नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के चुनाव में बुरी तरह हारने के बावजूद प्रदेश कांग्रेस के नेता परिणाम से खुश नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि इस बार उनका मुख्य उद्देश्य चुनाव जीतना नहीं, बल्कि आम आदमी पार्टी को हराना था और मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने का अधिक लक्ष्य था। कांग्रेस इस लक्ष्य में काफी हद तक कामयाब हो गई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि उनकी पार्टी ने इस बार चुनाव में पूरी ताकत से आप को चुनौती नहीं दी होती, तो पार्टी का जनाधार बढ़ाना संभव नहीं होता। कांग्रेस का अधिकांश वोट बैंक कुछ साल में आप को स्थानांतरित हो चुका है, जिससे पार्टी की चुनावी स्थिति कमजोर हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने एक रणनीति के तहत दिल्ली न्याय यात्रा निकाली थी। उनका उद्देश्य था कि वे भाजपा के साथ मिलकर आप को चुनावी नुकसान पहुंचाएं और इस तरह से कांग्रेस को फिर से जनमानस में प्रासंगिक बनाया जाए।
देवेंद्र यादव का कहना है कि इस यात्रा ने अपना उद्देश्य पूरा किया, क्योंकि कांग्रेस के प्रयासों के कारण 14 सीटों पर आप को नुकसान हुआ और वह सत्ता से बाहर हो गई। कांग्रेस का यह कदम केवल चुनावी हार से कहीं अधिक था। कांग्रेस ने इस बार अपनी हार को एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा, जो पार्टी के पुनर्निर्माण की दिशा में एक जरूरी मोड़ साबित होगा।
उनका मानना है कि आप को कमजोर करने से कांग्रेस के जनाधार में बढ़ोतरी हुई है जो भविष्य में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। कांग्रेस ने इस चुनाव में खुद को पूरी तरह से समर्पित किया था, लेकिन मुख्य लक्ष्य था कि दिल्ली में भाजपा और आप के लिए मुश्किलें पैदा की जाएं। वे यह भी मानते हैं कि आप का वोट बैंक कांग्रेस के कारण ही खिसका और इसका परिणाम पार्टी के लिए सकारात्मक हो सकता है।







