नई दिल्ली। मरीजों को जल्द जांच और इलाज कराने के नाम पर दिल्ली के ज्यादातर बड़े सरकारी अस्पतालों में रिश्वत व पैसे वसूलने का खेल चलता है। अस्पतालों में बड़ी संख्या में दलाल भी सक्रिय रहते हैं, जो मरीजों से पैसा वसूले हैं। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए एम्स ने 24 फरवरी को एक वाट्सएप हेल्पलाइन नंबर (9355023969) जारी किया था।
एम्स को इस हेल्पलाइन नंबर पर अब तक पांच शिकायतें मिली हैं। हेल्पलाइन जारी करने का मकसद यह था कि यदि कोई एम्स में ओपीडी कार्ड बनवाने, जल्दी इलाज व जांच कराने का भरोसा देकर रिश्वत की मांग करता है तो लोग उसके खिलाफ शिकायत कर सकें। एम्स प्रशासन का कहना है कि इस हेल्पलाइन पर अब तक मिली शिकायतों पर कार्रवाई चल रही है।
जल्दी इलाज के नाम पर लेते थे पैसे
25 नवंबर 2021 से दिसंबर 2023 के बीच एम्स में दो वर्षों में 149 दलाल पकड़कर पुलिस के हवाले किए गए थे। इनमें ज्यादातर निजी डायग्नोस्टिक लैब संचालकों के लिए काम करने वाले दलाल थे। कई मरीजों को जल्दी इलाज कराने के लिए पैसे लेते थे।
आरएमएल में भी सीबीआई की कार्रवाई में मरीजों को भर्ती कराने, ओपीडी पंजीकरण कराने, मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाने व जल्दी जांच कराने में अस्पताल के कर्मियों द्वारा रिश्वत लेने की बात सामने आई है। डॉक्टर ने बताया कि अस्पतालों में दबाव अधिक है। रेडियोलाजी जांच व सर्जरी में लंबी वेटिंग है। इसका फायदा उठाकर कुछ कर्मचारी मरीजों से रिश्वत लेते हैं।
इंप्लांट उपलब्ध कराने वाले वेंडरों की होती है आसान पहुंच
कार्डियक इंप्लांट तो ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में रेट कांट्रेक्ट से उपलब्ध होते हैं। आर्थोपेडिक सहित उन बीमारियों के इलाज में कमीशन का खेल अधिक होता है, जिसके इप्लांट अस्पताल के स्टोर से नहीं होते। कई अस्पतालों में आर्थोपेडिक इंप्लांट के लिए रेट कांट्रेक्ट नहीं होता। इंप्लांट बनाने वाली कंपनियों के वेंडरों की अस्पतालों में पहुंच आसान है।
पूर्व में हुईं घटनाएं
सितंबर 2022- एम्स में गायनी विभाग के एक प्रोफेसर पर मरीज की सर्जरी के लिए 36 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। इसके बाद डॉक्टर को राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में स्थानांतरित कर दिया गया था। वह एम्स से स्वैच्छिक सेवानिवृति लेकर जा चुके हैं। लेकिन उनके खिलाफ कोई बड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।
मार्च 2023- सीबीआई ने सफदरजंग अस्पताल के न्यूरो सर्जरी के एसोसिएट प्रोफेसर मनीष रावत को गिरफ्तार किया था। उस पर मरीजों से सर्जरी व इंप्लांट उपलब्ध कराने के लिए पैसे मांगने का आरोप है। वह अस्पताल के नियमों को दरकिनार कर मेडिकल इंप्लांट के डीलरों व बिचौलियों से सांठगांठ कर इंप्लांट उपलब्ध कराता था। वह जेल में है।
17 मई 2023- एम्स में यूपी के बदायूं की रहने वाली एक महिला गिरफ्तार की गई थी, जो खुद को एम्स का जूनियर डॉक्टर बताकर जल्दी इलाज का झांसा देकर मरीजों से पैसा वसूलती थी।
8 मई 2024- आरएमएल अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के दो डॉक्टर मेडिकल इंप्लांट बनाने वाले कंपनियों के डीलरों से पैसे लेने के आरोप में गिरफ्तार हुए। डॉक्टर कपंनियों व डीलरों द्वारा उपलब्ध कराए गए इंप्लांट अधिक इस्तेमाल कराने के लिए मरीजों को कहते थे।







