रामचरितमानस को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने हिंदुत्व को लेकर एक बयान दिया, जिससे हंगामा खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि वो हिंदू विरोधी नहीं बल्कि हिंदुत्व विरोधी हैं। उनका मानना है कि हिंदुत्व संविधान विरोधी है, क्योंकि वो हत्या, हिंसा और विभाजन का समर्थन करता है।
दरअसल सिद्धारमैया कलबुर्गी में कांग्रेस के पूर्व विधायक बीआर पाटिल के जीवन पर आधारित एक किताब का विमोचन करने गए थे। वहां पर ही उन्होंने हिंदुत्व से जुड़ा ये बयान दिया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व हिंदू धर्म से अलग है। मैं खुद एक हिंदू हूं, लेकिन मैं मनुवाद और हिंदुत्व के खिलाफ हूं। उन्होंने साफ किया कि वो कभी भी हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं थे, लेकिन हिंदुत्व और मनुवाद में हत्या, हिंसा और विभाजन की गुंजाइश है। ऐसे में वो इसका समर्थन नहीं कर सकते हैं।
पहले भी दिया था ऐसा बयान
वैसे ये कोई पहली बार नहीं है जब सिद्धारमैया ने हिंदुत्व का मुद्दा उठाया हो। इससे पहले 8 जनवरी को भी उन्होंने इसी तरह का बयान दिया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि वो हिंदू हैं लेकिन हिंदुत्व के खिलाफ हैं। उन्होंने कभी भी अयोध्या में राम मंदिर का विरोध नहीं किया बल्कि राजनीतिक लाभ के लिए इसका इस्तेमाल करने के खिलाफ थे। भारतीय संविधान के अनुसार सभी धर्म समान हैं।
बीजेपी ने साधा था निशाना
आपको बता दें कि पिछले बयान को लेकर बीजेपी ने उन पर काफी निशाना साधा था। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने उन्हें ‘सिद्धारमुल्ला खान’ कहा था। ऐसे में अब दोबारा उनका बयान सामने आने से राज्य की सियासत गर्मा गई है। Karnataka: कर्नाटक कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट को किया हैक, इन नेताओं को बनाया निशाना रिटायरमेंट पर कही थी ये बात वहीं दूसरी ओर रविवार को सिद्धारमैया ने कहा था कि कर्नाटक का आगामी चुनाव उनका आखिरी चुनाव होगा, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी वो राजनीति में अपना कार्यकाल जारी रखेंगे।
रिटायरमेंट पर कही थी ये बात
वहीं दूसरी ओर रविवार को सिद्धारमैया ने कहा था कि कर्नाटक का आगामी चुनाव उनका आखिरी चुनाव होगा, लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी वो राजनीति में अपना कार्यकाल जारी रखेंगे।







