धर्मशाला। तिब्बत की युवा पीढ़ी में आजादी की सोच खत्म करने के लिए चीन कई तरह के हथकंडे अपना रहा है। इसी कड़ी में तिब्बती युवाओं की सोच बदलने के लिए चीन ने अब जेनेटिक वार छेड़ दिया है। इसके लिए तिब्बत के युवक-युवतियों की चीन के लोगों से शादी करवाकर नई पीढ़ी के जींस को बदलने के सुनियोजित अभियान पर काम कर रहा है। इस रणनीति को अंजाम देने के लिए चीन का नेपाल और हिमाचल प्रदेश पर विशेष फोकस है। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार विषय पर करवाई जा रही संगोष्ठी में भारतीय भाषा संस्थान मैसूर और भारत सरकार की राज भाषा परिषद के सदस्य राम नरेश ने बताया कि चीन बेहद चरणबद्ध ढंग से जेनेटिक बदलाव की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
उसकी मंशा है कि तिब्बत की नई पीढ़ी की मूल सोच को ही खत्म कर दिया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों में तिब्बत की आजादी के लिए जारी संघर्ष खत्म हो जाए। जेनेटिक वार के इस अभियान से तिब्बतियों में चीन की मानसिकता को बढ़ावा मिलेगा और वे धीरे-धीरे अपनी जड़ों से कटते जाएंगे। इससे तिब्बत को अपने अधीन बनाए रखने में मदद मिलेगी। चूंकि भारत के राज्य हिमाचल प्रदेश और नेपाल में तिब्बती शरणार्थियों की एक बहुत बड़ी आबादी शिविरों में रह रही है। ऐसे में इन दोनों केंद्रों पर चीन का विशेष फोकस है। राम नरेश ने बताया कि बिहार के बलिया जिला में कुछ समय पहले चीन के दो युवकों की गिरफ्तारी में भी चीन के इन खतरनाक मंसूबों का खुलासा हुआ था।
चीन, पाकिस्तान और आईएसआई कर रही फंडिंग
राम नरेश ने बताया कि चीन, पाकिस्तान और आईएसआई की ओर से इसके लिए बाकायदा फंडिंग हो रही है। स्लीपर सेल भेजे जा रहे हैं। भारत की खुफिया एजेंसियों ने इसकी जड़ें नक्सलवाद को बढ़ावा देने से जुड़ी हुई भी पाई हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इस जेनेटिक वार का तिब्बत पर भयंकर और दूरगामी असर देखने को मिल सकता है।
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