हापुड़। हापुड़ में जिला खनन अधिकारी जिस कार का प्रयोग ऑफिस वाहन के रूप में कर रहे थे, वह एक खनन कंपनी की थी। सूत्रों का कहना है कि खनन कंपनी द्वारा बख्सीस के रूप में इस कार को दिया गया था।
इसके बदले में खनन कंपनी को निर्भीक होकर मिट्टी खनन करने का वरदहस्त प्राप्त था। यह बात अलग है कि विभाग से कार का नियमित रूप से किराया निकाला जा रहा है। इस प्रकार खनन कंपनी की कार पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखकर चलना कई संदेह उत्पन्न कर रहा है।
हापुड़ नंबर की सफेद रंग की बुलेरो गाड़ी पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ है। यह गाड़ी खनन के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी मैसर्स खालसा अर्थमूवर्स के नाम पर पंजीकृत है। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा गया है। इस गाड़ी का अब इस्तेमाल जिला खनन अधिकारी द्वारा किया जा रहा था। कार मालिक का पता मलकपुर गांव का दिया हुआ है।
इस पर जिला खनन अधिकारी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार लिखवाया गया था। दरअसल, इस कार पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगी है। इस पर पीछे की ओर कोई नंबर प्लेट ही नहीं है। कार की बाड़ी पर ही यूपी 37 वाई 9095 लिखा हुआ है।
यातायात प्रभारी छविराम सिंह अपनी टीम के साथ चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दाैरान उत्तर प्रदेश सरकार लिखी यह गाड़ी उनकी पकड़ में आई। जांच करने पर पता चला कि इसमें जिला खनन अधिकारी प्रशांत कुमार चलते हैं। उनके ऑफिस में इस कार को लगाया हुआ है। दरअसल खालसा अर्थमूवर्स जिले की बड़ी खनन कंपनी है।
ऐसे में खनन अधिकारी द्वारा खनन कंपनी की कार का प्रयोग करना कई तरह के सवालों को जन्म दे रहा है। फिलहाल यातायात प्रभारी ने उक्त कार का पांच हजार रुपये का चालान काट दिया है, लेकिन खनन विभाग में कार का लगे होना संबंधित अधिकारी की निष्ठा पर संदेह खड़ा कर रहा है।







