हुए, मिशन आवास इकाइयों में संयुक्त रूप से या एकमात्र मालिक के रूप में महिलाओं का मालिकाना हक अनिवार्य करता है । मिशन ने व्यापक रूप से सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में प्रतिबद्धता को पूरा किया है : शून्य गरीबी का लक्ष्य 1, लैंगिक समानता का लक्ष्य 5, स्वच्छ पानी और स्वच्छता का लक्ष्य 6 , संवहनीय शहरों और समुदायों का लक्ष्य 11 और जलवायु कार्रवाई का लक्ष्य 13 ।

पीएमएवाई-यू पांच मूलभूत तरीकों से कुकी कटर यूनिट्स  और सिल्वर-बुलेट सॉल्यूशंस के साथ पूर्ववर्ती आवास योजनाओं से अलग है । सबसे पहले, पीएमएवाई-यू चार घटकों द्वारा आपूर्ति पक्ष या मांग पक्ष समर्थन के साथ, कैफेटेरिया दृष्टिकोण अपनाते हुए शहरी परिवारों के विभिन्न सेगमेंट्स की आवास मांग को पूरा करता है। स्थानीय स्तर पर महत्वाकांक्षी मांग सर्वेक्षणों के माध्यम से अलग-अलग आवास की मांग को जाना, जिससे इच्छुक लाभार्थियों को उपयुक्त घटक का विकल्प चुनने की अनुमति मिली और इससे  शहर आवास की मांग तैयार कर पाये, जिसके आधार पर प्रत्येक घटक के लिए राष्ट्रीय लक्ष्य तैयार किए गए। इस तरह के बॉटम-अप दृष्टिकोण के साथ, मिशन ने आवास और सम्मानजनक जीवन के लिए विभिन्न लक्षित समूहों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जरूरत के अनुसार उचित रूप से विभिन्न डिजाइन तत्वों को विकसित किया है।

पीएमएवाई-यू के लोकाचार समावेशी हैं तथा लिंग, जाति, पंथ या धर्म पर ध्यान दिये बिना सभी को समान अवसर प्रदान करते हैं।

दूसरा, पीएमएवाई-यू के तहत विजन पहले के आवास कार्यक्रमों के स्लम-फ्री सिटी के बजाय सबके लिए आवास है, जिसका अर्थ है कि यह केवल एक सेगमेंट और सबमार्केट के बजाय सभी आय वर्गों के लिए आवास की जरूरत को पूरा करता है ।

तीसरा, यह शहरी स्थानीय निकायों को पीएमएवाई-यू को आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय  के अन्य मिशनों जैसे अमृत, एसबीएम, एनयूएलएम के साथ अभिशरण का अवसर प्रदान करता है और इस तरह आवास मूल्य श्रृंखला और सीढ़ी में एकीकृत आवास नीतिगत  ढांचा प्रदान करता है ।

चौथा, मिशन सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करते हुए मांग आधारित दृष्टिकोण अपनाता है । यहाँ राष्ट्रीय और राज्य स्तर के संस्थान मौजूद हैं जो मिशन के कार्यान्वयन में सहायता प्रदान करते हैं ।

पांचवां, अनपेक्षित समूहों को लाभ कम करने के लिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक इच्छित लाभ पहुंचें, डिजिटल प्रौद्योगिकी को अपनाया गया है ।

इसमें विभिन्न लिंकेज शामिल हैं जिन्हें लाभार्थियों के आधार सत्यापन के लिए यूआईडीएआई पोर्टल के साथ रखा गया है, पीएफएमएस के साथ डीबीटी मोड के माध्यम से निर्माण से जुड़ी सब्सिडी का हस्तांतरण और जीआईएस आधारित केंद्रीय एमआईएस आदि । एक व्यापक और मजबूत एमआईएस प्रणाली विकसित की गई है जो सभी हितधारकों को निर्बाध रूप से जानकारी का प्रबंधन करने और भौतिक और वित्तीय प्रगति से संबंधित रिकॉर्ड रखने में मदद करती है । मकानों के निर्माण की प्रगति की निगरानी के लिए एमआईएस पांच चरणों वाली जियो-टैगिंग सुविधाओं से युक्त है । सूचना के प्रसार के लिए एमआईएस को विभिन्न डैशबोर्ड और डीबीटी भारत पोर्टल के साथ भी एकीकृत किया गया है ।

