नई दिल्ली। भारत सरकार ने शुक्रवार को बताया कि लद्दाख में कुछ जमीन के टुकड़े, चोटियाँ, पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर और जल निकाय भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। इस बात को साफ करने के लिए सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे पर इन 28 जगहों और फीचर्स के मानक नाम तय कर दिए हैं। यह काम लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के परामर्श से हुआ है।
क्यों किया गया यह कदम
सरकार का मकसद है कि इन इलाकों को लेकर कोई भ्रम या गलत धारणा न रहे। इनमें चीन से लगने वाले इलाके भी शामिल हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन जगहों को औपचारिक रूप से पहचानने से लोगों में इनकी सही पहचान और जागरूकता बढ़ेगी। इन 28 जगहों में अक्साई चिन और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान के कुछ इलाके भी हैं, जिन्हें भारत लद्दाख का हिस्सा मानता है।
कितनी और किस तरह की जगहें शामिल हैं
इन 28 जगहों में 10 चोटियाँ, तीन पहाड़, सात जमीन के इलाके, दो ग्लेशियर, दो दर्रे, एक नदी, एक झील, एक जल निकाय और एक घाटी शामिल हैं।
सूची में हॉट स्प्रिंग और गोगरा भी हैं। ये दोनों जगहें 2020 में भारत-चीन के बीच हुए तनाव के दौरान विवाद के केंद्र में रहीं थीं। बाकी नामों में शामिल हैं – अलीशा गिरी, ब्रंगसा, चपचिंगल पास, कनिष्क पीक, करुन पीर माउंटेन, कुक्सेल, मार्तंड गिरी, पारपिक ग्लेशियर, स्कामरी ग्लेशियर, शचमिरिक पास, श्कोर्गा वैली, जोरावर पीक, देहरा कम्पास और द्रक कार्पो।
इसके अलावा जोल्मोरी, कुमारायना पॉइंट, पांगलुंग, रिंचेन ज़ंगपो, साक्याश्री गिरी, गुरु रिंपोछे, शामल लुंगपा (1950 के दशक में पेट्रोल और स्टेजिंग रूट), यांगपा नदी, मार्पा लोटसावा री, मिला रेपा कांगरी, शिव री और महेश्वरा री भी सूची में हैं।
अरुणाचल प्रदेश में भी पहले ऐसा हुआ
यह कदम अरुणाचल प्रदेश में लिए गए फैसले के कुछ महीने बाद आया है। वहाँ भी सीमा क्षेत्रों और दर्रों की 27 जगहों को इसी तरह आधिकारिक नक्शे पर नाम देकर शामिल किया गया था। चीन लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के सीमा इलाकों पर बार-बार अपना दावा करता रहा है। अरुणाचल की कुछ जगहों को वह चीनी नामों से भी बुलाता है। भारत इन दावों को हमेशा खारिज करता रहा है।