प्रत्यक्ष भौतिक और वित्तीय प्रगति के अलावा, मिशन ने अपने बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज के कारण अर्थव्यवस्था पर एक व्यापक प्रभाव डाला है, जो अर्थव्यवस्था के लगभग 130 क्षेत्रों को प्रभावित करता है । यह अनुमान लगाया गया है कि मिशन के तहत निर्माण गतिविधि में लगभग 413 मीट्रिक टन सीमेंट और 94 मीट्रिक टन स्टील की खपत होगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए बहुत आवश्यक प्रोत्साहन होगा । ऐसा अनुमान है कि मिशन 246 लाख रोजगार सृजित करने में सक्षम रहा है ।

इसके अलावा, पीएमएवाई-यू प्रौद्योगिकी नवाचार अनुदान (टीआईजी) के माध्यम से नई निर्माण प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दे रही  है । इस उद्देश्य के लिए ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज-इंडिया और इंडियन हाउसिंग टेक्नोलॉजी मेला आयोजित किया गया था। माननीय प्रधान मंत्री के विजन  के तहत किफायती आवास को हकीकत में बदलने के प्रयास ने लाइट हाउस परियोजनाओं की शुरुआत की ।

देश के छह स्थानों- चेन्नई, इंदौर, राजकोट, लखनऊ, रांची और अगरतला में 6,000 से अधिक फ्लैटों का निर्माण चल रहा है। निर्माण प्रक्रिया में उपयोग की जा रही नवीन तकनीकों को जीएचटीसी-इंडिया के तहत शॉर्टलिस्ट किया गया था और जो अब गरीबों के लिए किफायती, आरामदायक, समावेशी, ऊर्जा-कुशल और आपदा-रोधी घरों के निर्माण में मदद कर रही हैं । इन तकनीकों का उपयोग छात्रों, प्रोफेशनल्स, बिल्डर और विभिन्न हितधारकों  को सिखाया जा रहा है, ताकि वे उन्हें भारतीय संदर्भ में दोहरा सकें । हाल ही में, एलएचपी चेन्नई का उद्घाटन माननीय प्रधान मंत्री द्वारा किया गया था । परियोजना को 12 महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया था।

कोविड-19 महामारी ने शहरों में प्रवासी कार्यबल को किफायती किराये के आवास प्रदान करने की आवश्यकता को रेखांकित किया, जिसके परिणामस्वरूप 2020 में अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग कॉम्प्लेक्स योजना की शुरुआत हुई । अब तक, एआरएचसी  के तहत लगभग 80,000 आवास इकाइयों को मंजूरी दी गई है, जबकि 22,000 इकाइयों में निर्माण कार्य शुरू हो गया है ।
मिशन के माध्यम से लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान देने की दिशा में काम करने का प्रयास किया गया है । पिछले कुछ वर्षों में, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और विशेष रूप से पीएमएवाई-यू लाभार्थियों के सहयोग से सबके लिए आवास सुनिश्चित करने के प्रयासों को एक नई गति मिली है । पीएमएवाई-यू की सात साल की शानदार यात्रा रही है : दुनिया भर के लोगों के जानने योग्य एक प्रेरणादायक कहानी ।

*लेखक  प्रोफेसर एवं चेयर, हाउसिंग फैकल्टी ऑफ प्लानिंग, हेड, इंटरनेशनल ऑफिस आई, सीईपीटी यूनिवर्सिटी, आईकेएल कैंपस, अहमदाबाद हैं ।

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